Friday, 22nd September 2017

मायावती को स्वाति की दमदार चुनौती

Sat, Aug 27, 2016 5:47 PM

अब रैलियों का मुकाबला 
लखनऊ, अपनी और अपनी 12 साल बेटी के इज्जत की लडाई लड़ने वाली स्वाति सिंह अब सभाओं में हुंकार भरने लगी है. जिस स्वाति सिंह पर बीजेपी दयाशंकर सिंह के बदले दांव लगाना चाहती है वो अपने पति के साथ मायावती के रैलियों के समानांतर खुद को खड़ा करने की कोशिश में हैं.
मायावती जब 21 अगस्त को आगरा में पहली चुनावी रैली कर रही थी तो स्वाति और दयाशंकर कानपुर और हाथरस में अपनी पहली सभा कर रहे थे. अब जब 28 अगस्त को मायावती आजमगढ में दूसरी रैली करने वाली हैं तो स्वाति और दयाशंकर बलिया में अपनी दूसरी सभा करेगें. बलिया दयाशंकर का गृह जिला है. इसे बाढ़ की वजह से बाद में टाल दिया गया.दयाशंकर सिंह के विवादित बयान के बाद बीएसपी की रैली में गाली-गलौज के नारे पर पहली बार स्वाति सिंह खुलकर सामने आई थीं. तब स्वाति की ललकार से बीएसपी और मायावती भी बैकफुट पर आ गई थी. महीने भर पहले तक जिस स्वाति सिंह को कोई नहीं पहचानता था उन्हें अब पूरा प्रदेश पहचानता है. महज एक महीने में ही स्वाति सिंह मायावती को चुनौती दे रही हैं.
स्वाति सिंह की क्षमता को बीजेपी ही भांप चुकी है. लोग चाहते हैं कि स्वाति चुनाव भी लड़े. एक महीने में मिली प्रसिद्धि देखकर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में लोग उनकी रैलियां कराना चाहते हैं. दरअसल मायावती से भिड़ने की सीधी तैयारी स्वाति सिंह की है. माना जा रहा है कि इसके पीछे दिमाग तो बीजेपी का है लेकिन बैनर और झंडा क्षत्रिय महासभा का है.स्वाति सिंह अपनी सभाओं में 12 साल की बेटी और खुद को गाली देने को मुद्दा बनाती हैं. नसीमुद्दीन सिद्दकी के खिलाफ एफआईआर होने और पॉक्सो एक्ट लगने के बावजूद कोई पुलिस कार्रवाई नहीं होने को अपनी सभाओं में मुद्दा बना रही है. लोगों से वह किसी भी सूरत में बीएसपी को वोट नहीं देने की अपील करती हैं.
दयाशंकर सिंह इस सभा में स्वाति के मायावती के खिलाफ चुनाव लड़ाने का चैलेंज करते हैं. वह कहते हैं कि मायावती अगर सामान्य सीट से लड़े तो स्वाति उनके खिलाफ चुनाव लड़ेगी. आजमगढ़ के बाद मायावती की रैली इलाहाबाद और सहारनपुर में होगी. दयाशंकर और स्वाति ने भी उसी दौरान इन शहरों के आस पास मीटिंग करने का मन बनाया है.दरअसल ये खेल विधान सभा चुनाव को लेकर है. दयाशंकर सिंह ने मायावती को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया तो मायावती ने इसे मुद्दा बना दिया. बवाल बढ़ा तो दयाशंकर ने दो बार माफी मांग ली. मायावती के विरोध के बाद तो बीजेपी ने दयाशंकर को पार्टी से बाहर भी कर दिया. इसके बाद भी बीएसपी ने लखनऊ के हजरतगंज में प्रदर्शन किया. उस दौरान दया की पत्नी स्वाति और उनकी बेटी को गालियां दी गई.उस रैली के बाद तो स्वाति ने सारा खेल पलट दिया. मायावती को गाली देने पर बीजेपी बैकफुट पर थी, लेकिन बदले में गाली मिलने के बाद स्वाति ने अपने बूते दांव पलट दिया. मायावती और नसीमुददीन सिद्दकी जैसे नेताओं पर मुकदमा दर्ज हो गया. फिर मामला अगड़े बनाम दलित का हो गया.
मायावती को जब तक ये एहसास होता कि बीएसपी से चूक हो गई है, तब तक स्वाति ने राजनीतिक मैदान मार लिया था. पार्टी के भीतर ही गाली देने वाले नेताओं के खिलाफ खुसुर-फुसुर तेज हो गई. जैसे को तैसा के अंदाज में जवाब देने वाली मायावती को पीछे हटना पड़ा और गालीकांड से फोकस हटाने के लिए उन्होंने रैली करने का ऐलान कर दिया. स्वाति और दयाशंकर ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और अब तैयारी रैलियों से मुकाबले की है.
बीजेपी ने भले ही दयाशंकर सिंह को मायावती के खिलाफ गंदी बात बोलने के आरोप पार्टी से निकाल दिया हो, लेकिन स्वाति सिंह को आगे करने के पीछे बीजेपी का ही दिमाग माना जा रहा है. दरअसल बीजेपी जानती है कि दलितों का वोट मायावती से हटने वाला नहीं है. ऐसे में अगर इस मुद्दे पर सवर्ण वोट को गोलबंद किया जाए तो ये उनके चुनावी नुकसान की भारपाई कर सकता है.

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muje lagta hai swati ji phelese hi neta giri karne ki.soch rahi thi sayad bo ye bhool gai hain ki unke pati ek purush hain or mayabati ji ek mahila,,,,,mahila,,,,Se kuch bhi bol sakti hain likin ek purush mahila se kuch bhi nahi bol sakta ye to political matter banana hai swati ji ko or muje lagta hai sayad une ungli uthane ki adat hai or bhatiya hoke angreji bolne ki jai bhartiye jai mata di......

PriYanshu Khatik

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