Tuesday, 19th September 2017

चोपड़ा साहब की बिटिया, कलुआ और राष्ट्रपति का बॉडीगार्ड!

Sat, Aug 12, 2017 1:33 PM

- महेंद्र नारायण सिंह यादव -

सेना के सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे को आप लोग हैं न, समझिए नहीं पाए। उसमें भारत की तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के "अपमान" का कोई इरादा हइए नहीं।

पहली बात हलफनामा तब दिया था जब राष्ट्रपति मुखर्जी बाबू थे। तब ये पता ही नहीं था कि अगली बार इनका नंबर लग जाएगा। हाँ, तो अब ये बन गए तो नियम तो नहीं बदला जा सकता न।
सेना ने यही तो कहा है न कि कोई एससी, आदिवासी, ओबीसी, ब्राह्मण, बनिया, कायस्थ, मराठा, कापू, पटेल, नायर वगैरा वगैरा राष्ट्रपति का बॉडीगार्ड (तक) बनने लायक नहीं होता। बना दें तो फज़ीहत हो जाएगी इंटरनेशनली। ई तो समय का फेरा ही मानिए कि अब महामहिम राष्ट्रपति खुद एससी हैं।
सेना ने हलफनामे में जो बकलोली की है, वह उम्दा क्वालिटी की है। बस, समझ में कमी आप लोगों की ही है। अब हम समझाते हैं पूरी बात।

उसने यो कहा है कि ये बॉडीगार्ड वैसे वाले बॉडीगार्ड नहीं न हैं। ई तो केवल दिखावटी होते हैं माने सेरेमॉनियल। और देखने दिखाने के लिए चाहिए होते हैं लंबे-चौड़े और खूबसूरत गबरू जवान। नहीं बे, ताकतवर नहीं यार, तुम भी बीच में टपक पड़ते हो। जब बता दिया है कि सब सेरेमॉनियल है तो ताकत का क्या काम?
हाँ तो, ई सारे ओबीसी, एससी-एसटी होते हैं काले-कलूटे, ठिगने, बदसूरत, लजाने वाले, ताड़न के अधिकारी टाइप। इसलिए इन सबको रखना बिलकुलै ठीक नहीं होगा। ताकत और हिम्मत का अचार रखना है क्या! बात शो-बाजी की है।

मार दुनिया भर के तो लोग आते हैं राष्ट्रपति से मिलने। ऊ सब इनको देखेंगे तो क्या समझेंगे! विदेशों में अपनी इज्जत बनाए और अश्वेतों से नफरत करके, गोरों के बीच में जगह बनाने में लगे बबुआ-बबुनी की क्या इज्जत रह जाएगी?
इनको देखकर कल को कोई नाइजीरियाई लौंडा चोपड़ा साहब की न्यूयॉर्क में इंटरनेशनल बिजनेस की स्टडी कर रही बिटिया को प्रपोज कर बैठा तो क्या होगा! बबुनी और बबुनी के पापा तो मारे शरम के मरिए न जाएँगे! 
नहीं भाई, मना तो बिटिया कर ही देगी और पुलिस कंप्लेंट भी कर देगी, पर सबको पता तो लग ही जाएगा वहाँ कि बताइए, इहै प्रपोज किये रहा। तो मार्केट वैल्यूए इतनी डाउन हो जाएगी कि कोई गोरा तो क्या ससुरा इंडियन तक लिफ्ट न मारेगा। 
चलो, गोरा तो खैर कोई न कोई पटा ही लेगी, इतनी चंट तो है, पर इंडियन तो न पटेगा। और ये इंडियन साला यहाँ आकर हल्ला और मचा देगा।  छुटकी के लिए भी प्रॉब्लम खड़ी हो जाएगी।

माना कि चोपड़ा साहब कास्टिस्ट नहीं हैं। उनके लड़के, भतीजे, भतीजियों ने कई अंग्रेजों और यूरोपीय लड़के-लड़कियों से शादी की है। न न, अब आ नहीं पाते। छुट्टिए नहीं मिलती और इहाँ गरमी और पॉल्यूशन बहुत है। हां, वही स्लम समझिए। तुम भी वही शब्द मुँह से निकलवा ही लेते हो।
खैर, यहाँ भारत में भी जो रिश्तेदार हैं चोपड़ा साहब के। उन्होंने भी सब इंटरकास्ट मैरिज ही की हैं। दूसरे स्टेटों में भी की हैं। ठाकुर, बनिया, सब तरह के ब्राह्मण, एक ठो ब्राह्मण से कन्वर्टेड मुस्लिम लड़की भी बहू है, और दामाद तो तकरीबन सारे ही मुस्लिम हैं, मतलब वही वाले, जो पहले ब्राह्मण या राजपूत थे।

हाँ जी, सही समझे, पूरे खानदान में देखें तो आपकी बात ठीक ही है कि मंसूरी, अंसारी, कुरैशी टाइप के मुसलमानों को छोड़कर, बाकी हर टाइप की ब्राह्मण बहू और हर तरह के मुसलमान दामाद आप लोग देख सकते हैं। इतने जबर लिबरल निकले हैं चोपड़ा साहब।
तो चोपड़ा साहब जाति-पाति और नस्ल का भेद कभी किए ही नहीं। अब इसका मतलब ये तो नहीं कि एससी-एसटी या अफ्रीकियों को ही बहू या दामाद बना लें! कुछ तो देखना ही पड़ता है न।

क्या कहा..! सच्ची मुहब्बत! चुप करो बे, अभी देंगे लपेड़ के दो हाथ सो सारी सच्ची मुहब्बत निकल जाएगी।
हाँ तो, राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड ये एससी-एसटी, मुसलमान, ईसाई और ओबीसी होने लगे तो पक्का समझिए, न्यूयार्क का वो "कलुआ" पीटर बेबी के पीछे पड़ ही जाएगा। अभी ही कोई कम लुकर-लुकर नहीं करता है। वो तो बेबी सब समझती है इसलिए न बची हुई है। नहीं जी, दोस्ती होने से क्या होता है। इतना कुछ तो चलता है, पर शादी ही कर लेगी क्या!
तो, मी लॉर्ड, चोपड़ा साहब और इनके जैसे सच्चे वाले देशभक्त भारतीयों के इंटरनेशनल स्वाभिमान की रक्षा के लिए ये ग्लोरियस ट्रेडीशन कायम रखी गई है कि राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड केवल सिख जाट, हिंदू जाट, हिंदू राजपूत ही हो सकते हैं। राजपूत माने लोधी नहीं बे। तुम ससुरे बुंदेलखंड वाले बीच में भौत ही खुचड़ करते हो। लॉर्ड साहब से पूरी बात ही नहीं करने देते।
हाँ, तो मी लॉर्ड, दैट्स ऑल।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार, लेखक और अनुवादक हैं। संपर्क- twitter@mnsyadav और www.facebook.com/mahendra.yadav.399)

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जे जो दुसरे वाये हैं न, इनकी का औकात कि राष्ट्रपति पै अपईं परछाईं डारंगे।

कर्नल वाई एस यादव

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