Friday, 22nd September 2017

क्या सचमुच आम आदमी पार्टी भाजपा का प्रायोजित प्रतिपक्ष है !

Mon, Aug 22, 2016 5:06 PM


  - क्या अरविंद केजरीवाल की पार्टी सचमुच ही भाजपा का प्रायोजित प्रतिपक्ष या उसकी बी टीम है? ये सवाल वैसे तो बार-बार उठता ही रहा है, लेकिन पंजाब चुनावों के संदर्भ में ये सवाल फिर से उठ खड़ा हुआ है। पंजाब ब्राह्मण सभा ने आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा-अकाली दल के खिलाफ सत्ताविरोधी लहर को देखते हुए, अपना रुख बदलकर अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की ओर कर लिया है।

पंजाब ब्राह्मण महासभा के इस रुख से माना जा रहा है कि वो किसी भी कीमत पर राज्य में बहुजन समाज पार्टी या कांग्रेस को नहीं उभरने देना चाहती और उसकी इच्छा यही है कि अगर भाजपा-अकाली हटें तो केजरीवाल ही सत्ता में आएँ। पंजाब ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष देवीदयाल पाराशर ने जनता की नब्ज पहचानते हुए बादल सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप भी लगा दिया है।

अरविंद केजरीवाल पर भाजपा की बी टीम होने का आरोप नया नहीं है। अन्ना आंदोलन की सफलता में आरएसएस के कार्यकर्ताओं का बड़ा भारी योगदान था। उस समय कांग्रेस की केंद्र सरकार को कमजोर करने के लिए भाजपा और आरएसएस ने केजरीवाल के कथित भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को पूरा समर्थन दिया और मीडिया में भी उसे भारी कवरेज दिलाया। यह अलग बात है कि अब न केजरीवाल लोकपाल की बात करते हैं और न ही भाजपा।

खास बात यह है कि दिल्ली में केजरीवाल की चुनावी सफलता में सफाईकर्मियों और वाल्मीकि समाज की बहुत बड़ी भूमिका थी, लेकिन सरकार बन जाने के बाद केजरीवाल ने सफाईकर्मियों को परमानेंट करने के वादे पर विचार तक नहीं किया। गुजरात के दलित आंदोलन का भी श्रेय लेने की कोशिश आम आदमी पार्टी ने की थी, लेकिन उस आंदोलन से उभरने नेता जिग्नेश मेवानी ने आम आदमी पार्टी से नाता तोड़ने का ऐलान करते हुए कह दिया कि गुजरात के दलित आंदोलन में आम आदमी पार्टी की कोई भूमिका नहीं थी।

बहरहाल, ब्राह्मण महासभा का समर्थन पाने से आम आदमी पार्टी बहुत प्रसन्न है। संसद से निलंबित चल रहे आप सांसद भगवंत मान ने कहा है कि इससे उनकी पार्टी को प्रोत्साहन मिलेगा। वैसे स्वयं भगवंत मान लोकसभा में शराब पीकर जाने के कारण बदनामी झेल रहे हैं और संसद के आंतरिक भागों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर जारी करने के कारण उनकी संसद सदस्यता भी खतरे में पड़ी है। कई सभाओं में भगवंत मान शराब पीकर लुढ़कते भी रहे हैं जिनके वीडियो यूट्यूब और सोशल मीडिया पर पड़े हैं और लोग मजे ले-लेकर उन्हें देखते हैं। इस तरह खुद भगवंत मान आम आदमी पार्टी के लिए बदनामी का सबब बने हुए हैं, लेकिन केजरीवाल उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। 

हर हाल में पंजाब में सरकार बनाने को लेकर बेचैन केजरीवाल ने भाजपा से त्यागपत्र दे चुके नवजोत सिद्धू को भी फँसा रखा है। पहले तो उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाने का आश्वासन दिया लेकिन  जब सिद्धू ने भाजपा और संसद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया तो अब वो मुकर गए। जानकारों का मानना है कि केजरीवाल खुद दिल्ली के आधे-अधूरे राज्य के मुख्यमंत्री पद से संतुष्ट नहीं हैं और चाहते हैं कि सरकार बनाने लायक बहुमत मिल जाए तो वे दिल्ली के सीएम का पद छोड़कर पंजाब की कमान संभाल लें। 

