Sunday, 19th November 2017

भोपाल एनकाउंटर केस : कोर्ट ने सरकार को फटकारा

Fri, Nov 11, 2016 1:58 AM

भोपाल में सेंट्रल जेल से कथित रूप से भागे 8 सिमी सदस्यों के मुठभेड़ में मारे जाने की घटना पर भोपाल की अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है। अदालत ने कहा है कि मारे गए आठों कैदी न्यायिक हिरासत में थे, तब उनके जेल से भागने या मारे जाने की सूचना अदालत को देने में नौ दिन का समय क्यों लगा।

भोपाल कोर्ट के चीफ ज्युडिशल मेजिस्ट्रेट भूभास्कर यादव ने सिमी कार्यकर्ताओं के वकील परवेज आलम द्वारा दायर की गई याचिका की सुनवाई की और इस दौरान राज्य सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बावजूद एनकाउंटर की जगह को सील नहीं किया गया, इससे सबूत नष्ट होने की आशंका बनी रही।

अदालत ने पूछा कि क्या जेल कर्मचारी के कहने मात्र से मान लिया जाए कि वे कैदी जेल से भागे हैं। उसने कहा कि सरकार ने जाँच की घोषणा की है और इसका मतलब यही है कि अभी जेल तोड़कर भागने की घटना प्रमाणित नहीं हुई है। अदालत ने कहा कि जेल के अधिकारी और मंत्री मीडिया को लगातार बयान देते रहे लेकिन उन्होंने अदालत को सूचना देना जरूरी नहीं समझा जबकि वे कैदी न्यायिक हिरासत में थे।

गत बुधवार को वकील परवेज आलम ने जेल में बंद 21 सिमी सदस्यों से मुलाकात करने की इजाजत लेने के लिए अपील की थी जिस पर कोर्ट ने उन्हें कैदियों से मिलने की इजाजत दे दी थी।

परवेज एनकाउंटर में मारे गए 8 सिमी सदस्यों में से 5 सदस्यों के वकील हैं। वे जेल में बंद दो और कैदियों का केस भी लड़ रहे हैं। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को एनकाउंटर की घटना से जुड़ी सारी जानकारी देने के लिए 17 नवंबर तक का समय दिया है।

 

जेल में बंद सिमी सदस्यों से मिलकर आए वकील परवेज आलम ने यह भी आरोप लगाया कि जेल में उनके मुवक्किलों को प्रताड़ित किया जा रहा है, और एनकाउंटर करने की जरूरत पर सवाल उठाने के चलते उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है।

31 अक्टूबर 2016 को भोपाल की सेंट्रल जेल से सिमी के 8 सदस्य भाग निकले थे जिन्हें पुलिस ने कुछ ही घंटों में आठ-नौ किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर मार गिराने का दावा किया था। पुलिस के इस एनकाउंटर की वीडियो फुटेज लीक होने के बाद से ही इस एनकाउंटर के फर्जी होने के आरोप लग रहे हैं।

अब नौ दिन तक कोर्ट को भी एनकाउंटर की जानकारी न देने से यह संदेह और गहराता जा रहा है कि मामले में कुछ गड़बड़ है। आशंका जताई जा रही है कि कैदियों को पहले जेल से निकाला गया। फरार होने की कहानी गढ़ने के लिए हेड गार्ड रमाशंकर यादव की हत्या की गई, और फिर मनिखेड़ा की पहाड़ी पर आठों को मार डाला गया ताकि सच सामने न आ सके।

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