Monday, 25th September 2017

एयरलाइन के पायलट्स का होगा साइको टेस्‍ट

Wed, Dec 16, 2015 5:01 PM

नई दिल्‍ली। अगले साल से इंडियन एयरलाइन्‍स के पायलट्स का साइकोमीट्रिक टेस्‍ट होगा। डायरेक्‍टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने एयरफोर्स के द्वारा संचालित इंस्‍टीट्यूट ऑफ एयरोस्‍पेस मेडिसिन  से इन टेस्‍ट की डिटेल को तीन महीने के अंदर पूरा करने को कहा है।
डीजीसीए के प्रमुख एम सत्‍यावती ने बताया कि सरकार से मंजूरी मिल जाए, तो पायलट्स का साइको टेस्‍ट अगले साल के शुरुआती छह महीनों में ही शुरू हो जाएगा। डीजीसीए ने 24 मार्च 2015 को जर्मनविंग्‍स दुर्घटना के बाद इन परीक्षणों पर विचार शुरू कर दिया था।
वह एयरक्राफ्ट बार्सिलोना से डसेलडोर्फ की उड़ान पर था, जब विमान के सह पायलट ने कथित तौर पर 'जानबूझकर' फ्रेंच आल्प्स में विमान को दुर्घटनाग्रस्त करा दिया था। इस घटना के बाद सत्‍यावती ने पायलट्स के साइकोटेस्‍ट पर फैसला करने के लिए एक्‍सपर्ट्स का एक पैनल गठित किया था।
इस पैनल ने पायलट्स के लिए चार स्‍तरीय टेस्‍ट की सिफारिश की थी, जिसकी शुरूआत ठीक उस समय से होनी थी, जब कोई लड़का फ्लाइंग स्‍कूल में दाखिला लेता है। अन्‍य तीन स्‍तर, जिसमें पायलट्स को टेस्‍ट के लिए जाना होगा और उसे पास करना होगा, वह एयरलाइन या चार्टर कंपनी में ज्‍वाइनिंग के समय होगी।
इसके अलावा कमांडर के पद पर प्रमोट करने के समय होगी और जब भी कोई पायलट कोई असमान्‍य व्‍यवहार का प्रदर्शन करता है, तो इस टेस्‍ट को कराया जाएगा। पहले चरण की स‍िफारिश ऐसी स्थिति से बचने के लिए की गई है, जिसमें मध्‍यम या निम्‍न मध्‍यम परिवरों द्वारा उनके बच्‍चों पर 40 लाख रुपए तक का खर्च पायलट बनाने में कर देते हैं। और वे बच्‍चे साइकोमीट्रिक आधार पर स्‍क्रीनिंग प्रॉसेस में एयरलाइन द्वारा खारिज कर दिए जाएं।

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