Tuesday, 19th September 2017

जनहितैषी राजा राव लाल सिंह जी

Fri, Dec 9, 2016 10:55 PM

- राव बिजेंद्र सिंह -

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक रेवाडी राज्य के राजा राव गोपालदेव जी के सपुत्र राव लालसिंह जी का जन्म मंगसर शुदी चौदस संवत् १९१६ विक्रमी (9 दिसम्बर 1859) में उनकी ननिहाल उदयरामसर (बीकानेर, राज०) के अहीर ठिकाने में हुआ था।

 इनकी माता का नाम रानी किशनकौर था उदयरामसर के ये अहीर ठिकानेदार बीकानेर रियासत के खास पगडी बदल भाई थे । इसी दौरान अंग्रेजों ने बगावत के इलजाम में राव गोपालदेव जी की तमाम रियासत को जब्त कर लिया। इसके बाद राव लालसिंह जी के सर से पिता का साया उठने पर इनका लालन-पालन बीकानेर के महाराजा सरदार सिंह के राजमहलों में हुआ।

महाराजा बीकानेर ने इनके लालन-पालन, शिक्षा-दीक्षा, नौकरों व इनका खुद का जेब-खर्च आदि का कुल व्यय बीकानेर रियासत के कोष से देना स्वीकृत कर दिया गया क्योंकि राव लालसिंह जी खास पगड़ी बदल भाई जी के भानजे थे।  इन्होंने इतिहास व सामाजिक ज्ञान के साथ-साथ राजनैतिक शास्त्र व शस्त्र विद्या रियासत बीकानेर में ही रहकर गृहण की।  इस कार्य हेतू राव मानसिंह(आशियाकी गौरावास) को मानदेय तय करके मुकर्रर किया |
जब राव लालसिंह जी की आयु 13 वर्ष की हुई तो महाराजा सरदार सिंह (बीकानेर) ने इनकी गद्धी नशीनी के लिए राजाई-ठाठ-बाठ से रेवाडी भेजने की आज्ञा अपने दीवान को दी। आज्ञा का पालन करते हुए दीवान ने निम्नलिखित हुक्म जारी किया।
हिन्दी रूपान्तर :- नक्ल हुक्म न० 453 मोहर अदालत
न्यायालय पंडित मनफूल साहब बहादुर कम्पेनियन स्टार ऑफ इंडिया, स्वामी राजधानी प्राइममिनिस्टर(प्रधान-मंत्री) रियासत बीकानेर।
आज्ञा बनाम जुमला जागीरदारान, तहसीलदारान, थानेदारान, चौधरियान व चौकीदारान जो बीकानेर से रेवाडी जाने के रास्ते में आयें क्यो कि राव लाल सिंह जी अपनी गद्धी नशीनी के वास्ते अपने राज्य रेवाडी जा रहे हैं और नौकरादि सशस्त्र व सामग्री उनके साथ हैं इसलिए हुक्म हैं कि कोई भी नौकर या जागीरदार हथियारों के बारे में एतराज न करें और चौकी पहरा से खूबी के साथ उनकी रक्षा करें। सावधान रहें तिथि चैत शुदी पाँचें संवत् १९२९ विक्रमी(12 अप्रैल 1872ई०) के अनुसार सवार मय हथियार, नकारा, निशान व प्यादे मय हथियार-12
दिगर आदमी मय हथियार-25
हाथी मय जंजीर व सम्मान-1
घोड़ा खास मय सामान-2, रथ-2 , बहली -2, ऊँट सामान उठाने के वास्ते-25, चोबदार-1, चपरासी- 3, हरकारा मय छ़डो-1, ऊँट जम्बूरक-2, नर बैल-1, सक्का मय परवाल-1व चोला गुर्जबरदार-1, उनके सफर में साथ भेजे जा रहे हैं
हस्ताक्षर शरिश्तेदार
(मोहर)
राव लालसिंह के रेवाडी आने की खबर जब ठिकानेदारों चौधरियों थानेदारों व रेवाडी बासियों को लगी तो कई सहस्त्र आदमी राजा राव लालसिंह जी के स्वागत के लिए रेवाडी की सीमा से कई मील आगे ऊँटों, घोड़ों और रथों आदि पर सवार होकर आगे जा पहुँचे और भेंट पेश करके बहुत बडे़ जलूस के साथ रेवाडी के राजमहल रानी जी की ड्योढ़ी मे प्रवेश किया।
रानीजी की ड्योढ़ी के राजाजी हाल में गद्दी-नशीनी के वक्त मांदी, नसीबपुर, बहरोड़, कांटी, कानोड, कनीना, कोसली, भाडावास, सहारनवास व हरझोकरी आदि ठिकानों के चौधरियों, दिल्ली सूबे के डाबर क्षेत्र के सुरेहड़ा, जाफरपुर वगैरा 12 गांव, रेवाड़ी क्षेत्र के सभी सगौत्रीय भाई-बन्धुओं के साथ-साथ इलाके के सभी मुख्य सरदार उपस्थित हुए।
राजा राव लालसिंह जी का शुभ विवाह माह ज्येष्ठ संवत् १९२९ विक्रमी(17 जून 1872ई०) में ठिकाना कोसली में दफेदार बख़तावर सिंह सुकन्या सुरजकौर से हुआ।
राजा राव गोपालदेव की आजादी की मशाल को इन्ही दिनों स्वामी दयानन्द जी आर्य समाज के माध्यम से देश को जाग्रत कर रहे थे तभी राव लालसिंह ने स्वामी जी को रेवाडी लाकर नन्दसरोवर (बैकुंठधाम) अपने पूर्वजों की यादगार छतरियों में 14 दिनों तक रूकवा कर स्वामी जी के प्रवचन करवाए जिसमें क्षेत्र के लोगों बढ-चढ कर भाग लिया व स्वामी जी के प्रवचनों का लाभ उठाया।

स्वामी जी ने इस क्षेत्र के लोगों के सात्विक गुणों से प्रभावित होकर व क्षेत्र के महत्व को देखते हुए विश्व की सर्वप्रथम गऊशाला का निर्माण करवाया।
राजा राव लालसिंह जी अपने एक मात्र पुत्र राव रघुवीर सिंह को छोड़कर सन 1921ई० में बैकुन्ठवासी हुए |

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बहुत-बहुत सुंदर संकलन, संदेशवाहक और शानदार अभिव्यक्ति।वधाई औरशुभकामनाएं ढेर सारी।।।

डाक्टर रामलखनसिंहयादव

बहुत-बहुत सुंदर संकलन, संदेशवाहक और शानदार अभिव्यक्ति।वधाई औरशुभकामनाएं ढेर सारी।।।

डाक्टर रामलखनसिंहयादव

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