केजरीवाल को यह भी खतरा है कि अगर वो किसी और को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाते हैं तो उसका कद दिल्ली के मुख्यमंत्री से ऊँचा हो जाएगा और इस तरह से आम आदमी पार्टी में केजरीवाल के लिए चुनौती खड़ी हो जाएगी। यही वो चीज़ है जिससे केजरीवाल हमेशा बचते रहे हैं और इसी कारण उन्होंने स्वामी अग्निवेश, योगेंद्र यादव, और प्रशांत भूषण जैसे नेताओं को निकाल बाहर किया था।

बहरहाल, भाजपा की बी टीम होने का आरोप केजरीवाल पर इसलिए भी सच साबित हो रहा है कि भाजपा से निकलने वाले हर नेता की प्रथम पसंद केजरीवाल की पार्टी ही होती है। खुद केजरीवाल की पार्टी के लोग विचारधारा से भाजपा के नजदीक होते हैं। खुद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनावों के समय मोदी फॉर पीएम और केजरीवाल फॉर सीएम का नारा दिया था और पोस्टर लगाया था। ये अलग बात है कि मोदी से तकरार करके वे यह भ्रम फैलाने की कोशिश करते रहते हैंं कि वो मोदी के सबसे बड़े विरोधी हैं। इसी जाल में कम्युनिस्टों और कुछ सोशलिस्टों को वोे पसंद आते हैं। 

हालाँकि, सामाजिक न्याय की विचारधारा का बड़ा हिस्सा आरंभ से ही केजरीवाल की सवर्णवादी नीतियों के खिलाफ रहा है। ये हिस्सा केजरीवाल के आरंभ के आरक्षण विरोधी रुख को भी याद  कराता रहता है और उनकी पार्टी पर ब्राह्मणों-बनियों के वर्चस्व को भी सामने लाता रहता है। अब पंजाब ब्राह्मण महासभा के खुले समर्थन के बाद से केजरीवाल पर ब्राह्मण-बनियों की पार्टी चलाने का आरोप और पुख्ता हो रहा है। 

(लेखक महेंद्र नारायण सिंह यादव वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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अरविंद केजरीवाल पर भाजपा की बी टीम होने का आरोप नया नहीं है। अन्ना आंदोलन की सफलता में आरएसएस के कार्यकर्ताओं का बड़ा भारी योगदान था। उस समय कांग्रेस की केंद्र सरकार को कमजोर करने के लिए भाजपा और आरएसएस ने केजरीवाल के कथित भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को पूरा समर्थन दिया और मीडिया में भी उसे भारी कवरेज दिलाया। Sai Batya BMP Gujarat

Devjibhai Maheshwari

केजरीवाल भाजपा कि बि टिम है जो भाजपा से भि ज्यादा खतरनाक और धोकेबाज षडयंत्रकारी है । यह संगठन संविधानविरोधी जनलोकपाल पास कराने मे प्रयत्नशिल है ।जिसके द्वारा लोगो से चूने हूये सांसद मंत्री से भि ज्यादा पावर अधिकारो कि मांग करके लोकतंत्र को चंद नियूक्त किये हूये प्रतीनिधी अपने तरीके से पूरे लोकतंत्र को नियंत्रीत कर सके जिससे अप्रत्यक्ष रूप से संविधानीक संरचना पर अतीक्रमण कर कूछ मूठ्ठीबर लोगो कि हूकूमशाही प्रस्थापित हो सके । यह देश के संविधानीक संरचना को कमजोर कर दूसरी व्यवस्था या संरचना लादकर लोकतंत्र कि हत्या करने कि साजीश है । भाजपा खूले तौर पर संविधान विरोधी कार्य करती है यह तो लोगो को समझ आता है पर आम आदमी पार्टी बडे सफायी से अप्रत्यक्ष रूप से लोगो के संवैधानिक अधिकार नियंत्रित करने के लिये संविधान से भि उपर ऐक दूसरी व्यवस्था लादने का षडयंत्र कर रही है जिसको देश के कट्टर ब्राम्हणवादी लोगो का समर्थन हासिल है और यही बात देश के लोगो के समझ नही आरहा है ।आम आदमी पार्टी यह लोकतंत्र के लिये धिमा जहर है जो धिरे धिरे देश मे फैल रहा है और लोगो को समझ ही नही आरहा है ।

satish dongre

100% केजरीवाल भाजपा के बी टीम के तौर पर काम करता रहा है। ईसको समझने में थोड़ा देर लगेगा लेकिन लोग समझेंगे जरूर। मउलनिवासियों के लिए ये साँपनाथ है।

vijay prakash r

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