Friday, 22nd September 2017

पंजाब की अतिसुरक्षित नाभा जेल की मजेदार कहानी

Mon, Nov 28, 2016 12:47 AM

- Mahendra Narayan Singh Yadav -

पंजाब की सबसे सुरक्षित जेलों में शुमार की जाने वाली नाभा जेल में जिस तरह बड़ी आसानी से दस बंदूकधारी फायरिंग करते रहेऔर 6 खूंखार आतंकवादियों को छुड़ा ले गए, उससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

पता चला है कि इस जेल से कैदियों का भागना और फिर पकड़ा जाना, आसानी से और बार-बार होता रहता है। 6 कैदियों को फरार होने की घटना के बाद उत्तर प्रदेश में शामली से इनके एक मददगार परमिंदर के पकड़े जाने पर खुलासा हुआ कि इस जेल से तो भागना बहुत आसान रहता है, भले ही इसमें खतरनाक आरोपी बंद किए जाते हों।

हैरानी की बात ये है कि भोपाल जेल ब्रेक और एनकाउंटर की घटना के उलट, इस बार मीडिया जेल के सुरक्षा इंतजामों, सीसीटीवी कैमरों आदि की चर्चा नहीं कर रहा है। अधिकतर खबरों में केवल फायरिंग और 6 कैदियों के भागने की चर्चा है। बाकी सब केवल हरमिंदर सिंह मिंटू के आपराधिक इतिहास की चर्चा पर पन्ने रंग रहे हैं।

रविवार को सुबह जेल से 6 कैदियों को फरार कराए जाने, एक कांस्टेबल को मारे जाने, गुस्साई पुलिस द्वारा कार में सवार एक निर्दोष लड़की को मारे जाने के बाद खबर आई कि उत्तर प्रदेश में शामली से फरार कैदियों का एक मददगार परमिंदर सिंह पकड़ा गया है। कमाल की बात ये है कि परमिंदर भी डेढ़ माह पहले इसी जेल से भागा था, लेकिन उसे पकड़ने की कोई कोशिश नहीं की जा रही थी। ऐसा लगता है कि इसमें जेल अधिकारियों की मिलीभगत थी। परमिंदर के पास से बड़ी मात्रा में गोला-बारूद भी बरामद बताया जा रहा है।

फरार कैदियों के हरियाणा के तरफ भागने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन फिर पुलिस शामली कैसे पहुँच गई। इसका मतलब यही निकलता है कि पुलिस को पहले से पता था कि नाभा जेल से डेढ़ माह पहले भागा परमिंदर शामली में है, और एक साथ छह कैदियों के फरार होने की घटना से हो रही किरकिरी से बचने का यही तरीका उसे नजर आया कि परमिंदर को पकड़ लिया जाए और उसे कैदियों का मददगार बता दिया जाए।

परमिंदर के पास से कई आटोमेटिक हथियार बरामद किए गए हैं। परमिंदर सिंह इनमें से मुख्य अपराधी है। ये इससे पहले भी एक बार नाभा जेल से भाग चुका है लेकिन पुलिस ने इसे फिर से पकड़ लिया था और दोबारा फिर ये आरोपी जेल से फरार हो गया था। पुलिस ने जो फार्च्यूनर गाड़ी बरामद की है उसका नंबर HR 20AD 7659 है।

सवाल उठता है कि ये परमिंदर सिंह कैसा आरोपी है जो पूरी नाभा जेल की सुरक्षा पर अकेला भारी पड़ता है। कड़ी सुरक्षा वाली जेल नाभा से ये एक बार भागा, फिर पकड़ा गया, फिर दूसरी बार भागा, और इस बार उसने छह अन्य कैदियों को भी निकलवा लिया। 

क्या नाभा जेल ऐसी है कि कोई भी कैदी आसानी से अंदर-बाहर होता रहे। हैरानी यह भी है कि परमिंदर जितनी आसानी से भागता है, उतनी आसानी से पकड़ा भी जाता है।

रविवार 27 नवंबर को फरार हुए कैदियों का सुराग देने वाले को 25 लाख रुपए का इनाम देने का भी ऐलान किया गया है। क्या जेल के अधिकारी-कर्मचारी खुद ही ऐसे इनाम हड़पने के लिए तो कैदियों को भगाने-पकड़ने का आँख-मिचौली वाला खेल नहीं खेलते रहते?

पहले करीब सौ राउंड गोलियाँ चलाने की खबर आई थी, लेकिन अब बताया जा रहा है कि करीब दो सौ राउंड गोलियाँ आतंकवादियों ने चलाईं। इतनी गोलीबारी में केवल दो कांस्टेबलों को गोलियाँ लगीं जिनमें से एक की मौत हुई और एक घायल बताया जा रहा है। वारदात के समय कितने सुरक्षाकर्मी तैनात थे, ये नहीं बताया जा रहा है। जेल सुरक्षाकर्मियों ने कितनी राउंड गोलियाँ चलाईं, ये भी नहीं बताया जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि आतंकवादी हवा में गोलियाँ चलाते रहे।

सबसे बड़ी आशंका तो पंजाब के आगामी चुनावों को देखते हुए राजनीतिक साजिश की लग रही है। अपनी हार पक्की देखकर भाजपा-अकाली दल की सरकार भी मध्य प्रदेश के भोपाल की तरह जेल ब्रेक की घटना प्रायोजित करा सकती है। 

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ऐसा तो नहीं कि जान-बूझकर परमिंदर को डेढ़ माह पहले भगा दिया गया हो, और फिर इस घटना को मिली-भगत से अंजाम देकर उसे फिर पकड़ लिया गया हो। दो-दो बार एक ही जेल से भागने वाला परमिंदर इतनी आसानी से पकड़ में आ गया, जबकि उसे बहुत बड़ा मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

सवाल यह भी उठता है कि परमिंदर के पहली बार और दूसरी बार जेल से भागने पर सरकार ने क्या कार्रवाई की थी? क्या कोई जाँच बैठाई गई थी, या किसी पर जिम्मेदारी तय की गई थी? मीडिया को अब तक ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई है।

 

 

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