Monday, 25th September 2017

उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की असल सचाई

Mon, Sep 19, 2016 11:23 PM

  - महेंद्र नारायण सिंह यादव -

मीडिया में प्रचारित आम छवि के विपरीत सचाई यही है कि कानून-व्यवस्था के हिसाब से सबसे असुरक्षित राज्य भाजपा के शासन वाले हैं, और उत्तर प्रदेश तथा बिहार को केवल मीडिया के जरिए ही बदनाम किया जाता है।

2015 की नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट ने साबित किया है कि विशाल आबादी के राज्य उत्तर प्रदेश में पिछले पाँच सालों में समाजवादी पार्टी की सरकार ने हर तरह के अपराधों पर बहुत सफलता से नियंत्रण लगाया है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2015 की रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि बलात्कार, हत्या, महिलाओं-बच्चियों की तस्करी और अन्य अपराधों में उत्तर प्रदेश और बिहार को बदनाम करना गलत है, जबकि मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, छत्तीसगढ़ जैसे भाजपाशासित राज्य ही सबसे आगे हैं। कमोबेश यही स्थिति 2014 और उसके पहले भी रही है।

हालाँकि, ऐसा पहले भी कई बार साबित हो चुका है कि मीडिया के सहयोग से कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी यही प्रचारित करती रही हैं कि उत्तर प्रदेश और बिहार में सबसे ज्यादा अपराध है और इन राज्यों में आम जनता बिलकुल असुरक्षित है।

दरअसल उत्तर प्रदेश में होने वाली हर घटना को टीवी चैनल जिस तरह से प्रमुखता से दिखाते हैं, और हर अपराध के लिए सीधे अखिलेश यादव या उनकी पार्टी को जिम्मेदार ठहराते हैं, उससे ऐसा संदेश जाने लगता है कि उ. प्र. में अपराध ज्यादा हैं।

2015 की एनसीआरबी की रिपोर्टों के विश्लेषण से यह साफ पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की समाजवादी सरकार ने अपराधों पर काफी रोक लगाई है, और भाजपाशासित राज्यों की तुलना में तो उत्तर प्रदेश की स्थिति बहुत ही अच्छी है।

2015 की एनसीआरबी की रिपोर्ट के आंकड़ों को भी जनसंख्या से अलग हटकर केवल संख्यात्मक रूप से दिखाकर ये साबित किया जाता है कि उत्तर प्रदेश में अपराध ज्यादा हैं। इस बात की अनदेखी की जाती है कि उत्तर प्रदेश की आबादी 20 करोड़ से ज्यादा है, जबकि महाराष्ट्र की करीब साढ़े 11 करोड़, बिहार की साढ़े दस करोड़, मध्य प्रदेश की सवा 7 करोड़, राजस्थान की 6 करोड़ 86 लाख, गुजरात की 6 करोड़, आंध्र प्रदेश की 5 करोड़, छत्तीसगढ़-हरियाणा की ढाई-ढाई करोड़ ही है।

जनसंख्या घनत्व के हिसाब से उत्तर प्रदेश में अपराधों की संख्या ज्यादा दिखना स्वाभाविक है और 20 करोड़ की आबादी वाले राज्य की तुलना 5 करोड़ या दस करोड़ की जनसंख्या वाले राज्यों से संख्या आधार पर नहीं की जा सकती। इसके लिए आबादी के हिसाब से औसत दर देखनी पड़ेगी।

मीडिया और विपक्षी दल जनसंख्या की विशालता के तथ्य की अनदेखी करके ये गलतफहमी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि अपराध उत्तर प्रदेश में ही ज्यादा हैं, और इस तरह म.प्र. महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे भाजपाशासित राज्यों की चरमराई कानून-व्यवस्था की हालत को छिपाया जाता है।

आगे हम ये दिखाने की कोशिश करेंगे कि समाज के सबसे कमजोर तबके के रूप में प्रचारित दलितों पर होने वाले अपराधों की राष्ट्रीय स्तर पर क्या स्थिति है, और भाजपाशासित तथा अन्य राज्यों के मुकाबले उत्तर प्रदेश और बिहार की क्या स्थिति है।

एनसीआरबी की 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में दलितों पर हुए कुल अपराधों की संख्या 45,003 है। यह संख्या 2013 में 39,408 और 2014 में 47,064 थी।

आबादी के हिसाब से 2015 में प्रति एक लाख की दलित आबादी पर घटित अपराधों की राष्ट्रीय दर 22.3 रही, जबकि राजस्थान में यह दर 57.2, आंधप्रदेश में 52.3, गोवा में 51.1, बिहार में 38.9, मध्य प्रदेश में 36.9, ओडीशा में 32.1, छत्तीसगढ़ में 31.04, तेलंगाना में 30.9, गुजरात में 25.7, केरल में 24.7 रही। उत्तर प्रदेश में यह दर राष्ट्रीय औसत से भी कम यानी 20.2 रही।

