Thursday, 21st September 2017

टूटी परंपराएँ : रैंप पर चलीं विधवाएँ

Sun, Oct 16, 2016 12:31 AM

नई दिल्लली: लहंगा-चोली पहने और चमकदार मेकअप लगाए नब्बे साल से अधिक उम्र की एक विधवा छड़ी लेकर रैंप पर चली। उन्होंने वर्षों पुरानी उस परंपरा को तोड़ने की कोशिश की जिसके तहत विधवाओं से सांसारिक सुखों को छोड़ने की अपेक्षा की जाती है।
     उनका कैटवाक विधवाओं के लिए आयोजित फैशन शो का हिस्सा था। इस फैशन शो का आयोजन एनजीओ सुलभ इंटरनेशनल ने किया था जिसमें वृंदावन और वाराणसी के साथ-साथ केदारनाथ के निकट देवली ब्रह्मग्राम की तकरीबन 400 विधवाओं ने हिस्सा लिया। देवली ब्रह्मग्राम को उत्तराखंड में आई विनाशक बाढ़ के बाद से विधवाओं के गांव के नाम से जाना जाता है। 
     33 साल की विधवा उर्मिला तिवारी ने कहा, मैंने जो आज कपड़े पहने हैं, उसे देखें। ऐसे कपड़े मैंने अपनी शादी के दिन भी नहीं पहने थे।
     वृंदावन से आईं उर्मिला तिवारी ने फैशन शो के महत्व को समझाया। तिवारी ने कहा कि विधवाओं से अक्सर कहा जाता है कि वो ये कर सकती हैं या ये नहीं कर सकती हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन ऐसी बाधाओं को तोड़ता है । 
    उन्होंने कहा, हमें नया जीवन दिया गया है। इस मेकअप के जरिए हमारी जिंदगी में रंग भरा गया है।

परम्पराओं को तोड़ते हुये पिछले कुछ वर्षों से दीपावली और होली के त्योहार मना रही कई विधवाओं ने यहां मावलंकर हाल में आयोजित कार्यक्रम में मॉडलों के साथ रैंप पर चहलकदमी की । वे रंगीन वस्त्रों में और काफी सजी-धजी थीं ।

वृन्दावन और वाराणसी से आयीं इन विधवाओं के लिये सुलभ इंटरनेशनल ने यह कार्यक्रम आयोजित किया । उन्होंने रैंप पर उतरने के साथ-साथ भजन भी गाया ।

बाद में सुलभ के संस्थापक बिन्देश्वर पाठक ने भी रैंप पर उतरकर उनकी हौंसला आफजायी की । सुलभ इंटरनेशनल ने कुछ वर्ष पहले वृन्दावन और वाराणसी में विधवा आश्रमों में रह रही विधवाओं को होली और दीपावली मनाने के लिये प्रेरित किया और अब वे हर वर्ष इन त्योहारों को मनाती हैं । यह संगठन इन विधवाओं को 2000 रुपये प्रतिमाह सहायता राशि भी देता है ।

Comments 6

Comment Now


Previous Comments

शानदार खबर. एक अच्छी पहल.

Puru

लाजवाब .

C choice

Grt change,such events not only motivate others bt give life to those who r living hopeless lives.

Shalu mujumdar

बिंदेश्वर पाठकजी , अपने विधवाओं को नये, रंग बिरंगी कपडो मे सजाकर रैप पर चलाया,बड़ा प्रशंसनीय काम किया इसलिए आपको हार्दिक धन्यवाद.प्रशंसा तो उन विधवाओं की भी होनी चाहिये जिन्होंने समाज की पुरानी गलत परम्परा को तोड़ने की हिम्मत की है.अगर ऐसा होता रहा तो अवश्य महात्मा ज्योतिबा फूले का,स्त्रियों को स्वतंत्रता मिलने का सपना साकार होगा. बिंदेश्वर पाठक जैसे सामाजिक कार्यकर्ता लोग चाहे तो विधवाओं के ही नहीं बल्कि अन्य सभी स्त्रियों की समस्या हल करा कर उन्हें समान अधिकार दिला सकते है.

धरमदास.सोनारे

स्त्रीमुक्ती का उचित और साहसी प्रयास है.

धरमदास.सोनारे

Videos Gallery

Poll of the day

शिवराज सरकार किसानों को बर्बाद क्यों कर रही है?

29 %
10 %
60 %
Total Hits : 75821