Monday, 25th September 2017

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच पिसता बुंदेलखंड

Tue, Aug 16, 2016 1:43 AM

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के दो पाटों के बीच फंसा बुन्देलखण्ड लगातार राजनैतिक उपेक्षा का शिकार रहा है। जिस धरती पर रामायण, राम चरित मानस, महाभारत जैसे महान ग्रंथों की रचना की गयी हो. भक्त प्रह्लाद, लाला हरदौल, बीर आल्हा-ऊदल, मसखरे लाले -पोते, दीवान शत्रुघ्न सिंह, महाराजा छत्रसाल, राजा खेत सिंह खंगार, महारानी लक्ष्मी बाई, रानी अवंति बाई, राजा बीरबल, मामा माहिल, गीतकार इंदीवर, कवि वृन्दावन लाल वर्मा, राष्ट्रकवि मैथली शरण गुप्त, हॉकी के जादूगर दद्दा ध्यान चंद,तुलसीदास, महर्षि बाल्मीकि, वेदव्यास आदि अनन्य महान नायक-नायिकाओं की जन्म/कर्म भूमि बुंदेलखंड आज बदहालखण्ड बन कर रह गया है। 

उत्तर प्रदेश के सात (झाँसी, ललितपुर, जालौन, बाँदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा) और मध्य प्रदेश के छह (पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दतिया) जनपदों को सरकार बुन्देलखण्ड नाम से परिभाषित करती है। सत्तर हज़ार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस क्षेत्र में दो करोड़ की आबादी है। सांस्कृतिक विरासत से भरपूर, दलहन का सर्वाधिक उपज वाला क्षेत्र, देसी पान,तुलसी,प्राकृतिक जड़ी-बूटियों की खेती के लिए जाने वाला यह क्षेत्र जहाँ के पन्ना में सर्वाधिक महंगा क्रिस्टल हीरा प्राकृतिक रूप से उत्पादित होने के अलावा जिस धरती में अरबों रुपये का खनिज़ दफ़न है, स्थानीय दबंगों के अवैध खनन, भू क्षेत्र कब्ज़े, वन कटान, जल कुप्रबंधन, इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव, तालमेल की कमी, उद्योगविहीनता, जन-जाग्रति की कमी के चलते यहाँ कृषि उपज दर में भारी कमी, किसान आत्महत्याएं, पशुओं की भारी संख्या में मौतें, भीषण सूखा, भुखमरी, कुपोषण, अशिक्षा, बेरोजगारी, भारी संख्या में पलायन जैसी अनन्य समस्याएं हावी हो गयी हैं।

पूर्वोत्तर राज्यों- त्रिपुरा, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, मिजोरम, अरुणांचल प्रदेश के साथ सिक्किम, उत्तराखंड, हिमांचल प्रदेश और गोवा जैसे 10 राज्यों का भौगोलिक क्षेत्रफल बुन्देलखण्ड (70000 वर्ग किलोमीटर) से कम है, जबकि दिल्ली, पुदु्च्चेरी, चंडीगढ़, लक्षद्वीप, दमन दीव,दादरा नगर हवेली और अंडमान निकोबार द्वीप जैसे सातों केन्द्र शासित प्रदेशों का भौगोलिक क्षेत्रफल महज़ 11,000 वर्ग किलोमीटर ही बैठता है। अगर आबादी (2011) के अनुसार तुलना करें तो भी जम्मू कश्मीर(1.26 करोड़) समेत उपरोक्त दसों राज्यों से बुन्देलखण्ड(1.83 करोड़ ) की आबादी ज्यादा है। वहीं दूसरी तरफ आबादी के मामले में बुंदेलखंड, सातों केंद्र शासित प्रदेशों से सवाया बैठता है। गौरतलब है कि दिल्ली में लगभग 30 लाख और चण्डीगढ़ में 2.5 लाख लोग बुन्देलखण्ड से पैतृक रूप से नाता रखते है।

बुंदेलखंड का बच्चा -बच्चा अलग राज्य चाहता है.परन्तु भूख से टूटे लोगों में जनसमूह बनाकर अलग राज्य माँगने के ताकत हिम्मत नहीं थी और ना ही जागरूकता। अलबत्ता कुछ दल/संगठन  गाहे बगाहे थोडा बहुत शोर मचा  लिया करते थे लेकिन भीड़ ना जुड़ पाने के कारण कोई बड़ा नव राज्य गठन के लिए कोई व्यापक जनांदोलन तेलंगाना के तरह ना हो सका। बुंदेलखंड का आम जन सिर्फ यही सोचता रहा कि क्या इस तरह के कार्य  से उसे रोजगार या धन मिलेगा। उसके मन में यह भी डर समाया रहता कि कहीं पुलिस पकड़ कर मारे और बाद में थाने में  बंद ना कर दे।  उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश दो राज्यों में बंटी बुन्देली संस्कृति,भाषा,खनिज क्षेत्र ,जल स्रोत  एक दूसरे के बिना अधूरे हैं।
- नसीर अहमद सिद्दीकी ,राष्ट्रीय महासचिव,अखिल भारतीय बुंदेलखंड विकास मंच

 
 

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