Friday, 22nd September 2017

न्याय के लिए लड़ना नहीं छोड़ेंगे : श्रेयात बौद्ध

Tue, Sep 20, 2016 2:08 AM

लखनऊ में बाबासाहब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी में अब रोहित वेमुला कांड को दोहराए जाने की तैयारी हो रही है। यूनिवर्सिटी ने यौन शोषण के आरोपी रहे प्रोफेसर कमल जैसवाल पर मारपीट के आरोप में आठ दलित छात्रों को निष्कासित कर दिया है। जिन आठ दलित छात्रों को बर्खास्त किया गया है उसमें से एक छात्र पीएचडी एंट्रेंस में टॉपर है जबकि दूसरा छात्र दूसरे नंबर पर है। बर्खास्त छात्र श्रेयात बौद्ध (एम.ए. इतिहास) पीएचडी एंट्रेस में जनरल कैटेगरी में टॉपर हैं। हैरानी की बात ये है कि बिना किसी जाँच के हमले के अगले ही दिन इन छात्रों को निष्कासित कर दिया गया।

ये वही यूनिवर्सिटी है जहाँ रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काले झंडे दिखाए गए थे। निष्कासित छात्रों का आरोप है कि उसके बाद से ही विश्वविद्यालय में दलित छात्रों की प्रताड़ना बढ़ गई है और इसमें भी प्रतिभाशाली दलित छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है। निष्कासित छात्रों के पक्ष में समर्थन लगातार बढ़ता जा रहा है और देश के बाकी हिस्सों में भी इनके पक्ष में प्रदर्शन की तैयारियाँ होने लगी हैं।

न्यूज़लाइव 24 ने निष्कासित छात्र श्रेयात बौद्ध से खास बातचीत की और पूरे मामले पर उनका पक्ष जानने की कोशिश की।

न्यूज़लाइव 24 : श्रेयात जी, बीबीएयू से 8 दलित छात्रों के निष्कासन का मामला क्या है?

श्रेयात : ये मामला दलित छात्रों को जातिगत आधार पर प्रताड़ित करने का है। इन छात्रों को प्रोफेसर कमल जैसवाल पर हमले का आरोपी बताया गया और इनका पक्ष सुने बिना इन्हें निष्कासित कर दिया गया। इन छात्रों में मेरे अलावा, संदीप शास्त्री, रामेंद्र नरेश, जय सिंह, संदीप गौतम, अश्विनी रंजन, सुमित कुमार और अजय कुमार शामिल हैं।

 

न्यूज़लाइव 24 : प्रोफेसर कमल जैसवाल के खिलाफ भी छात्रों में काफी नाराजगी बताई जाती है। छात्र क्यों नाराज हैं प्रोफेसर जैसवाल से

श्रेयात : प्रोफेसर कमल जैसवाल विवादित प्रोफेसर हैं। चार साल तक ये अपनी ही छात्रा के यौन शोषण के आरोप में निलंबित रहे। 25 मार्च 2009 से 2013 तक ये सस्पेंड ही थे।

न्यूज़लाइव 24 : प्रोफेसर कमल जैसवाल पर हमला कब हुआ था और निष्कासन कब हुआ।

श्रेयात : दोनों घटनाओं का समय ही ये बताता है कि पहले से सब कुछ सुनियोजित था। प्रोफेसर कमल जैसवाल ने हमले का समय बताया है 7 सितंबर को रात्रि सवा नौ  बजे और अगले दिन यानी 8 सितंबर को सीधा हम लोगों को निष्कासित कर दिया गया। न कोई जाँच हुई, न पूछताछ।

आमतौर पर कुलपति आर सी सोबती ठीक माने जाते हैं, लेकिन दिक्कत ये है कि अब वे प्रोफेसर कमल जैसवाल के कहे मुताबिक काम करते हैं।

 

न्यूज़लाइव 24 : प्रोफेसर कमल जैसवाल से आपका क्या विरोध है?

श्रेयात : प्रोफेसर कमल जैसवाल दलित छात्र-छात्राओं के प्रति बहुत निकृष्ट सोच रखने वाले हैं। उन्होंने मुझे पहली बार नहीं फंसाया है। ये तीसरी बार फँसाया है। सबसे पहले उन्होंने तब फँसाया था जब वो प्रॉक्टर थे। जिसके बारे में आउटलुक में भी छपा था। इसके बाद 3 मई 2016 को भी 19 छात्रों समेत मुझ पर भी एफआईआर कराई थी धरना देने के आरोप में।

न्यूज़लाइव 24 : आप लोगों ने उसके बाद क्या क्या कदम उठाए.. किस-किससे मिले और क्या आश्वासन मिले

श्रेयात : अपने गैरकानूनी निष्कासन के विरोध में हम लोगों ने केंद्रीय ग्रीवांस में लेटर भेजा है। पीएमओ और एससी कमीशन में भी लेटर भेजा है, लेकिन अभी तक कोई रेस्पॉन्स नहीं मिला है ।

हम लोग केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले से मिले हैं। राज्यपाल राम नाइक से भी मिले हैं। प्रोफेसर कमल जैसवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर 18 तारीख को डीजीपी से भी मिले हैं। आश्वासन तो हर जगह से मिला है, लेकिन ठोस कार्रवाई कुछ नहीं हुई है।

न्यूज़लाइव 24 : विश्वविद्यालय प्रबंधन से भी बात हुई होगी?

श्रेयात : विश्वविद्यालय प्रबंधन ने एक समिति बनाई है। उसकी रिपोर्ट के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। ये तय है कि हम ये अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे। अपने हक की लड़ाई हर स्तर पर लड़ेंगे। हम सामाजिक न्याय और समतामूलक समाज की स्थापना का सपना नहीं छोड़ सकते।

 

 

 

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Ap logo ki Jo bhi muhim hogi hum tan man se samrthan karege.Jai Bhim

Raghu math

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