Sunday, 19th November 2017

दिल्ली के बुंदेलखंडी संगठनों ने बनाया परिसंघ : बुंदेलखंड जनजाग्रति मंच का हुआ गठन

Mon, Aug 8, 2016 6:22 PM

नई दिल्ली, 7 अगस्त, 2016: नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में रहने वाले बुंदेलखंडवासियों के आठ संगठनों ने मिलकर एक परिसंघ का गठन करके क्षेत्रवासियों के कल्याण के लिए मिलकर काम करने का निर्णय लिया है। नई दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय के सभागार में हुए इस कार्यक्रम में तय किया गया ये सभी संगठन एक बैनर तले बुंदेलखंड के विकास के लिए आपस में मिलकर काम करेंगे। इस परिसंघ का नाम बुंदेलखंड जनजाग्रति मंच रखा गया है। संगम विहार एससीएल गुप्ता ने इस आशय का प्रस्ताव रखा जिसे सभी ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया। 

फिलहाल अखिल भारतीय बुंदेलखंड मंच, बुंदेलखंड मज़दूर अधिकार संगठन, बुंदेली साहित्य एकेडमी, बुंदेलखंड जन जागृति मंच, बुन्देलखण्ड परिषद , बुंदेलखंड दुर्गा वाहिनी, रैकवार समाज समिति जैसे आठ संगठन इस परिसंघ में शामिल हुए हैं। निकट भविष्य में बुंदेलखंड से जुड़े कई और संगठनों को भी इस परिसंघ में जोड़े जाने की योजना है। इस सभा में क्षेत्र के विकास पर भी संगोष्ठी हुई जिसमें कई विद्वजनों ने हिस्सा लिया। पूर्व विधायक श्री गुप्ता ने दिल्ली में रहने वाले बुंदेलखंडवासियों का एक डाटाबेस तैयार करने का भी सुझाव दिया। 

सभा का संचालन कर रहे श्री राम प्रसाद रैकवार ने बुंदेलखंड और बुंदेलखंडवासियों की समस्याओं पर खुले मन से विचार करने और अपनी कमियाँ दूर करने के पक्ष में विचार व्यक्त किए। बरगद एनजीओ के संचालक श्री हरदयाल कुशवाहा ने बुंदेलखंड में पशु पालन के ज़रिये गोबर गैस ऊर्जा को एल.पी.जी. के स्थान पर तरजीह देने की सलाह दी साथ ही पर्यावरण संरक्षण को को बढ़ावा देने की बात कही। 

पत्रकार महेंद्र नारायण सिंह यादव ने बुंदेलखंड के विकास में सबसे बड़ी बाधा वहाँ फैले सामंतवाद और ब्राह्मणवाद को बताया। श्री यादव ने कहा कि जब मध्यप्रदेश में उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं तो फौरन ही लोधीवाद-लोधीवाद का शोर मचाया जाने लगा और मौका लगते ही उमा को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया, लेकिन आज केंद्र में अठारह-बीस बड़े-बड़े मंत्रालय केवल ब्राह्मणों के पास हैं लेकिन अब किसी को इसमें जातिवाद नजर नहीं आता है। श्री यादव ने कहा कि नए परिसंघ में सभी समुदायों की पर्याप्त भागीदारी होनी चाहिए।

श्री यादव ने कहा कि भाजपा एक एक करके सभी जातियों को किनारे करके केवल ब्राह्मणों, बनियों और ठाकुरों को सत्ता में लाना चाहती है। इसी के तहत पहले हरियाणा से जाटों को कमजोर करके बनिया को मुख्यमंत्री बनाया, महाराष्ट्र मे मराठों को कमजोर करके ब्राह्मण को कमान सौंपी। बिहार में भी ये यादवों-कुर्मियों को हटाकर मंगल पांडे को मुख्यमंत्री बनाना चाहती थी। अब उत्तर प्रदेश में भी अखिलेश यादव को हटाकर किसी ब्राह्मण या बनिया को ही मुख्यमंत्री बनाना चाहती है। भाजपा को केवल ओबीसी वर्ग की तरक्की में ही जातिवाद दिखता है, लेकिन यह सोच देश को कमजोर करने वाली है।
 
फेडरेशन फॉर न्यू स्टेट्स के अध्यक्ष बाबा आर.के.तोमर ने बुंदेलखंड अलग राज्य बनाने के वास्ते सक्रिय आंदोलन की वकालत की, और दावा किया कि उन्होंने ही लड़ाई लड़कर झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और तेलंगाना जैसे नए राज्यों का गठन करवाया था और अब वे बुंदेलखंड को भी अलग राज्य बनवाएँगे।
 
राठ(हमीरपुर) निवासी और जे.एन.यू. में पर्यावरण शोधार्थी श्री मुकेश सिंह ने अपने गाँव स्तर पर किये जा रहे प्रयासों को विस्तार से बताया और योग्य ग्राम प्रधान चुनने पर ज़ोर दिया। बुंदेलखंड प्रवासी संगठन के श्री योगेंद्र यादव जी ने प्रवासी बुन्देलियों की समस्याओं पर प्रकाश डाला। 
 
ऑल इंडिया कीरति खंबूस राय संगठन की ओजस्वी नेता वंदना राय ने भी बुंदेलखंड के विकास के लिए काम करने की इच्छा जताई और कहा कि उनका संगठन बुंदेलखंड जन जाग्रति मंच के साथ मिलकर काम करेगा। सुश्री राय ने गोरखा लोगों की समस्याओं का भी जिक्र किया और बुंदेलखंडवासियों से सहयोग माँगा। उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले गोरखा या नेपाली लोग भारत के ही मूल निवासी हैं और उन्हें नेपाल का नागरिक समझना गलत है। सुश्री राय ने कहा कि जिस तरह से बंगाली या बांग्लाभाषी लोग बांग्लादेश के नहीं, भारत के ही निवासी हैं, उसी तरह से गोरखा समुदाय है।
सामाजिक कार्यकर्ता श्री नसीर अहमद सिद्दीकी ने चित्रकूट से चोरी हुई योगिनी मूर्ति को फ्रांस से वापस लाने के अपने सफल प्रयास के बारे में बताया। यह मूर्ति 90 के दशक में चोरी हुई थी और मूर्ति तस्करों के हाथों से ये फ्रांस पहुँच गई थी। वर्तमान में ये मूर्ति राष्ट्रीय संग्रहालय में ही रखी हुई है। श्री सिद्दीकी ने महोबा में अपनी एक अस्थायी पशुशाला के बारे में भी बताया।
बैठक के बाद सामाजिक कार्यकर्ता परवेज़ मुहम्मद ने उम्मीद जताई कि दिल्ली में रह रहे बुंदेलखंड के लोग आपसी मेल-जोल से एक-दूसरे की समस्याओं का अच्छी तरह से समाधान करवा सकते हैं।  
 

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