इससे स्पष्ट होता है कि भाजपा के शासन वाले प्रदेशों में दलित अत्याचारों में बहुत बढ़ोतरी हो रही है और यह चिंता का विषय है। गोवा जैसे शांत माने जाने वाले छोटे राज्य में भी प्रति एक लाख की दलित आबादी पर अपराधों की दर 51.1 होना वाकई आँखें खोल देने वाला तथ्य है।

अब आइए, एक नजर डालते हैं दलितों के ऊपर होने वाले अपराधों की प्रकृति के विश्लेषण पर। 2015 में देश भर में दलितों की हत्या के कुल 707 मामले हुए। हत्या के अपराधों की राष्ट्रीय औसत दर रही 0.4, लेकिन मध्य प्रदेश में यह दर 0.7, राजस्थान में 0.6, झारखंड में 0.5, बिहार में 0.5, उत्तर प्रदेश में 0.5, हरियाणा में 0.4, और गुजरात में 0.4 थी। इस मामले में भी उत्तर प्रदेश की स्थिति कई ऐसे भाजपाशासित राज्यों से बेहतर रही जिसे मीडिया अपेक्षाकृत शांत प्रचारित करता रहा है।

दलितों पर होने वाले अत्याचारों में बलात्कार की घटनाओं का भी काफी बड़ा हिस्सा है। वर्ष 2015 में दलित महिलायों के बलात्कार के राष्ट्रीय स्तर पर कुल मामले 2,326 थे। इसकी राष्ट्रीय दर 1.2  रही।

राज्यों के स्तर पर देखें तो मध्य प्रदेश  में यह दर 4.1, केरल में 3.3, राजस्थान में 2.6,  छत्तीसगढ़ में 2.5,  हरियाणा में 2.1, तेलंगाना में 2.0, महाराष्ट्र में 1.8, ओडीशा में 1.8, गुजरात में 1.6, आंध्र प्रदेश में 1.2 और उत्तर प्रदेश में 1.1 रही। इन आंकड़ों से भी स्पष्ट है कि दलित महिलाओं पर बलात्कार के मामले में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात में अपराध दर राष्ट्रीय दर से काफी अधिक रही है, जबकि उत्तर प्रदेश में इन अपराधों की दर राष्ट्रीय दर से कम रही है।

दलित महिलाओं के साथ बलात्कार की कोशिशों की बात की जाए तो  वर्ष 2015 में राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की घटनाएँ कुल 2,800  हुईं। इस तरह से इनकी राष्ट्रीय दर 1.4  थी। जबकि यह मध्य प्रदेश में 6.9, महाराष्ट्र में 2.7, हरियाणा में 2.1, केरल में 2.2, ओडीशा में 2.2, आंधप्रदेश और तेलंगाना में 1.8 और उत्तर प्रदेश में 1.8 रही।

ये आँकड़ें भी ये स्पष्ट करते हैं कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा में दलित महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले राष्ट्रीय औसत से दो से लेकर 5 गुना तक ज्यादा हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में इस मामले में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही।

इस तरह से ये स्पष्ट होता है कि केवल आँकड़ों की बाजीगरी के जरिए ही उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति को खराब दिखाया जाता है। राजनीतिक लाभ के लिए विपक्षी दल भी इस अफवाह को बढ़ावा देते हैं जिससे राज्य की छवि खराब होती है। स्वाभाविक रूप से इसका असर निवेश कंपनियों की सोच पर भी पड़ता है, और खामियाजा अंतत: राज्य की जनता को भुगतना पड़ता है।

 

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I Do Agree, it's all just a hypocrisy which effects our states image globally why media houses involved in such types of rumour that I always try to Understand Uttar Pradesh is the land of unlimited potential may be only due to Akhilesh Yadav Image

shubhshek Singh Yadav

एक विशाल जनसंख्या लगभग 85% जिसका ना तो अपना मिडिया है और न ही उसने अपने बौद्धिक लोगों को स्वीकारा उसने हमेसा उसी वर्ग पर विश्वास किया जिसने उनका शोषण किया। यूपी और बिहार को टारगेट किये जाने का मकसद सिर्फ अगड़ों के नेतृत्व न होना है अगर कल मुख्यमंत्री अगड़ों या उनकी पार्टी से हो जाए तो यही प्रचार हरिकीर्तन में बदल जाएगा। महेंद्र जी ये विशाल जनसंख्या आपकी आभारी रहेगी क्योकि आप उनके टीवी से पोंगा पन्थियों का चैनल डिलीट करवाएंगे....धन्यवाद

Shailesh kumar

I agree with the abv facts

Harish

Good analysis

Ahsan Abbas naqvi

I agree with you. UttarUtter pradesh suffer hyhypocrisy and media rumours. Government perform our best for utter pradesh. Government performance is good answer for any kind of hypocrisy and rumours.

virendra Yadav

I agree with you. UttarUtter pradesh suffer hyhypocrisy and media rumours. Government perform our best for utter pradesh. Government performance is good answer for any kind of hypocrisy and rumours.

virendra Yadav

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