Thursday, 21st September 2017

शासन-प्रशासन को शान से चुनौती दे रहा है पालीथीन का प्रयोग

Tue, Aug 23, 2016 2:03 PM

रूदौली (फैजाबाद) ! सरकार ने पालीथीन पर भले ही पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया हो परन्तु दुकानो से पालीथीन मे सामान टांगकर ले जाने वाले लोग व दुकानदार मानो सरकार को ठेंगा दिखा रहे है | इनको किसी नियम या कानून की परवाह नही है | हो भी क्यो सरकार के जिम्मेदार तो इनसे ज्यादा लापरवाह जो है | गांव गिराव समाज वातावरण एवं स्वास्थ्य सभी के स्तर को उठने नहीं देरहा है इसकी उत्पादकता और प्रयोग अमरबेल की लता की तरह शिखर के बुलदिंयों पर लसती ही जा रही है गिरावट आने का नामोनिशान ही मिट गया है। शासन भी अनेको तरह से प्रयासरत है कि पानीथीन पर पूर्णतया नियंत्रण हो लेकिन कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है।गांव से लेकर शहर तक के चारों दिशाओं के कोने-कोने मे पालीथीन का भूचाल सा आ गया है बिना वजह के इधर-उधर सड़को पर बिखरी पालीथीन बारिश में लोगो के फिसल कर गिरने मे अपनी अहिमियत व भूमिका दर्शा रही है। सड़के वैसे ही कीचड़ से सनी रहती है ऊपर से ये आग मे पेट्रोल का काम कर रही है।सरकार भी इसमें नाकाम साबित हो रहा है,सड़को या गली-कूचे, मोहल्लों में इसका जबरदस्त दबदबा है कि मानो यहां पर पालीथीन की फैक्ट्री ही लग गयी हो। जानवरों के लिए भी यह पालीथीन काफी हद तक अनिष्टकारी बनी हुई है, पालीथीन शीघ्र नष्ट नहीं होती है फलस्वरूप उपजाऊ भूमि प्रभावित होतीहै। मवई ब्लाक  के अनेको प्रतिष्ठित दुकानो पर पालीथीन का प्रयोग बेहिसाब हो रहा है औरअधिकारियों की भी इसमें सहभागिता नजर आने लगी है। हाईकोर्ट के आदेश का भी अनुपालन करने और कराने में प्रशासन पिछड़े पांव पर खड़ी दिखाई पड़ रही है। समाज एवं शरीर को हानि पहुंचाने वाली वस्तुओं पर अगर प्रतिबन्ध लगाता है तो वही वस्तु ज्यादा तथा अधिक दामों में बिकने लगता है और प्रयोग भी होता है। किस तरह से प्रतिबन्धित किया जा रहा है | विभिन्न् प्रयासों के बाद भी इन पर अंकुश न लगना समाज और स्वास्थ्य दोनों के लिए मीठा जहर है। पालीथीन का प्रयोग इन दिनो नर्सिंग होमो में निःसंकोच आरामतलबी से बेहिचक किया जा रहा है। शहर के तमाम मेडिकल स्टोरों पर पालीथीन इतनी सरलता से उपलब्घ करा दीजाती है कि मानो इन्हंे पालीथीन निर्माता के द्वारा पुरस्कार दिया जायेगा। इन सभी को बंद कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की है लेकिन प्रशासन के आला अधिकारी एक दूसरे का मुंह निहारते रहते है। दुकानो पर निडर होकर खुलेआम पालीथीन ग्राहको को दिया जाता है। इस तरह से आंख में धूल झोंक कर कार्य करने से क्या फायदा कि सफलता भी न मिले और अभियान भी कागजी साबित हो जाय |

आलेख - राकेश यादव ,फैजाबाद !

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