Friday, 22nd September 2017

बहरीन के खलीफा ने दाना माँझी को दिए 9 लाख रुपए

Sun, Sep 18, 2016 12:32 AM

ओडिशा के गरीब आदिवासी दाना मांझी की पत्नी के शव को कंधे पर लादे बेटी के साथ पैदल लेकर जाने की तस्वीर ने देश और दुनिया में हल्ला मचा दिया। दाना माँझी की गरीबी से द्रवित होकर बहरीन के प्रधानमंत्री ने उसे पौने 9 लाख रुपए का चेक भेज दिया। इतना ही नहीं, दाना माँझी को सम्मान विमान से दिल्ली बहरीन के दूतावास में बुलाया और शानदार खातिरदारी भी की। 

बहरीन के प्रधानमंत्री और युवराज खलीफा बिन सलमान अल खलीफा ने सहृदयता की ये मिसाल कायम की है और देश के बड़े-बड़े धन्ना सेठों और मठाधीशों को सबक भी दिया है। गुरुवार को दिल्ली स्थित बहरीन दूतावास में मांझी को अतिथि के रूप में बुलाया गया और दूतावास अधिकारियों ने उन्हें यह चेक सौंपा। दाना मांझी ने यह पैसा बेटियों के भविष्य के लिए बैंक में रखने का फैसला किया है।

दाना माँझी की तीन बेटियाँ हैं। सबसे बड़ी बेटी चाँदनी 14 साल की है जो उस समय उनके साथ थी जब माँझी अपनी पत्नी का शव कंधे पर लादकर चल रहे थे। दूसरी बेटी सोनाई 10 साल की है और सबसे छोटी बेटी 5 साल की है।

तस्वीर के जरिए घटना सामने आने के बाद दाना माँझी को सुलभ इंटरनेशनल ने उन्हें 5 लाख रुपए की मदद दी थी, जो बैंक में एफडी के रूप में है। ओडिशा सरकार ने उन्हें 80 हजार रुपए नकद और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान देने की घोषणा की है। कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस (केआईएसएस) ने तीनों बेटियों को मुफ्त में शिक्षा की घोषणा की है।

कहा जा सकता है कि दाना माँझी की किस्मत पलट गई है, लेकिन ये सब तब हुआ जब उसकी पत्नी इस दुनिया में नहीं रही। उनका परिवार कालाहांडी जिले के मेलघर गांव में रहता है। 24 अगस्त को अस्पताल में पत्नी की मौत के बाद उन्हें एंबुलेंस सुविधा नहीं मिली थी, वे पत्नी के शव को कंधे पर रखकर चल पड़े थे। करीब दस किलोमीटर पैदल चलने के बाद एंबुलेंस तब पहुंची जब एक पत्रकार ने दाना माँझी की तस्वीर सोशल मीडिया पर जारी कर दी।

माँझी की कमाई मुश्किल से दो हजार रुपए महीने की है। इसके पहले उन्हें कभी ओडीशा से बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला था। बहरीन के प्रधानमंत्री से मिली सहायता राशि लेने के लिए वे दिल्ली निकले तो वे पहली बार ओडीशा से बाहर निकले थे।

अब ऐसा लग रहा है कि ओडीशा के कालाहांडी जिले की तस्वीर भी कुछ बदल जाए।  कलिंगा इंस्टीट्यूट के संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत ने दाना माँझी के गाँव मेलघर और उसके आसपास के 100 और आदिवासी बच्चों को ‘किस’ में प्रवेश देने का फैसला किया है। वे कालाहांडी में ‘किस’ की  शाखा भी शुरू करने जा रहे हैं।

(Delhi bureau Newslive24)

 

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Vijay K Bhatnagar

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