Wednesday, 21st February 2018

तोगड़िया के बुरे दिन क्यों आए?

Tue, Jan 16, 2018 3:37 PM

- महेंद्र नारायण सिंह यादव

2002 में गुजरात में भाजपा के प्रचार में धुंआधार 100 रैलियाँ करने वाले और सांप्रदायिक जहर उगलने वाले प्रवीण तोगड़िया अब अपना एनकाउंटर किए जाने की साजिश का आरोप लगाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में धाड़ें मार-मारकर रोने लगे।

मोदी के गुजरात में मुख्यमंत्री बनने और मुस्लिमों के नरसंहार को देश में हिंदू राष्ट्र बनने की शुरुआत बताने वाले विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ प्रवीण तोगड़िया अब आरोप लगा रहे हैं कि वो हिंदू हित की आवाज उठाते हैं, इसलिए उन्हें डराने की कोशिशें जारी हैं।

15 जनवरी को राजस्थान पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए आई तो वो रहस्यमय ढंग से लापता हो गए और रात को अहमदाबाद के शाहीबाग में बुरी हालत में बेहोश मिले।

बहुत से लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि हिंदू हृदय सम्राट कहे जाने वाले तोगड़िया अब एक और बड़े हिंदू हृदय सम्राट की मज़बूत सरकार के रहते इस तरह से क्यों मारे-मारे फिर रहे हैं।

पूरे टकराव की वजह गुजरात के दंगे हैं। वास्तव में यह समझ पाना लोगों के लिए मुश्किल है कि गुजरात के दंगे मूल रूप में नरेद्र मोदी और उनकी सरकार का षडयंत्र नहीं थे। यह अलग बात है कि मोदी सरकार दंगों को रोकने में नाकाम रही या रोकने की उसने कोशिश नहीं की। इतना ही नहीं, दंगों का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए परोक्ष रूप से मोदी दंगों के मुख्य साजिशकर्ता होने का दावा करते रहे।

वास्तव में गुजरात के दंगे विश्व हिंदू परिषद की साजिश थे। जब दंगे हुए तब मोदी प्रशासनिक रूप से पूरी तरह अनुभवहीन थे और एकदम नए-नए मुख्यमंत्री बनाए गए थे।

साजिश यह थी कि प्रशासन में वीएचपी के मजबूत तंत्र की सहायता से दंगे भड़काए जाएँ और अगर बवाल ज्यादा हो जाए तो नरेंद्र मोदी को बलि का बकरा बना दिया जाए।

मोदी अटल बिहारी और आडवाणी से मिले संरक्षण की वजह से, और दंगों से पैदा हुए हिंदू ध्रुवीकरण के कारण इस झटके को सह गए। मौका ताड़ते हुए, वो जनता के सामने इस रूप में सामने आए कि  दंगें उनकी ही सरकार ने करवाए।

मोदी की इस चाल से भाजपा को तो बड़ा फायदा हुआ ही, मोदी भी अच्छी तरह से स्थापित हो गए, लेकिन दंगों के मुख्य साजिशकर्ता विश्व हिंदू परिषद और प्रवीण तोगड़िया जो राजनीतिक लाभ चाहते थे, वो उन्हें नहीं मिल पाया।

नए मुख्यमंत्री के रूप में कुछ दिनों तक तो मोदी ने प्रवीण तोगड़िया की सरकार में चलने दी, लेकिन जब वो ज्यादा हावी होने लगे तो उन्होंने उन्हें किनारे कर दिया।

प्रवीण तोगड़िया इससे बेहद क्रोधित हुए और कभी मोदी को हिंदू राष्ट्र बनाने वाले नेता के रूप में प्रचारित कर चुके तोगड़िया मोदी सरकार के खिलाफ बोलने लगे। इससे मोदी के निशाने पर वे आ गए।

मोदी के बारे में कहा जाता है कि वो किसी को माफ नहीं करते। केवल स्मृति ईरानी और कुछ हद तक उमा भारती इस मामले में भाग्यशाली कही जा सकती हैं। बाकी किसी नेता ने बाद में चाहे कितना भी सरेंडर न किया हो, मोदी ने किसी को माफ नहीं किया।

आगे चलकर, मोदी भाजपा और संघ को राष्ट्रीय स्तर पर जरूरी लगने लगे, और उधर तोगड़िया ने केशुभाई पटेल और गोवर्धन जड़ाफिया के साथ मिलकर मोदी के खिलाफ प्रचार करना शुरू कर दिया। केशुभाई और जड़ाफिया राजनीतिक रूप से खेत रहे और मोदी के गुस्से का सामना करने के लिए केवल प्रवीण तोगड़िया बचे।

मौके की नजाकत समझ, आरएसएस ने भी तोगड़िया का संरक्षण बंद कर दिया। अब हालात ये हो गए कि राजस्थान की भाजपा सरकार उन्हें गिरफ्तार करने पहुंच गई।

तोगड़िया को कुछ न समझ आया तो वो चुपके से भाग निकले और शाहीबाग में बेहोश पड़े मिले। अब वे भले ही रो-रोकर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हिंदुत्ववादी ताकतें अब उनके लिए मोदी और शाह की जोड़ी का साथ छोड़ने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में तोगड़िया के दिन और भी बुरे हो सकते हैं।

 

 

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