Friday, 24th November 2017

मध्य प्रदेश में अब रुकने को तैयार नहीं शिवराज के विरोधी

Wed, Sep 14, 2016 2:11 AM

  -  महेंद्र नारायण सिंह यादव -

 मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी में अब असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। अभी तक सीधे-सीधे किसी ने शिवराज के राज को चुनौती तो नहीं दी, लेकिन सरकार में बैठे नेता ही अब आशंका जताने लगे हैं कि भाजपा का हाल कांग्रेस जैसा हो सकता है।

मध्य प्रदेश में भाजपा 2003 के बाद से लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता में है, और लोकसभा चुनावों में भी उसने राज्य में तगड़ी सफलता हासिल की है। इसके बावजूद, कैलाश विजयवर्गीय के नेतृत्व में अब शिवराज का एक विरोधी गुट तैयार हो चुका है, जो केंद्र में अमित शाह का करीबी भी है।

प्रदेश में पचमढ़ी में दो दिन चली राज्य भाजपा की चिंतन बैठक के बाद कुछ भाजपा नेताओं ने सरकार से अपनी नाराजगी जताई है। कई नेता पहले भी नाराजगी जताते रहे हैं।

अब तक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निकट माने जाते रहे पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने पार्टी की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए भाजपा के कांग्रे जैसा होते जाने की आशंका जताई है। श्री भार्गव ने कहा है, ‘पार्टी में वैचारिक मतभिन्नता नहीं है, लेकिन मतभेद हैं और कहीं-कहीं विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र स्तर पर यह देखने को भी मिल रहा है। राज्य में कांग्रेस का जैसा हाल हुआ था वैसा ही बीजेपी में भी हो रहा है। पार्टी में कहीं-कहीं जो स्थितियाँ देखने को मिलती हैं, वे ठीक नहीं हैं। वरिष्ठ नेताओं को इस बारे में सोचना चाहिए।’

 

 

 

 

 

 

गोपाल भार्गव ने तो यहाँ तक कह दिया है कि बीजेपी कार्यकर्ता आधारित पार्टी है, इसलिए कार्यकर्ता के मान-सम्मान का ख्याल रखना होगा, जबकि पार्टी में कहीं कहीं ऐसी गतिविधियाँ चल रही हैं जिनसे नुकसान ही होगा।

श्री भार्गव के बयान के बाद भाजपा के एक और विधायक पन्ना लाल शाक्य ने भी कह दिया है कि संगठन के पदाधिकारियों और मंत्रियों की कार्यकर्ताओं से दूरी बढ़ रही है। उन्होंने कहा है कि जब लोगों से मिलेंगे ही नहीं तो ठीक वैसा ही हाल होगा जैसा कांग्रेस का हुआ था, और आगामी चुनाव में ऐसे हालात बन रहे हैं कि भाजपा का मुकाबला कांग्रेस से नहीं बल्कि खुद से ही होगा। नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव से विधायक कैलाश जाटव, शहडोल के भाजपा जिला अध्यक्ष अनुपम अनुराग अवस्थी, इंदौर से विधायक सुदर्शन गुप्ता भी सरकार पर सवाल उठा चुके हैं।

इससे पहले कैलाश विजयवर्गीय भी इंदौर में मेट्रो के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल उठा चुके हैं। श्री विजयवर्गीय ने कहा था कि जिस तरह से सिस्टम काम कर रहा है, उसमें मेट्रो रेल 2018 तो क्या 2028 तक भी नहीं चल पाएगी। उन्होंने मेट्रो के काम की तुलना बैलगाड़ी से करके शिवराज सरकार के कामकाज से असंतोष जताया था।

स्थिति अब आरोप-प्रत्यारोप तक भी पहुँच चुकी है। आम तौर पर भाजपा के किसी नेता के ऐसे बयान पर दूसरा कोई नेता टिप्पणी करने से बचता था और विवाद ज्यादा नहीं बढ़ पाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। श्री विजयवर्गीय के बयान पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष और शिवराज के भरोसेमंद सांसद नंदकुमार चौहान ने यह तक कह दिया कि जब से विजयवर्गीय राष्ट्रीय महासचिव बनकर दिल्ली गए हैं, तब से वे प्रदेश के बारे में कम सोचने लगे हैं।

ऐसा माना जा रहा है कि कैलाश विजयवर्गीय अब ज्यादा इंतजार करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्हें ऐसा लगने लगा है कि पंजाब, उत्तर प्रदेश, गुजरात और अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में अगर भाजपा को बड़ी सफलता न मिली तो पार्टी पर नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पकड़ कमजोर होने लगेगी और फिर शायद वे मध्य प्रदेश में शिवराज को अपदस्थ करने की हिम्मत न कर पाएँ। गुजरात में अमित शाह को जिस तरह से पाटीदारों की सभा से भाषण अधूरा छोड़कर भागना पड़ा, उससे भी यही संकेत मिल रहे हैं। यही कारण है कि विजयवर्गीय चाहते हैं कि समय रहते ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद ले लिया जाए।

उधर, शिवराज सिंह चौहान भी व्यापम मामले में तो घिरे हुए हैं ही, जिसकी सीबीआई जाँच चल रही है। इसके अलावा, कांग्रेस से लाए नेताओं को मंत्रिपद से नवाजने और पुराने भाजपाई विधायकों की अनदेखी का भी मामला उनके खिलाफ जा रहा है।

राष्ट्रीय नेताओं ने भी मध्य प्रदेश के मामले में अब दखल देना शुरू कर दिया है, लेकिन अभी वे सबको मिल-बैठकर बातचीत से मतभेद सुलझाने की ही बात कर रहे हैं। प्रदेश के नेताओं को भी दिल्ली बुलाया जा रहा है। आने वाले कुछ दिनों में स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन इतना माना जा रहा है कि शिवराज के लिए अब आगे की राह आसान नहीं होगी।

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