Wednesday, 22nd November 2017

दिल्ली की दुविधा

Wed, Jul 12, 2017 1:04 AM

- अजय कुमार

दिल्ली में चुनाव के समय आम आदमी पार्टी नई थी और पूर्ण रूप से आश्वस्त होकर कह सकता हूँ कि आप के जितना कर्मठ कोई और था भी नही अतः दिल्ली की जनता ने अपना पूर्ण मतदान आम आदमी पार्टी और श्री अरविन्द केजरीवाल के पक्ष में किया तथा दिल्ली में बहुमत की सरकार बनवाई।

जब जनता ने पूर्ण बहुमत देकर किसी पार्टी को जितवाया है तो उस पार्टी से उम्मीद की जाती है कि वो पार्टी और उसकी सरकार जनता के हित के लिए काम करे।

दिल्ली की जनता के विश्वास पर खरा उतरने का कार्य जैसे ही अरविन्द केजरीवाल और उनकी सरकार ने शुरू किया तो एक हारा हुआ दल जिसकी देश में सरकार है जिसके पास पूरी ताकत है , संगठन है, पैसा है सब कुछ है, ने अपनी गंदी राजनीति शुरू कर दी। चूँकि पुलिस उनके पास थी तो पहले तो उन्होंने पुलिस के माध्यम से आम आदमी पार्टी के विधायको को गिरफ्तार करवाना शुरू किया वो भी मामूली से मामलों पर जिनमे से अधिकांश केवल आरोप तक ही सीमित थे, जिनके मामले में आज तक दिल्ली पुलिस जांच पूरी नही कर पाई है।

 

पहला एजेंडा था कि भ्रष्टाचार को खत्म कैसे किया जाये। उसके लिए एंटी करप्शन ब्यूरो की आवश्यकता थी जिसके लिए मुख्यमंत्री द्वारा एस एस यादव आईपीएस को नियुक्त किया गया था, 150 से ज्यादा गिरफ्तारियाँ की गईं और एक हेल्पलाइन फोन नंबर जारी किया गया लेकिन एक रोज जब इसी ब्यूरो ने दिल्ली पुलिस के 2 सिपाहियों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया तो खलबली मच गयी क्योंकि अगर ऐसे ही गिरफ्तारी का सिलसिला चल पड़ता तो काफी अनसुनी परतें सामने आ जातीं। इसके बाद एक अतिरिक्त पद को स्थापित किया गया तथा एम के मीना आईपीएस को वहां नियुक्त कर दिया गया। उसके पश्चात सरकार के अधिकार से ACB का कार्य एक तरह से छीन लिया गया।

 

उसके बाद एक ऐसे आदमी के माध्यम से दिल्ली की सरकार को परेशान किया जाने लगा जिसका मतदान और सरकार से कोई जमीनी रिश्ता नही होता। हालाँकि संविधान के अनुसार रिश्ता जरूर है। दिल्ली के उपराज्यपाल के माध्यम से दिल्ली की चुनी हुई सरकार को परेशान किया जाने लगा। चूँकि जनता ने मतदान किया है तो जनता काम माँगती है, और जब भी कोई कारवाई या नया कार्य दिल्ली की चुनी हुई सरकार शुरू करती, उसमें टांग अड़ाने या विघ्न पैदा करने के आदेश उपराज्यपाल को प्रधानमंत्री कार्यालय से दे दिए जाते।

सैकड़ों फाइलों को उपराज्यपाल ने रोक कर रखा, अधिकांश को वापिस भी लौटा दिया, लेकिन अभी तक ये टांग अड़ाने का काम इतना प्रबल नही था।

इस टांग अड़ाने के मामले को लेकर सरकार ने हाई कोर्ट का रुख किया। वहां के माननीय जज साहब ने फैसला दिया कि LG ही बड़े हैं और इन्हीं की चलेगी, तो इस बारे में मेरा और सरकार का दोनों का एक ही मत है- दिल्ली के और देश के लोगों के मतदान में फर्क क्यों किया जाता है, वही वोटर कार्ड दिल्ली में बनता है और वही अन्य राज्यों में बनता है। चलो संविधान का हवाला देकर आप कुछ कह भी दें तो क्या ऐसा नही हो सकता कि मुख्यमंत्री और LG के विषय बाँट दिए जाए क्योंकि एक चुने हुए आदमी की जिम्मेदारी किसी नियुक्त आदमी से कहीं ज्यादा होती है।

जैसे ही हाई कोर्ट से फैसला आया उसके बाद से दिल्ली में दुविधा बढ़ती चली गयी क्योंकि सरकार को अपंग बना दिया गया, सारे अधिकार छीन लिए गये और एक हेडमास्टर साहब ऊपर बैठा दिए गये जिसका नुकसान ये हुआ कि दिल्ली सरकार के हर जनहित कार्य और प्लान में देरी होने लगी तथा कुछ फैसलों को खारिज तक कर दिया गया, जैसे कि दिल्ली सरकार ने दिल्ली में बसों का किराया कम करने का फैसला किया था जिसको LG साहब ने खारिज कर दिया। हालाँकि अभी दिल्ली में मेट्रो का किराया बढ़ा है जिसे खारिज करना चाहिए था। ऐसे अनेकों फैसलों को LG ने खारिज किया।

 

मुख्य बात है दिल्ली में काम कर रहे अधिकारियों की। उनके ट्रान्सफर इत्यादि, हटाना, लगाना ये सब काम LG के अधीन है यानी अगर किसी अफसर से जनता को शिकायत है तो जनता के चुने हुए मुख्यमंत्री तक को पावर नही कि उस अफसर को हटा सके। तो फिर क्या फायदा है ऐसी सरकार का! अगर जनता के चुने हुए प्रतिनिधि को कोई अधिकार आप देंगे ही नहीं तो फिर क्या फायदा है यहाँ चुनाव करवाने का।

जनता को बेवकूफ बनाया जा रहा है, और जनता ख़ुशी से बन रही है तथा अपने चुने हुए प्रतिनिधियों को कोस रही है। बेवकूफ जनता ये नही समझ रही है कि तुम्हारे ही गले को दबाया जा रहा है, तुमने जिसे काम करने भेजा था, उसके साथ ये व्यवस्था (सिस्टम) क्या खेल कर रही है। इसका शिकार तुम ही होने वाले हो। भाजपा और कांग्रेस की व्यवस्था ही उस सिस्टम की जनक है। अगर आम आदमी पार्टी खत्म हो जाती है या सरकार गिर भी जाती है तो आप ही का नुकसान है क्योंकि आप जरा खुद सोचिए कि पूरी पॉवर वाले UP, राजस्थान, हरियाणा वाले मुख्यमंत्री भी कुछ नही कर पा रहे हैं। वैसा ही एक और नमूना आपको यहाँ पकड़ा दिया जायेगा जो बिजली, पानी, महंगा करेगा। हर साल दाम बढ़ेंगे और सत्ता का दुरूपयोग सबसे ज्यादा।

ऐसे में जनता को सोचने-समझने और सही राय बनाने की ज़रूरत है।

(लेखक  आरटीआई एक्टिविस्ट और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र हैं)
 

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