Friday, 22nd September 2017

बाहुबली विधायक अखिलेश सिंह की बेटी कांग्रेस में

Sat, Aug 27, 2016 5:43 PM

लखनऊ : गांधी परिवार ने अपने गढ़ में सियासी तौर पर सब हासिल किया, लेकिन एक मलाल रहा कि सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में वो कभी विधायक अखिलेश सिंह को नहीं हरा पाए. अखिलेश सिंह कभी कांग्रेस पार्टी के ही विधायक थे, लेकिन अखिलेश पर तमाम आपराधिक मामले दर्ज हुए और वो कांग्रेस से बाहर कर दिए गए.लेकिन तीन बार कांग्रेस के टिकट पर जीतने वाले अखिलेश ने बाद में बतौर निर्दलीय और फिर पीस पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा का चुनाव रायबरेली की सदर सीट से जीता. अभी सिटिंग विधायक अखिलेश ने फैसला कर लिया कि, अब वो अपनी जगह अपनी बेटी को विधानसभा का चुनाव लड़ाएंगे.पहले बसपा, एसपी और बीजेपी से उनकी बेटी के चुनाव लड़ने की चर्चा तेज थी, लेकिन अंदरखाने प्रियंका गांधी ने अहम रोल निभाया और अखिलेश की बेटी अदिति कांग्रेस में शामिल हो गयीं. अब वो रायबरेली सदर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी.
ये बात सभी जानते हैं कि, रायबरेली में अखिलेश का अपना वोटबैंक है. वो किसी भी पार्टी के लिए एक अहम सियासी हथियार हो सकते हैं. इसीलिए जब उन्होंने अपनी बेटी को सियासत में उतारने का फैसला किया तो हर पार्टी ने उन पर डोरे डाले, लेकिन बाद में प्रियंका गांधी ने अमेठी राजघराने के संजय सिंह के ज़रिये अखिलेश से संपर्क साधा और विदेश से पढ़कर लौटी उनकी बेटी अदिति को कांग्रेस में शामिल करा दिया, जिससे रायबरेली में अखिलेश की ताक़त से कांग्रेस को और मज़बूती मिले, साथ ही अपने गढ़ में एक बड़ी चुनौती ख़त्म हो जाये.खास बात ये रही कि, अदिति को कांग्रेस में प्रभारी ग़ुलाम नबी आज़ाद की मौजूदगी में दिल्ली में शामिल कराया गया, जो बताता है कि, अखिलेश रायबरेली में कितनी हैसियत रखते हैं. परदे के सामने के ये सारी तस्वीरें सबके सामने आयीं,  जो प्रियंका की भूमिका खुदबखुद बयां कर देती है.
रायबरेली में नेताजी और विधायक जी के नाम से मशहूर अखिलेश सिंह के जलवे के आगे गांधी परिवार का जलवा हमेशा फीका रहा. सैय्यद मोदी हत्याकांड में नाम उछलने के बाद कांग्रेस से अलग हुए अखिलेश ने एक बार तो जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा. खुद प्रियंका गांधी ने रायबरेली सदर विधानसभा क्षेत्र में घूम घूम कर उनको हराने के लिए खूब प्रचार किया, लेकिन अखिलेश बड़े अंतर से जीते.पिछले चुनाव में पीस पार्टी के उम्मीदवार अखिलेश ने चुनाव प्रचार में प्रियंका के खिलाफ व्यक्तिगत हमले किये, लेकिन प्रियंका की तमाम कोशिशों के बावजूद विधायक भी वही बने. वैसे रायबरेली में प्रियंका ने जब सतीश शर्मा के लिए पहली बार प्रचार की कमान संभाली, उसके पहले अखिलेश अपने भाई अशोक सिंह को सांसद बनवाया करते थे और कांग्रेस की ज़मानत ज़ब्त हुआ करती थी, जबकि कभी एक ज़माने में रायबरेली से खुद इंदिरा गांधी सांसद हुआ करती थीं.बाद में सोनिया गांधी ने ऑफिस ऑफ़ प्रॉफिट के मामले में लोकसभा से इस्तीफा देकर फिर उपचुनाव लड़ा तो कांग्रेस चाहती थी कि, सोनिया की जीत का अंतर बढ़ जाये, इसिलिये मान मुनव्वल करके अखिलेश की कांग्रेस में वापसी करायी गयी और सोनिया ज़्यादा अंतर से जीत भी गयीं, लेकिन आपराधिक मामले और दबंग छवि के चलते कांग्रेस से उनकी राहें फिर जुदा हो गयीं.

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