Wednesday, 21st February 2018

बजट के बाद कार्रवाई शुरू, लाखों को इनकम टैक्स नोटिस जारी

Sat, Feb 3, 2018 1:12 PM

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने सबसे मशहूर क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन में पैसा लगाने वाले कुछ लाख लोगों को नोटिस भेजे हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने कहा कि अब विभाग इस तरह के निवेश पर टैक्स की वसूली का प्रयास कर रहा है।

चंद्रा ने कहा, 'टैक्स अधिकारियों के संज्ञान में आया है कि इस तरह के कई निवेशकों ने मुनाफे पर अग्रिम टैक्स नहीं चुकाया है। कुछ अन्य निवेशकों ने पिछले टैक्स रिटर्न में इसके बारे में स्पष्ट उल्लेख नहीं किया है। विभाग ने पिछले साल दिसंबर में इन एक्सचेंजों में अखिल भारतीय स्तर पर सर्वे किया था।

चंद्रा ने कहा, 'हमने ऐसे कई निवेशकों को नोटिस भेजे हैं। इनमें से कई ने टैक्स अदा करने की सहमति दी है। जहां तक बिटकॉइन में किए गए निवेश का सवाल है, हम पक्के तौर पर उनसे टैक्स वसूलेंगे।'

सीबीडीटी प्रमुख से जब नोटिसों की संख्या के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इनकी तादाद कुछ लाख बताया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को अपने बजट भाषण में कहा था कि बिटकॉइन समेत सभी क्रिप्टोकरेंसी गैरकानूनी हैं और सरकार उन्हें खत्म करने का पूरा प्रयास करेगी।

धारा 133ए के तहत सर्वे

सूत्रों ने बताया कि टैक्स अधिकारियों ने आयकर कानून की धारा 133ए के तहत बिटकॉइन एक्सचेंजों का सर्वे किया है। इसका मकसद निवेशकों और कारोबारियों की पहचान के बारे में पता करना, उनके द्वारा किए गए लेनदेन, संबंधित बैंक खातों और अन्य जानकारियों का पता लगाना है।

हासिल होगा करवसूली का लक्ष्य

बहरहाल, एक अन्य सवाल के जवाब में चंद्रा ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि आयकर विभाग चालू वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रहण का लक्ष्य न केवल हासिल करेगा, बल्कि इसे पार भी करेगा। चंद्रा ने कहा, 'अर्थव्यवस्था काफी बेहतर स्थिति में है। अग्रिम कर भुगतान की आखिरी तिमाही तीसरी तिमाही के मुकाबले कहीं बेहतर रहेगी। जिस तरह से अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है, आखिरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) की वृद्घि दर बढ़ेगी। अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहतर है, कोई नकारात्मक पहलू नहीं हैं। निश्चित रूप से हमें अधिक अग्रिम कर हासिल होगा।' आयकर विभाग ने चालू वित्त वर्ष में 9.8 लाख करोञड रुपए के प्रत्यक्ष कर वसूली का लक्ष्य रखा है।

किसी को लाइसेंस नहीं

पिछले साल जेटली ने संसद को सूचित किया था कि देश में वर्चुल करेंसी की निगरानी के लिए कोई नियम-कानून नहीं है। साथ ही रिजर्व बैंक ने इस तरह की करेंसी के परिचालन के लिए किसी इकाई या कंपनी को कोई लाइसेंस नहीं दिया है।

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