Monday, 19th February 2018

विपक्षी एकता की राह में बाधा बनी कांग्रेस

Thu, Nov 16, 2017 9:45 PM

-महेंद्र नारायण सिंह यादव-

जैसी कि उम्मीद थी वही गुजरात में होने जा रहा है। कांग्रेस चाहती तो है कि सारे विपक्षी दल उसका समर्थन करें, लेकिन बदले में वो कुछ नहीं देना चाहती। हालत ये है कि यूपी में समाजवादी पार्टी से 105 सीटें ले लेने वाली कांग्रेस गुजरात में शरद यादव के जनता दल को भी केवल एक सीट देना चाहती है।

एक तरह से कांग्रेस भाजपा के उस जालमें फँसती दिख रही है जिसके तहत अचानक मीडिया राहुल को समझदार, गंभीर और विद्वान नेता के रूप में पेश करने लगा है। कांग्रेस की सरकार बनने का अनुमान भी जानकार लोग पेश करने लगे हैं, और इसका परिणाम ये हुआ कि कांग्रेस सभी दलों से बिना शर्त समर्थऩ की जिद पर अड़ गई है।

          शरद यादव और उनके गुजरात प्रदेशाध्यक्ष छोटू भाई वसावा ने कांग्रेस आलाकमान से गुजरात में आदिवासी बहुल सात सीटों की माँग की है जबकि कांग्रेस उन्हें सिर्फ एक सीट देने के लिये तैयार है। बताया जा रहा है कि शरद गुट के जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष छोटूभाई बसावा की कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के साथ दो दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कांग्रेस अब अपनी जीत पक्की मान चुकी है और नहीं चाहती कि छोटे दलों या उभरते नेताओं  को सीट देकर अपने लिए कोई दिक्कत पैदा नहीं करना चाहती।
कांग्रेस एक सीट देने की मेहरबानी भी इसलिए ही कर रही है क्योंकि राज्यसभा के प्रतिष्ठित चुनाव में छोटू भाई वसावा ने ही नीतीश कुमार की इच्छा के खिलाफ जाकर अपना वोट कांग्रेस के अहमद पटेल को दिया था।           

अब छोटू भाई वसावा भी सात से कम सीट लेने पर तैयार नहीं हैं और ना ही कांग्रेस एक से ज्यादा सीट देने को राजी हैं। कांग्रेस ने सिर्फ वसावा के लिये एक सीट देने पर सहमति जतायी है, जबकि बसावा छह अन्य सीटों की मांग पर अड़े हुये हैं। शरद गुट का दावा है कि दक्षिणी गुजरात की आदिवासी बहुल 20 सीटों पर छोटू भाई का खासा असर है, और वे खुद इस इलाके से विधायक हैं।    
             कांग्रेस के इस बर्ताव से विपक्षी एकता की मुहिम को ठेस पहुंच सकती है।  शरद यादव भी इससे काफी नाराज दिखते हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को यह बता भी दिया है कि इस तरह के बर्ताव से गुजरात में भी भाजपा के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता प्रभावित होगी और उार प्रदेश की तरह गुजरात में भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने कांग्रेस को नसीहत दी है कि स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुये पार्टी हाईकमान को सहयोगी दलों के साथ उदारता दिखानी चाहिये। 

बात केवल जनता दल तक सीमित नहीं है। हार्दिक पटेल और पाटीदारों का भी समर्थन कांग्रेस बिना शर्त चाहती है और उन्हें सीटें नहीं देना चाहती । जिग्नेश मेवाणी का भी समर्थन कांग्रेस फोकट ही चाहती है और नहीं चाहती है कि वहां कोई दलित नेता उभरे। अल्पेश ठाकोर को ओबीसी नेता के रूप में प्रचारित किया गया और उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन भी कर ली, लेकिन उनके समर्थकों को टिकट मिलने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं।

सहयोगी दलों को कांग्रेस द्वारा सीटें दिए जाने से इन्कार करने पर शरद यादव की साझा विरासत बचाओ मुहिम को भी ठेस पहुंच सकती है। शरद यादव साझा विरासत बचाने के नाम पर गैर भाजपाई दलों को एकजुट करने में लगे हैं, और बिहार के अलावा आगामी चुनावों वाले मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में कई सम्मेलन कर चुके हैं।

ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस चाहती है कि सारे विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ कांग्रेस का प्रचार तो करें, लेकिन सीटें एक भी न लें। लगता नहीं कि म.प्र. राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली में कांग्रेस किसी भी दल को एक भी सीट देगी। ऐसे में सवाल यह उठेगा कि फिर ये दल आखिर कांग्रेस का समर्थन क्यों करें।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक टीकाकार हैं)

 

 

 

Comments 1

Comment Now


Previous Comments

Congress ko BJP raaj manjoor hai lekin bahujano ka ubhar nhi..... Message saaf h

Md

Videos Gallery

Poll of the day

शिवराज सरकार किसानों को बर्बाद क्यों कर रही है?

39 %
10 %
52 %
Total Hits : 81549