Sunday, 19th November 2017

बैंककर्मियों को पिटाई-लूटपाट का खतरा-जेटली को लिखा पत्र

Fri, Dec 2, 2016 10:30 PM

- महेंद्र नारायण सिंह यादव -

बैंकों में नकदी की भारी कमी के कारण अब बैंककर्मी अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित हो उठे हैं। घंटो लाइन में लगने के बाद जब लोगों का नंबर आता है तो अक्सर बैंकों में रुपए खत्म हो जाते हैं। लोगों को लगता है कि बैंक कर्मचारी गड़बड़ी कर रहे हैं। बैंककर्मियों से लोगों की बहस और झड़पें होने लगी हैं।

ऐसे में दो बड़ी बैंक यूनियनों ने नकदी की भारी कमी से निपटने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली से हस्तक्षेप की अपील की है। नोटबंदी के बाद बैंकिंग प्रणाली में करेंसी की कमी हो गई है और लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। 
     जेटली को लिखे पत्र में
ऑल इंडिया बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन और ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स एसोसिएशन ने कहा कि रिजर्व बैंक को बैंकों को पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराने को तत्काल कदम उठाने चाहिए और उसे दैनिक आधार पर आपूर्ति की गई नकदी का ब्योरा देना चाहिए। 
    पत्र में कहा गया है कि नोटबंदी के काफी दिन बीतने के बाद भी नकदी संकट कायम है। इसकी वजह कम मूल्य के नोट उपलब्ध न होना और एटीएम का काम नहीं करना है। 
     इसमें कहा गया है कि रिजर्व बैंक 100 रुपये के जो नोट भेज रहा है वो इतने गले-मुडे़े हैं कि ग्राहक इन्हें स्वीकार नहीं कर रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि रिजर्व बैंक बार-बार घोषणा कर रहा है कि बैंकों को पर्याप्त नकदी भेजी जा रही है, लेकिन वास्तविकता इससे कोसों दूर है। लोगों को लग रहा है कि बैंक जानबूझकर उन्हें भुगतान नहीं कर रहे हैं। 

यूनियनों ने कहा कि आरबीआई के बयानों से लगता है कि वह बैकों को पर्याप्त नकदी दे रही है। लेकिन बैंक कर्मचारी जानबूझकर जनता को नोट नहीं देकर परेशान कर रहे हैं। 

यूनियनों ने कहा है, "आरबीआई को सार्वजनिक रूप से इसका खुलासा करना चाहिए। क्योंकि आरोप है कि चुने हुए बैंकों को अधिक नकदी दी जा रही है और सार्वजनिक बैंकों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। इस आरोप का सही तरीके से जबाव दिया जाना चाहिए।"

 

 

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