Friday, 22nd September 2017

ऊना अस्मिता यात्रा से लौट रहे दलितों पर पथराव

Tue, Aug 16, 2016 10:30 PM

ऊना, 15 अगस्त, 2016 : गुजरात में दलित उत्पीड़न के लिए चर्चा में आए ऊना में ऊना अस्मिता पदयात्रा और उसके बाद बेहद सफल रैली से लौट रहे लोगों पर जगह-जगह पथराव और मारपीट की घटनाएँ गुजरात की कानून-व्यवस्था की स्थिति उजागर कर रही हैं। चिंता की बात ये है कि ये सब पुलिस की मौजूदगी में और उसकी सहमति से हो रहा है। जहाँ पुलिस उपद्रवियों का साथ नहीं दे रही है, वहाँ पुलिस पर भी हमले हो रहे हैं। दर्जनों लोग घायल हुए हैं।

माहौल को शांत करने के लिए पुलिस को समतेर गांव में छह राउंड गोलियां भी चलानी पड़ी। इससे पहले भीड़ ने स्‍थानीय दलितों के इस कार्यक्रम में शामिल होने के विरोध में पथराव किया। इस घटना में चार पुलिसकर्मी और चार अन्‍य लोग घायल हो गए। हिंसा का यह मामला मोटा समधियाला गांव से 10 किलोमीटर दूर हुआ। गौरतलब है कि मोटा समधियाला गांव में ही 11 जुलाई को मरी हुई गाय की खाल उतारने पर सात दलितों की सरेआम पिटाई की गई थी।

ऊना थाने के इंस्‍पेक्‍टर एचजी वाघेला ने बतायश कि पथराव में वे भी जख्‍मी हो गए। उनके अलावा तीन महिला पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। रविवार रात के बाद से चार एफआईआर दर्ज की गई हैं। ये मामले दलितों को रैली में जाने से रोकने और पुलिस कार्यवाही में बाधा डालने से जुड़े हुए हैं। समेतर गांव के दलित प्रकाश परमार ने बताया, ”मैं पुलिस को सुरक्षा के लिए बुलाता रहा लेकिन कोई नहीं आया। आज वे तब आए जब सम्‍मेलन से लौट रहे दलितों पर हमला हुआ।” उन्‍होंने बताया कि जिन दलितों की पिटाई हुई थी वे उनमें से एक के रिश्‍तेदार हैं। उन्‍हें उच्‍च वर्ग के लोगों से धमकियां मिल रही हैं।

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आखीर दलित दलित कब तक रहोगें ?मृत पशु उठाना ओर उसकी खाल निकालकर बेचना ही हमारें मानवीय होने का ध्येय हैं ? मृत पशु उठाना बंद करों ओर शाशन. से किसी अन्य रोज़गार की मांग करो न ?

chunnilal parmar

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