Tuesday, 19th September 2017

फ्री में आलू बेचने पर मजबूर हुए नोटबंदी के मारे किसान

Wed, Nov 30, 2016 2:59 PM

- महेंद्र नारायण सिंह यादव -

नोटबंदी से परेशान किसान अब आलू मुफ्त में बाँटने पर मजबूर हो रहे हैं। विरोध स्वरूप इन किसानों ने राजधानी लखनऊ में विधानसभा के सामने ही फसल मंडी लगा ली और आलू तथा अन्य सामग्री मुफ्त में बाँटने लगे हैं।

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन कर रही है। यूनियन के नेताओं का कहना है कि फसल तैयार है लेकिन कोई खरीदने को तैयार नहीं है, और न ही कोल्ड स्टोरेज में फसल जमा करवा पा रहे हैं, तो ऐसे में आलू मुफ्त बाँटने के अलावा और क्या विकल्प है। 

किसानों का कहना है कि नोटबंदी का तो अब कोई मतलब ही नहीं रह गया क्योंकि सरकार ने काला धन रखने वालों को फिफ्टी-फिफ्टी का ऑफर दे दिया है। अब तो यही समझ में आ रहा है कि पूरी कवायद किसानों के पास जमा रकम को निकलवाने और बुआई न होने देने के लिए की गई है।

छत्तीसगढ़ में भी आलू उगाने वाले किसान संकट में हैं। फसल बेचने के लिए ट्रकों में भरकर किसान मंडी पहुँच तो गए लेकिन हजार और पाँच सौ के नोट चलन से बाहर होने, और 2000 के नोट पर्याप्त मात्रा में न होने के कारण आढ़तिये आलू खरीदने को ही तैयार नहीं हैं। हफ्ते भर तक उत्तर प्रदेश में मंडियों पर इंतजार करते करते किसान परेशान होकर अपनी फसल को वहीं छोड़कर घर लौटने लगे हैं। 

झारखंड में भी किसानों का आलू सड़ने लगा है। लोहरदग्गा में नोटों की कमी के कारण आलू कोई नहीं खरीद रहा है। कुछ किसान तो आधे दामों पर भी आलू बेचने को तैयार हैं, लेकिन फिर भी उन्हें खरीददार नहीं मिल रहे हैं।

 

 

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