Friday, 15th December 2017

107 डाक्टरों के सपने चकनाचूर

Thu, Nov 30, 2017 4:14 PM

भोपाल : मध्य प्रदेश के निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में एनआरआई (अनिवासी भारतीय) कोटे के जरिए वर्ष 2017-18 में दाखिला पाए 107 विद्यार्थियों का प्रवेश निरस्त कर दिया गया है. यह जानकारी  राज्य के संचालक चिकित्सा शिक्षा (डीएमई) ने जबलपुर उच्च न्यायालय में दी.न्यायमूर्ति आर. एस. झा और न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की युगलपीठ ने मॉप-अप राउंड में हुए दाखिलों की जांच पर असंतोष जाहिर करते हुए पुन: जांच कर रपट पेश करने के निर्देश दिए हैं. खंडवा निवासी प्रियांशु अग्रवाल सहित अन्य चार की ओर से दायर की गई याचिकाओं में कहा गया था कि एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए मॉप-अप राउंड में नियमों को ताक पर रखकर निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में अयोग्य विद्यार्थियों को दाखिला दिया गया. मॉप-अप राउंड की 250 सीटों को लाखों रुपये में बेंचा गया.याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अमित सांघी ने संवाददाताओं को बताया, "याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय की युगलपीठ ने डीएमई को निर्देशित किया था कि 10 दिनों में मॉप-अप राउंड तथा एनआरआई कोटे में विद्यार्थियों से प्राप्त दस्तावेज को अभिरक्षा (कस्टडी) में लिया जाए. दस्तावेजों की जांच कर रपट न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए."सांघी ने कहा कि वास्तव में अंतिम काउंसिलिंग के बाद किसी तरह का दाखिला नहीं दिया जाना चाहिए, मगर मॉप-अप राउंड (पोछा लगाना) के नाम पर निजी चिकित्सा महाविद्यालयों ने बड़ी गफलत की.याचिका पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से युगलपीठ को बताया गया था कि दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं. दस्तावेजों की जांच जारी है. जांच रपट पेश करने के लिए सरकार ने मोहलत मांगी थी.सांघी के मुताबिक, "याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान डीएमई की तरफ से पेश की गई रपट में कहा गया है कि वर्ष 2017-18 में प्रदेश के सात मेडिकल कॉलेजों में कुल 114 विद्यार्थियों को एनआरआई कोटे के तहत दाखिला दिया गया था. जांच में 107 विद्यार्थियों का दाखिला नियम विरुद्ध पाया गया, जिन्हें निरस्त करने के संबंध में आदेश पारित कर दिया गया है. डीएमई द्वारा मॉप-अप राउंड में 94 विद्यार्थियों को दिए गए दाखिले के संबंध में पेश की गई रपट पर युगलपीठ ने असंतोष व्यक्त करते हुए पुन: जांच कर रपट पेश करने के निर्देश दिए हैं."विद्यार्थियों की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि उनके अच्छे अंक होने के बावजूद ऐसे लोगों को दाखिला दिया गया, जिनके अंक उनसे कम थे और वे प्रदेश के मूल निवासी भी नहीं थे.विद्यार्थियों के मुताबिक, "सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश थे कि एमबीबीएस पाठ्यक्रम में पहले प्रदेश के मूल निवासी विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाए. इसके बाद कोई सीट रिक्त रह जाती है, तो दूसरे प्रदेश के विद्यार्थियों को मैरिट के आधार पर दाखिला दिया जाए. लेकिन न्यायालय के आदेश के विपरीत जाकर सीटों को बेचा गया."याचिका में यह भी कहा गया है कि एनआरआई कोटे के तहत अयोग्य विद्यार्थियों को दाखिला दिया गया है. जबकि प्रदेश सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया था कि कोटे के तहत जिस विद्यार्थी को प्रवेश दिया जा रहा है, उसका स्वयं एनआरआई होना आवश्यक है.सांघी ने बताया, "याचिका में चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख सचिव व संचालक चिकित्सा शिक्षा सहित अरविंदो मेडिकल कॉलेज, चिरायु मेडिकल कॉलेज, आर.डी. गार्डी मेडिकल कॉलेज, एल.एन. मेडिकल कॉलेज, अमलतास मेडिकल कॉलेज, आर.के.डी.एफ . मेडिकल कॉलेज तथा पीपुल्स मेडिकल कॉलेज को पक्षकार बनाया गया है."

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