Friday, 22nd September 2017

जानिए कैसा था भाजपा नेता अरुण तिवारी बाबा की अय्याशी का जाल !!!

Sat, Oct 22, 2016 2:42 PM

कानपुर में घर पर अय्याशी का अड्डा चलाने और अपनी ही बेटियों के साथ गलत हरकत करने की कोशिश में गिरफ्तार भाजपा नेता अरुण तिवारी बाबा की काली करतूतें उसके राजनीतिक रसूख के पीछे छिपी रहती थीं। अपने को बाबा कहलवाकर वह धार्मिक नेता की भी छवि बनाए था और अनेक साधु-संतों से उसका उठना-बैठना रहा है।

राजनीतिक रसूख के बल पर ही वह भाजपा के बड़े नेताओं में शुमार किया जाने लगा था। 30 सालों से वह भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बना हुआ है। उसके करीबी नेताओं में खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ही नहीं, बल्कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तक शामिल हैं।

2009 में अरुण तिवारी बाबा ने अकबरपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था और कांग्रेस के राजाराम पाल से चुनाव हार गया था। दूसरे नंबर पर बसपा प्रत्याशी और तीसरे पर बाबा रहा था, लेकिन उसको मिलने वाले वोटों की संख्या काफी ज्यादा थी। यहाँ तक कि सपा प्रत्याशी कमलेश पाठक से भी ज्यादा वोट उसे मिले थे।

अरुण तिवारी अपनी विशाल कोठी को ही अपनी अय्याशी का अड्डा बनाए था। इसके लिए उसने सेकंड फ्लोर नियत कर रखा था। इसी फ्लोर पर वह लड़कियाँ रखता था जिनका इस्तेमाल वह अपनी वासना पूरी करने के लिए करता था, और बाद में अपने रसूख बढ़ाने के लिए भी उसने लड़कियों का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। पिछले कुछ दिनों से तो उसके घर का सेकंड फ्लोर पूरी तरह से अय्याशी और सुरा-सुंदरी का अड्डा बन गया था। रात को लड़कों का भी आना-जाना बेरोकटोक रहता था। फ्लोर पर रहने वाली लड़कियों को वह सार्वजनिक रूप से अपनी दत्तक पुत्रियाँ बताता था।

अरुण तिवारी की निगाह अपनी बेटियों पर भी पड़ चुकी थी। पहले वह उनके साथ गलत हरकत करने की कोशिश कर चुका था, लेकिन संकोच और शर्म के कारण पत्नी और बेटियों ने पुलिस में शिकायत नहीं की। इससे उत्साहित होकर, बाबा अपनी बेटियों को भी अपने कारोबार में शामिल कराने पर उतारू हो गया था और जब उसकी हरकतें हद से ज्यादा बढ़ गईं तो पत्नी ने पुलिस में शिकायत कर दी।

2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के कई बड़े नेताओं के समर्थन के बावजूद उसे टिकट नहीं मिल सका क्योंकि अमित शाह अपनी अलग रणनीति पर चल रहे थे। बाद में उसके संबंध अमित शाह से भी अच्छे हो गए। पिछले राज्यसभा चुनावों में भी उसे टिकट देने की कोशिशें की गईं थी, लेकिन मामला कुछ बन नहीं पाया था। पिछले लोकसभा चुनावों के बाद से अरुण तिवारी ने लोकसभा चुनावों के बजाय राज्यसभा की सीट हथियाने पर ही ज्यादा जोर लगाना शुरू कर दिया था और इसके लिए एक साथ कई बड़े नेताओं से ताल्लुक बढ़ाने शुरू कर दिए थे।

जून 2014 में अरुण तिवारी की दादा नगर इंडस्ट्रियल एरिया में लेमिनेटर रैपर फैक्टरी में रामकुमार द्विवेदी नाम के गार्ड की भी संदेहास्पद हालत में मौत हो गई थी। रामकुमार के परिजनों ने उसे हत्या का मामला बताया था, लेकिन राजनीतिक रसूख के कारण अरुण तिवारी बाबा पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

2014 के लोकसभा चुनावों के समय उसने अपनी छवि संत और महात्मा की प्रचारित करवाई थी। अकबरपुर के शिबली गाँव  का रहने वाला अरुण तिवारी  के पिता स्कूल अध्यापक थे, लेकिन खुद ये हाईस्कूल तक पास नहीं कर पाया। जल्द ही ये दिल्ली गया जहाँ उसने अच्छा रसूख और पैसा कमाया और फिर कानपुर में बिजनेस शुरू किया। चुनावों के समय इसने प्रचारित करवाया था कि ये करीब 15 साल से नंगे पैर रहता है, और केवल गंगाजल पीता है तथा फलाहार करता है। साध्वी ऋतंभरा, महंत गोपालदास आदि से उसके निकट संबंध रहे हैं।

जानने के लिए क्लिक करें क्या है पूरा मामला अरुण तिवारी की अय्याशी और गिरफ्तारी का

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