Saturday, 18th November 2017

अहमदाबाद में दलित महासम्मेलन : भाजपा के लिए खतरे की घंटी

Sun, Jul 31, 2016 9:22 PM

 

अहमदाबाद: 31 जुलाई 2016 : गुजरात के उना में दलितों पर कथित गौरक्षकों द्वारा किए गए अत्याचार के विरोध में अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन करने के बाद दलितों ने अहमदाबाद में रविवार को महासम्मेलन किया. इस सम्मेलन के दौरान दलितों ने शपथ ली कि अब वो मृत पशु नहीं उठाएंगे, साथ ही जातिगत तौर पर थोपे जा रहे सफाई जैसे काम नहीं करेंगे.

इस दौरान ये भी तय किया गया कि अपने अधिकारों और विरोध प्रदर्शनों के दौरान दलित युवाओं पर हुए केसों के विरोध में आंदोलन और तेज किया जाएगा. दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने आरोप लगाया कि कानूनी तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के दौरान जिन गरीब दलित युवकों के खिलाफ फर्जी केस दायर किए गए हैं, वो तत्काल हटाए जाएं, वरना इससे भी बड़ी तादाद में लोग अहमदाबाद की सड़कों पर उतरेंगे. दूसरी ओर विरोध प्रदर्शनों के दौरान जहर पीने वाले एक युवक की अहमदाबाद सिविल अस्पताल में मौत हो गई.

महासम्मेलन में दलितों का सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान दलितों ने मृत पशु और कचरा नहीं उठाने का संकल्प लिया। जो भी दलित ऐसा करेगा उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया जाएगा। महासम्मेलन में दलित-मुस्लिम भाई-भाई के नारे गूंजे। इसके साथ ही भाजपा और कांग्रेस दोनों पर दलितों के शोषण का आरोप लगा।

समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि कोई सरकार हमारा उत्थान नहीं कर सकती। इसलिए दलितों को एकजुट करके ही समाज का विकास किया जाएगा। ऊना अत्याचार दलित संघर्ष समिति, दलित अधिकार मंच, भारतीय दलित पैंथर आदि के नेताओं ने यहां आए हजारों दलितों को मृत पशु और कचरा नहीं उठाने का संकल्प दिलाया।

दलित नेता गोविंद परमार और राहुल ने सरकार के नाम 10 सूत्री मांग पत्र पढ़कर सुनाया। इसमें दलित उत्पीड़न के दोषियों को सख्त सजा दिलाने, नगरपालिका में कार्यरत सफाईकर्मियों को स्थाई करने और ऊना कांड के आरोपियों को तड़ीपार करने जैसी मांगें शामिल हैं। मांगें नहीं माने जाने पर दलित सरकार को मृत पशु भेंट में देंगे। महासम्मेलन में रोहित वेमुला के परिवार को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया।

हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित शोध छात्र वेमुला ने इस साल के प्रारंभ में आत्महत्या कर ली थी। आयोजकों ने भाजपा और कांग्रेस के नेताओं को इस कार्यक्रम से दूर रहने को कहा। महासम्मेलन में गुजरात सरकार से ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले पूर्व आइपीएस राहुल शर्मा, जनसंघर्ष मंच के वकील शमशाद पठान, राकांपा की पूर्व प्रवक्ता रत्ना वोरा भी नजर आए। 

ऊना की घटना के खिलाफ जिन लोगों ने जहर पिया था, उनमें से एक दलित युवक योगेश सारखडी की रविवार को मौत हो गई। 11 जुलाई को सौराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में 21 दलितों ने जहर पीकर आत्महत्या करने का प्रयास किया था। इनमें राजकोट के युवक की अहमदाबाद सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।

उना की घटना के पीड़ितों के परिजन भी इस रैली में शामिल हुए। उनका आक्रोश भी उनके भाषणों में साफ झलक रहा था। पीड़ितों के भाई जीतू सरवैया ने कहा कि जब घटना हुई तो मुझे भी बहुत दुख हुआ और गुस्सा भी आया। लगा कि मैं भी हथियार लेकर जाऊं और उन पर हमला कर दूं, लेकिन आज ये देखकर संतोष है कि मेरे चाचा और भाइयों पर जो अत्याचार हुआ, उसने पूरे दलित समाज को अपने पर हो रहे अत्याचार को लेकर एकजुट कर दिया है.


इसका कितना राजनैतिक नफा-नुकसान होगा, ये तो समय बताएगा, लेकिन आगे भी दलित आंदोलन चलते रहने के आसार हैं. फिलहाल ये तय किया गया है कि 5 अगस्त को पदयात्रा शुरू करके 15 अगस्त को उना में दलित स्वतंत्रता दिवस मनाया जाए. गुजरात सरकार के लिए ये चिंता का विषय है, क्योंकि पिछले साल अगस्त से ही अलग-अलग आंदोलन चलता रहा है. पहले पाटीदार आंदोलन फिर ओबीसी आंदोलन और अब अपने अधिकारों को लेकर दलित सड़कों पर उतरे हैं, जो लगातार सरकार की चिंता बढ़ा रही है.अहमदाबाद: उना में दलितों पर कथित गौरक्षकों द्वारा किए गए अत्याचार के विरोध में अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन करने के बाद दलितों ने अहमदाबाद में रविवार को महासम्मेलन किया. इस सम्मेलन के दौरान दलितों ने शपथ ली कि अब वो मृत पशु नहीं उठाएंगे, साथ ही जातिगत तौर पर थोपे जा रहे सफाई जैसे काम नहीं करेंगे.

इस दौरान ये भी तय किया गया कि अपने अधिकारों और विरोध प्रदर्शनों के दौरान दलित युवाओं पर हुए केसों के विरोध में आंदोलन और तेज किया जाएगा. दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने आरोप लगाया कि कानूनी तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के दौरान जिन गरीब दलित युवकों के खिलाफ फर्जी केस दायर किए गए हैं, वो तत्काल हटाए जाएं, वरना इससे भी बड़ी तादाद में लोग अहमदाबाद की सड़कों पर उतरेंगे. दूसरी ओर विरोध प्रदर्शनों के दौरान जहर पीने वाले एक युवक की अहमदाबाद सिविल अस्पताल में मौत हो गई.

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Is karnva ko ak bade samajik andolan me badlne ki jarurt h or logo ke savabhiman ko jagana hoga or unko unki takt ka ahsas krana hoga jai bhim jai kansi ram

Harish

Is karnva ko ak bade samajik andolan me badlne ki jarurt h or logo ke savabhiman ko jagana hoga or unko unki takt ka ahsas krana hoga jai bhim jai kansi ram

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