Friday, 22nd September 2017

समाजवादी पार्टी की ज़ोरदार राजनीतिक घेराबंदी से भाजपा और बसपा हक्के-बक्के

Wed, Jun 22, 2016 5:02 PM

समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में जिस तरह से राजनीतिक घेराबंदी शुरू की है, उसके सामने विपक्षी दल भाजपा और बसपा एकदम भौचक्के दिख रहे हैं, और फिलहाल उनके पास सपा की रणनीति का कोई जवाब नहीं दिख रहा है।

राज्यसभा चुनाव के समय समाजवादी पार्टी ने पुराने साथी बेनी प्रसाद वर्मा और अमर सिंह को पार्टी में वापस लेते हुए राज्यसभा में भेज दिया था। इसके बाद अफजल अंसारी के कौमी एकता दल का विलय कराया । इसके बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसके विरोध में जब अपने एक पुराने मंत्री बलराम यादव को हटाया तो इसे परिवार में फूट के तौर पर देखा गया। भाजपा और बसपा इस पर खुशी मना पातीं, कि इसके पहले ही स्वामी प्रसाद मौर्य ने बसपा छोड़कर मायावती को एक करारा झटका दिया है और सपा को बहुत बड़ा सहारा दिया है।

यूपी की राजनीति में इस बार सबका जोर अन्य पिछड़े वर्गों के वोटों को जोडने़ पर है। यादव और कुर्मी वोटरों के समाजवादी पार्टी की ओर तय होने के बाद सबका जोर कुशवाहा-मौर्य-सैनी वोटरों पर है। बसपा के पूर्व नेता बाबू सिंह कुशवाहा मायावती को हर हाल में हराने के इरादे से जनाधिकार मंच बना चुके हैं। कुशवाहा समाज का उन्हें बहुत तगड़ा समर्थन भी मिल रहा है,लेकिन बसपा को उम्मीद थी स्वामी प्रसाद मौर्य के कारण मौर्य और कुशवाहा का बड़ा हिस्सा उसे मिलेगा ही। अब बसपा के हाथ इस लिहाज से पूरी तरह से खाली हैं। बाबू सिंह कुशवाहा की भी समाजवादी पार्टी से निकटता की खबरें आती रहती हैं, और अब स्वामी प्रसाद मौर्य के भी सपा में आने के आसार दिख रहे हैं।  अब समाजवादी पार्टी, यादव, कुर्मी, कुशवाहा और मुस्लिम-इन चार बड़े और ताकतवार मतदाता समूह के बड़े हिस्से पर दावा कर सकती है। 

भाजपा ने भी केशव प्रसाद मौर्य के रूप में एक कुशवाहा-मौर्य समाज का नेता तलाश किया था, लेकिन बाबू सिंह कुशवाहा और स्वामी प्रसाद मौर्य के नाम के आगे उनकी न  तो पहचान बन पा रही है, और न ही भाजपा की कोई और रणनीति सामने आ रही है।

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