Thursday, 21st September 2017

नीलगाय के मुद्दे पर मेनका और जावड़ेकर आमने-सामने

Fri, Jun 10, 2016 1:59 PM

बिहार में बड़ी संख्या में नीलगायों के मारे जाने के मुद्दे पर महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी और  पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर में विवाद हो गया है। ये विवाद बिहार सहित कई प्रदेशों में फसलों को बडे पैमाने पर नुकसान पहुंचाने वाली नीलगायों की हत्या की सरकारी अनुमति के मसले को लेकर हुआ है।

बिहार में 250 नीलगायों की हत्या के मामले को लेकर गांधी ने जावड़ेकर के खिलाफ कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि हमारी सरकार में पहली दफा पर्यावरण मंत्रालय इतना सक्रिय हुआ है कि राज्य सरकार की अपील पर जानवरों को मारने की अनुमति दी जा रही है। सभी राज्यों से कहा जा रहा है कि आप बताएं किस-किस जानवर को आप मारने की इच्छा रखते हैं। इस तरह राज्य सरकार की अपील पर जानवरों को मारने की खुली छूट दी जा रही है। बंगाल में हाथियों को मारने की इजाजत दी जा रही है तो गोवा में मोर को। अब कोई जानवर नहीं छूटा। चांदपुर में इतना अनर्थ हो रहा है कि उन्होंने 53 जंगली सुअर मारे हैं। अभी और 50 की इजाजत दी है। जानवरों की रक्षा के लिए सक्रिय रही मेनका गाँधी इस घटना के लिए पर्यावरण मंत्रालय को जिम्मेदार मानती हैं।

उधर, जावडेकर ने मेनका गांधी के इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कौन क्या कह रहा है, इस सब पर वह प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते लेकिन इतना जरुर बताना चाहेंगे कि किसानों की फसल का नुकसान होता है और राज्य सरकार प्रस्ताव देती है तो पर्यावरण मंत्रालय राज्य सरकार को इसकी मंजूरी देता है। ये केंद्र सरकार का नहीं, राज्य सरकार का काम है। इसके लिए पहले से ही कानून बना हुआ है।

बिहार के कई जिलों में किसान वर्षों से नीलगाय और जंगली सूअर के आतंक से परेशान हैं। जंगली पशुओं द्वारा बड़े पैमाने पर फसलों को क्षति पहुंचायी जाती रही है। किसानों की तकलीफें सुनने के बाद राज्य सरकार ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मिली अनुमति के बाद इन पशुओं के शिकार की छूट दी है।

बिहार सरकार ने भारत सरकार को भेजे प्रस्ताव में बताया था कि नीलगाय के आतंक से राज्य के 31 जिले प्रभावित हैं। वहीं जंगली सूअर के आतंक से 10 जिले प्रभावित हैं।

-केन्द्र ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत नीलगाय को पीड़क जन्तु माना है। केन्द्र सरकार की यह अधिसूचना दिसम्बर 2016 तक प्रभावी है।
-बीस जिलों के संपूर्ण भाग में कोई भी व्यक्ति नीलगाय को मार सकता है। इन जिलों में पटना, नालंदा, भोजपुर, बक्सर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, मधुबनी, बेगूसराय, खगड़िया, समस्तीपुर, सारण, वैशाली, गोपालगंज, सीवान, मोतिहारी, सहरसा, अररिया और मधेपुरा शामिल है।
-इसके अलावा 11 जिलों के आंशिक भाग में नीलगाय मारने की छूट है। ये जिले गया, जहानाबाद, नवादा, औरंगाबाद, अरवल, कैमूर, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, रोहतास और बेतिया हैं।
-पीड़क जंतु घोषित होने के कारण नीलगाय को कोई भी व्यक्ति मार सकता है लेकिन मारने के बाद वन विभाग के स्थानीय कर्मी को सूचना देकर उसे जमीन में दफन करना जरूरी है।

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