Tuesday, 19th September 2017

हरदयाल कुशवाहा के बायोगैस प्लांट की धूम

Mon, Jul 10, 2017 11:08 PM

- महेंद्र नारायण सिंह यादव -

बुंदेलखंड के पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता हरदयाल कुशवाहा इस समय अपने बायोगैस प्लांट के लिए चर्चा में हैं। श्री कुशवाहा ने गोबर गैस को एलपीजी की तरह सिलेंडर में भरकर घरेलू और व्यावसायिक इस्तेमाल का तरीका खोजा है।

बरगद एनजीओ के संचालक हरदयाल कुशवाहा अपने इस प्लांट को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को दिखा चुके हैं। श्री प्रधान भी कई सेमिनारों में श्री कुशवाहा के प्रयास की सराहना कर चुके हैं। 

श्री हरदयाल कुशवाहा अब अपने इस प्लांट और तकनीक को आम जनता तक पहुंचाने  में जुटे हैं। इसके लिए पुणे में उनके एनजीओ बरगद ने महाराष्ट्र में ऊर्जा उत्सव में एक प्रदर्शनी भी लगाई। 7 और 8 जुलाई को आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय ऊर्जामंत्री पीयूष गोयल ने किया। श्री प्रधान ने इस मौके पर कहा कि वे जल्द ही हरदयाल कुशवाहा के घर जाकर उनके प्लांट का निरीक्षण करेंगे, और इसके व्यावसायिक इस्तेमाल पर विचार करेंगे। उन्होंने इस बारे में प्रधानमंत्री से भी चर्चा करने का आश्वासन दिया है।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को अग्रणी बनाना चाहते हैं, और इसमें गोबर गैस प्लांट की अहम भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा मंत्रालय और पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस विभाग अगर मिलकर बायोगैस गौशाला गोबर गैस बनाते हैं, तो 5 किलो के सिलेंडर बनाकर गरीबों को सस्ती गैस उपलब्ध कराई जा सकती है।

श्री कुशवाहा वृंदावन में स्वामी ए एस विज्ञानाचार्य के गोविंद मठ में ऐसे ही बायोगैस प्लांट को स्थापित कर चुके हैं। इस प्लांट में गोबर की सहायता से रसोई गैस बनती है। पिछले चार सालों से मठ में इसी गैस का इस्तेमाल हो रहा है।

श्री कुशवाहा कहते हैं कि विज्ञानाचार्य के परामर्श और निर्देश पर उन्होंने यह काम शुरू किया था जिसमें आशातीत सफलता मिली। गोबर का अगर एलपीजी गैस के लिए इस्तेमाल होने लगे तो देश विदेशी मुद्रा की बचत भी कर सकेगा, और दूध देना बंद कर चुके जानवर भी हमारे लिए आजीवन उपयोगी बने रहेंगे।

श्री कुशवाहा का कहना है कि गौवंश संरक्षण देश का अहम मुद्दा है, लेकिन अनुपयोगी हो चुके जानवरों का पालन-पोषण किसानों के लिए आर्थिक रूप से नुकसानदायक है इसलिए वे जानवरों को बेचने पर मजबूर होते हैं। अगर जगह-जगह गौशाला बनाई जाएँ और उन गौशालाओं से मिलने वाले गोबर का इस्तेमाल रसोई गैस बनाने में किया जाए तो दोनों ही समस्याएँ निपट सकती हैं।

बुंदेलखंड के छतरपुर जिले के नौगांव के रहने वाले हरदयाल कुशवाहा अब दिल्ली में रहते हैं, और अपने घर के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी अपने प्लांट की गोबर गैस रसोई गैस के रूप में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराते हैं।

उनका कहना है कि दिल्ली जैसे महानगरों में छत के ऊपर पानी के टैंकों को गैस के टैंक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, और छोटे तथा पोर्टेबिल टैंक भी बनवाए जा सकते हैं।

हालाँकि वे मानते हैं कि इसमें अभी और शोध की ज़रूरत है जिसके लिए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से चर्चा हुई है और श्री प्रधान ने इसमें उन्हें पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। थोड़े से प्रयास से इस गैस से बिजली भी बनाई जा सकती है और श्री कुशवाहा इस दिशा में भी प्रयास कर रहे हैं।

 गोबर गैस के सिलेंडरीकरण को देश की अनेक समस्याओं का हल बताने वाले श्री कुशवाहा कहते हैं, “मैं व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री जी के एलपीजी गैस पर सब्सिडी छोड़ने का समर्थक तो हूँ लेकिन सब्सिडी छोड़ने मात्र से तो तेलपूल का घाटा कम होने वाला नहीं है और किसानों की खाद की समस्या का हल भी  नहीं निकलने वाला है। ऐसे में जितनी जल्दी हो सके, गोबर गैस के सिलेंडर बाजार में उपलब्ध करा देने चाहिए और कम से कम गाँवों में तो इसकी शुरुआत तुरंत ही कर देनी चाहिए।”

श्री कुशवाहा स्वामी ए एस विज्ञानाचार्य के मार्गदर्शन में काम कर रहे यमुना रक्षक दल से भी जुड़े हैं, और दिल्ली इकाई के अध्यक्ष के रूप में नदियों की स्वच्छता के लिए काम करते हैं। उन्होंने  यमुना की सफाई के लिए कई बार अभियान चलाए हैं, और लोगों को इस ओर प्रेरित भी किया है।

 

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Sir ji you are great

G.L.mourya

Agar bharat me Sri kushawa g jaise log ho to vikas desh ka aapne pau par pakka hai

Aashish Singh kushwaha

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