Wednesday, 20th September 2017

"जातिगत आरक्षण समाज के लिए घातक" प्रश्न पर शिक्षिका को क्लीन चिट!!!!!

Sun, Oct 23, 2016 8:00 PM

- Mahendra Narayan Singh Yadav -

मध्य प्रदेश में 2015-16 में माध्यमिक शिक्षा मंडल की बारहवीं बोर्ड की परीक्षा में ‘आरक्षण समाज के लिए घातक’ विषय पर पूछे गए प्रश्न के मामले में जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि पेपर बनाने वाली शिक्षिका ने ये प्रश्न जान-बूझकर नहीं पूछा था। इस तरह से रिपोर्ट ने शिक्षिका को क्लीन चिट देने की कोशिश की गई है।

हालाँकि अपर मुख्य सचिव दीपक खांडेकर की जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षिका और स्कूल के मॉडरेटर ने मंडल के निर्देशों का पालन नहीं किया जिस कारण यह प्रश्न पेपर में शामिल हो गया था। रिपोर्ट में शिक्षिका वंदना व्यास को साफ-साफ दोषी नहीं कहा गया है जबकि श्रीमती व्यास बार-बार दोहराती रहीं हैं कि उन्होंने प्रश्न बिलकुल सही पूछा था।

आरक्षण पर नकारात्मक सवाल पूछे जाने पर सरकार की काफी निंदा हुई थी, जिसके बाद ये जाँच बैठाई गई थी। हिंदी के पेपर में 10 नंबर के निबंध में दिए गए विकल्पों में ‘जातिगत आरक्षण देश के लिए घातक’ विषय भी दिया गया था। बाद में विरोध होने पर इस प्रश्न को शून्य घोषित किया गया था।

मंडल की जाँच रिपोर्ट में शिक्षिका वंदना व्यास को बचाने की कोशिश की गई है, और कहा गया है कि यह प्रश्न जान-बूझकर नहीं पूछा गया था। बाद में वंदना व्यास को ब्लैक लिस्टेड भी किया गया था। हालाँकि वंदना व्यास ने ब्लैक लिस्टेड किए जाने का कड़ा विरोध किया था और कोर्ट जाने का इरादा भी जाहिर किया था। मामले में एक ओबीसी मॉडरेटर संतोष स्वर्णकार को सस्पेंड भी कर दिया गया था।

वंदना के पक्ष में सवर्ण समाज के कई नेता भी सामने आए थे और कई वकीलों ने उनका केस मुफ्त लड़ने का प्रस्ताव भी किया था। आरक्षण की घोर विरोधी शिक्षिका वंदना व्यास ब्राह्मण जाति की हैं, और उनका कहना था कि उन्हें ऐसे प्रश्न पूछने से रोकना अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक है।

पेपर सेट करने वाली शिक्षिका वंदना व्यास कहती रही हैं कि वे इस प्रश्न को फिर से शामिल करवाकर पूर्णांक फिर से 100 करवाएँगी। वो बार-बार कहती रहीं कि उन्होंने बिलकुल सही सवाल पूछा था। इस विषय पर विधानसभा में भी हंगामा हुआ था और इसके बाद सरकार ने वंदना व्यास को बंदूकधारी गार्ड की सुरक्षा की मुहैया कराई थी।

दलितों और पिछड़ों के प्रति नकारात्मक सोच रखने वाली और अपने  विचारों को सार्वजनिक रूप से जाहिर करने वाली ब्राह्मण शिक्षिका वंदना व्यास को अपर मुख्य सचिव दीपक खांडेकर की रिपोर्ट में स्पष्ट दोषी न बताना और न उनके खिलाफ किसी कार्रवाई की सिफारिश करने से ये मामला फिर से तूल पकड़ने की आशंका है।

पहले से आशंका जताई जा रही थी कि इस मामले की जाँच किसी एससी, एसटी या ओबीसी के सक्षम अधिकारी से न कराई गई तो रिपोर्ट के नतीजे सही नहीं होंगे। 

सामाजिक न्याय से जुड़े संगठन माँग करते रहे हैं कि जाँच किसी एससी, एसटी या ओबीसी के अधिकारी से कराई जाए, लेकिन माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जाँच ब्राह्मण अधिकारी, अपर मुख्य सचिव दीपक खांडेकर को ही सौंपी जिन्होंने ये स्वीकार तो किया कि शिक्षिका ने दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया, लेकिन इसके बावजूद ब्राह्मण शिक्षिका वंदना व्यास को दोषी नहीं बताया। खास बात यह भी कि स्कूल शिक्षा विभाग भी एक ब्राह्मण मंत्री दीपक जोशी के पास ही है जो कि पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे हैं।

Comments 0

Comment Now


Videos Gallery

Poll of the day

शिवराज सरकार किसानों को बर्बाद क्यों कर रही है?

29 %
10 %
60 %
Total Hits : 75805