Thursday, 21st September 2017

2000 का नोट का मामला पहुँचा कोर्ट में

Mon, Nov 21, 2016 9:07 PM

500 और 1000 के नोटों को हटाने के बाद जारी किए गए 2000 रुपए के नोट फिर विवादों में आ गए हैं। इस बार मामला नोट पर देवनागरी अंकों के इस्तेमाल को लेकर है। 2000 के नोट पर देवनागरी अंकों में भी लिखा गया है जिसको लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से इस बारे में जवाब माँगा है और पूछा है कि उसने किस अधिकार के तहत नोट पर देवनागरी अंकों का इस्तेमाल किया है। इस बारे में एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी लगाई गई है।

सीपीआई के नेता बिनॉय विश्वम ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए कहा है कि 2000 के नोट में देवनागरी लिपि के इस्तेमाल से संविधान की धारा 343 (1) का उल्लंघन किया गया है। कई अन्य लोगों ने भी इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। उम्मीद की जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट इन याचिकाओं पर 25 नवंबर को सुनवाई करेगा। 

सीपीआई नेता बिनॉय ने बताया है कि संविधान सभा ने यह तय किया था कि नोट पर अंक अंतरराष्ट्रीय फॉर्म में लिखे जाएंगे और इसके लिए धारा 343 (1) में प्रावधान किया गया है, और 1960 के राजभाषा एक्ट के अनुसार भी किसी और लिपि में अंकों को नहीं लिखा जा सकता।

 मद्रास हाईकोर्ट की मदुरई खंडपीठ में इसी मुद्दे को लेकर याचिका के पी टी गणेशन ने दायर की है। यही तर्क देते हुए श्री गणेशन के वकील ने हाईकोर्ट में कहा कि 2000 के नोट छापने में धारा 343 और 1960 के राजभाषा अधिनियम का उल्लंघन किया गया है।

याचिका कर्ता के वकील ने कहा है कि नोटों में अगर देवनागरी अंकों का इस्तेमाल करना है तो इसके लिए संसद को कानून पारित करना होगा, जो कि नहीं किया गया है। मदुरई खंडपीठ ने केंद्र सरकार से कहा है कि वो इस बारे में वित्त मंत्रालय से जवाब माँगे।

 

 

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Our country needs some changes for improvement, so the act 343(1) may also be ammended if possible.

A. K. Mathur

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