Wednesday, 22nd November 2017

यहाँ बजेगा वहाँ बजेगा, अब तो सारे जहाँ में बजेगा !

Wed, Nov 30, 2016 9:48 PM

- Mahendra Narayan Singh Yadav- 

देशभक्ति और राष्ट्रगान के अटूट संबंध को देखते हुए कुछ अन्य आवश्यक सुझाव लागू करने के सुझाव आ रहे हैं। भविष्य में सिनेमाहॉल में फिल्म शुरू होने से पहले ही नहीं, बाद में भी और इंटरवल में भी राष्ट्रगान बजना चाहिए। एकाध बार फिल्म रोककर बीच में भी देशभक्ति चेक की जा सकती है। 

फिल्म कैसी भी हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। मचलती जवानी हो, साली का प्यार हो या मनोज कुमार की क्रांति हो, ये सब सेंसर बोर्ड से पास होकर आई हैं, उनमें हमें भेद नहीं करना चाहिए। फिल्म देखिए, फिल्म के रस से सराबोर होइए, किसने रोका है, लेकिन राष्ट्रगान के नियमों का पालन तो कीजिए।

अदालत का मैं बहुत ज्यादा सम्मान करता हूँ और हमेशा उसके फैसलों को बढ़-चढ़कर स्वीकार करता हूँ। यही कारण है कि अपनी तरफ से भी कई दमदार सुझाव दे रहा हूूँ। वैसे गंगा मैया का आशीर्वाद बना रहा तो ये सुझाव जल्द ही लागू भी हो जाएँगे।

घरों में कॉलबेल और मोबाइल की रिंगटोन का शुरू का 52 सेकंड का हिस्सा देशभक्ति चेक करने के लिए हो जाएगा। मैंने तो तय कर दिया है कि अगर कोई भूला-भटका अतिथि या परिचित मेरे घर आ गया तो तुरंत राष्ट्रगान बजाऊँगा, और आने वाले को सावधान मुद्रा में उसे सुनना पड़ेगा। जब वह जाने लगेगा तब भी यही प्रक्रिया दोहराऊँगा।

खेल के मैदानों में ही नहीं, पार्कों में भी खेलकूद शुरू करने से पहले राष्ट्रगान बजे, तो भी इससे देशभक्ति का ही संचार होगा न। कोई ज़रूरी तो नहीं कि सिनेमाहॉल जाने वालों को ही देशभक्ति की जरूरत पड़ती हो। मेरा सुझाव तो है कि केवल राष्ट्रगान बजाकर ही क्यों रह जाएँ, हमें तो बाद में "भारत माता की जय", "देश की रक्षा कौन करेगा, हम करेंगे -हम करेंगे"  जैसे नारे भी लगाना अनिवार्य कर देना चाहिए।

गौ-रक्षक दलों को परिचय पत्र दिए जाने के अहम कार्य के पूरे होते ही राष्ट्रगान रक्षक दलों का गठन शुरू कर दिया जाएगा। ये लोग सिनेमाहॉल ही नहीं, बाकी हर संवेदनशील जगह पर तैनात रहकर देशभक्ति चेक करते रहा करेंगे, और खड़ा न होने वालों को कूटा करेंगे।

शादी में बारात निकलने से पहले भी राष्ट्रगान बजाकर देशभक्ति चेक की जानी चाहिए।
वैवाहिक जीवन तो नए जीवन की शुरुआत होती है, और ये शुरुआत सुहागरात से शुरू होती है। इस शुरुआत के समय पहले देशभक्ति चेक कर ली जाए तो आने वाली पीढ़ियों को भी बाइ डिफाल्ट देशभक्त पैदा होने से कोई नहीं रोक सकता।


पुलिस भी सड़क पर बैरीकेट लगाकर चेकिंग करने के बजाय राष्ट्रगान बजाकर संदिग्ध और असंदिग्ध दोनों तरह के लोगों को असंदिग्ध रूप से रुकने पर मजबूर कर सकती है। किसी तरह का लेनदेन भी राष्ट्रगान के पार्श्वसंगीत के साथ हो तो देशभक्ति का ही संचार होगा।
सवारी बसों और ट्रेनों के रवाना होने से पहले और प्रत्येक स्टॉप पर देशभक्ति चेक होती रहनी जरूरी है।

ऐसा पाया गया है कि अपराध और आतंकवाद के खात्मे के लिए फेक एनकाउंटर करने जरूरी हैं जिस पर हजार हजार सैल्यूट मिलते हैं। ऐसी देशभक्ति के अभियान के लिए निकलने से पहले पुलिस के जवानों के अंदर अतिरिक्त देशभक्ति का संचार किया जा सकता है। बाद में एनकाउंटर किए गए लोगों की लाशों के पास खड़े होकर भी वही मधुर धुन बजाई जाए और उसका वीडियो भी बनाकर जारी किया जाए। 

जेलों में भी कैदियों के भागने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए भी यही तरीका अपनाया जा सकता है। ताले इस तरह से बनाए जाएं कि उनमें लकड़ी की चाभियां तभी फिट आएं जब राष्ट्रगान बजाया जाए। इस प्रकार कैदियों के भागने से पहले ही उनके अंदर देशभक्ति संचारित की जा सकती है।

देशभक्ति की भावना का संबंध दिल से होना चाहिए और इसे भावनात्मक मामला माना जाना उचित ही है। जब कोई नेता भावुक होकर रोना चाहे तो उसको पहले राष्ट्रगान बजाया जाना चाहिए ताकि रोने का संबंध देशभक्ति से स्पष्ट हो सके।

कई बार देश के लिए घर परिवार छोड़ने की नौबत आती ही है। ऐसा अनिवार्य किया जाए कि जब भी कोई देशभक्ति के वशीभूत होकर पत्नी को छोड़कर भागे तो राष्ट्रगान बजाया जाए। इससे सभी को पता भी चल जाया करेगा कि ये सब जो छोड़ा-छोड़ी हो रही है, वह देशहित में हो रही है। ऐसा न होने पर लोग सारी उमर फालतू के सवाल करते रहते हैं।

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Shaandaar. Good idea,sir

yeshwant mewari

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