Wednesday, 21st February 2018

मंदसौर में किसानों पर फायरिंग पर फंसी भाजपा सरकार

Tue, Jan 23, 2018 11:42 PM

मध्य प्रदेश के मंदसौर किसान आंदोलन में पुलिस के हाथों मारे गए किसानों के मामले को विपक्षी दल भले ही भूल गए हों, लेकिन हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने म.प्र. सरकार से कहा है कि वो मंदसौर में किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने वालों के नाम तीन दिन के अंदर बताए।

2017 में मध्य प्रदेश में हुए किसान आंदोलन में किसानों पर भाजपा की शिवराज सरकार ने गोलियाँ चलवाकर कई किसानों की जान ले ली थी। स्थानीय लोगों ने करीब 20 किसानों के मरने के सबूत दिए, लेकिन सरकार ने आखिरकार केवल 5 के मरने की बात कबूल की थी। 

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि घटना के दौरान कौन से प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद थे। जस्टिस पीके जायसवाल और जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने सोमवार को एडवोकेट आनंद मोहन माथुर की याचिका का विस्तृत जवाब भी दस दिन के अंदर दाखिल करने का निर्देश शिवराज सरकार को दिया है। 

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव करीब हैं, और ऐसे में ये मामला भाजपा और शिवराज के लिए घातक साबित हो सकता है। पहले विपक्षी दलों की सक्रियता से ऐसा लगा भी कि इस मुद्दे को वो चुनावों में प्रमुखता से उठाएँगे, लेकिन बाद में कांग्रेस एकदम सुस्त हो गई। तीसरी ताकत के रूप में उभरने का दावा कर रही समाजवादी पार्टी के प्रदेश नेता भी इस मामले को भूल गए लगते हैं। हालाँकि, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी एक नेता का कहना है कि प्रदेश इकाई को निर्देश दिया जाएगा कि वो किसानों के साथ हुए इस अत्याचार के मुद्दे को पूरे ज़ोर-शोर से उठाएँ। 

समाजवादी पार्टी का कहना है कि किसानों के साथ पूरे प्रदेश में अन्याय हुआ है और प्रमुख विपक्षी दल होने के नाते कांग्रेस को इसमें अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन वो ऐसा नहीं कर रही है तब भी समाजवादी पार्टी अपना काम करेगी। अखिलेश यादव ने गोलीकांड के समय पीड़ित किसानों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता भी पहुँचाई थी। 

हाईकोर्ट की इंदौर पीठ मंदसौर के किसान आंदोलन को लेकर दाखिल की गई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं ने पीड़ितों को दिए गए 1 करोड़ रुपये मुआवजे, हड़ताल के दौरान प्रभावी पुलिस सुरक्षा के दावों को चुनौती दी है और प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की मांग भी की है।
एडवोकेट माथुर ने याचिका दायर करके गोली चलाने वाले पुलिस वालों के नाम बताने की मांग की है और कहा है कि राज्य सरकार मंदसौर की पिपलियामंडी में हत्याकांड वाले दिन तैनात डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, पुलिस अधीक्षक, पुलिस स्टेशन इंचार्ज और अन्य अफसरों के नाम बताए। 

श्री माथुर का कहना है कि सरकार को फौरन उन लोगों के नाम बताने चाहिए जिन्होंने लोगों पर गोलियां चलाई थीं, जबकि सरकार समय मांगकर केवल याचिकाओं के निपटारे में देरी करना चाह रही है। उन्होंने सरकार के जवाब को भी अपर्याप्त बताते हुए कहा कि 'यह कहना निराधार है कि मामले में जनहित याचिका का औचित्य नहीं और जांच समिति पहले ही बना दी गई है। हमने विशेष जांच टीम की मांग की है और प्रदर्शनकारियों की मौत जनहित से संबंधित विषय है। राज्य द्वारा दिया गया जवाब अपर्याप्त है और हमारे आरोपों का जवाब उसमें नहीं दिया गया है।' 

अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या वह विस्तृत जवाब देना चाहती है। इस पर सरकार ने अदालत से निर्देश मांगे। अदालत ने सरकार से दस दिन के अंदर याचिका पर विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया। 

 

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