Tuesday, 19th September 2017

सैनेटरी पेड पर टैक्स का दर्द शुतुरमुर्ग क्या जाने !

Sun, Jul 9, 2017 3:07 PM

- रक्षा यथार्थ -

शुतरमुर्ग से यदि महिलाएं पूछे कि तुम्हें वस्त्र की आवश्यकता है, तो शुतरमुर्ग ताल ठोकते हुए कहेंगे कि हमें तो एक गमछा/झोला मिल जाये तो भी हमारा जीवन कट जायेगा। जनाब, आपका जीवन तो बगैर लगोंटा के भी कट जायेगा क्योंकि आप शुतरमुर्गों को आदत है अंग प्रदर्शन करने की..!

घटिया पुरुषवादी मानसिकता  को जन्म देने वाले आप लंगोटावादी ही लोग हैं, जो अपने लंगोट की तुलना स्त्री से करते हैं। समाज के पुरुष एक वस्त्र का खर्च महिलाओं को ताना मारकर निकालते हैं ..(यह तुम महिलाओं को हर माह का नाटक) सेनेटरी पैड का खर्च,कॉस्मेटिक का खर्च, तुम स्त्रियों के बहुत नाटक हैं ..! इसे नाटक का नाम देने वाले ओछी मानसिकता के कुछ पुरुष अब इसकी कीमत में इजाफा से तो लंगोटी भी खोलकर घूमने लगेंगे। इस बात का ध्यान स्वयं लंगोटधारी ने नहीं रखा ,यह विचारणीय है!
खैर, समाज के पुरुष चाहे जितना ओपन माइंड होने की बात करें, और स्त्रियों के हित/अहित पर चाहे जितना चिंतन-मनन कर डाला गया हो अब तक ..! पर ये आज भी अटल सत्य है कि पुरुषवाद की जड़ें सामाजिक व्यवस्था में इतनी गहरे उतर चुकी हैं कि उसके प्रभाव में पुरुष आए बिना रह नहीं सकता!

महिलाओं के अधिकारों / ज़रूरतों पर खुले विचारों वाले  पुरुषों ने चाहे जो भी लिखा या अपनी राय ज़ाहिर की हो, लेकिन ये सत्य ही है कि स्त्री के मामलों के सही हल के लिए स्त्री जैसा मन मस्तिष्क होना काफी नहीं है बल्कि' "स्त्री" ही होना ज़रूरी है! अभी हाल ही में "सेनेटरी पैड" पर टैक्स और  "कॉन्डोम" की फ्री डिलेवरी हज़ारों सालों से चली आ रही "पुरुष वादी' सोच का ही उदाहरण है! जब आप इस मुहिम को महिला हित के लिए फ्री सर्विस दे सकते हैं तो टैक्स लगाकर महिलाओं की  जरूरतों पर चोट क्यों? यह तो सरकार के दोहरा चरित्र को दर्शाता है अर्थात् सरकार भी पुरुष वादी/लंगोटावादी मानसिकता से प्रेरित है।

एक तरफ जहाँ सरकार माहवारी सुरक्षा के नाम पर अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर टैक्स! यानी सरकार चाहती हैं कि कंडोम पर टैक्स लगाकर वह एड्स जैसी घातक बीमारी में बढ़ोत्तरी ला सके! कंडोम लंगोटाधारी कंडोम पर टैक्स लगाकर प्राकृतिक सौंदर्य का एहसास लेना चाहते है! शायद वह भूल चुके हैं कि माहवारी में महिलाओं के लिए कपड़े का उपयोग सुरक्षित नहीं । भागते दौड़ते  नौकरीपेशा महिलाएं यदि इस टैक्स का भार वहन कर भी लें तो भी यह प्रतिमाह उनके बजट  पर चोट जैसा है!

स्वच्छ भारत का डंका पीटने वाले सर्वप्रथम महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता अभियान शुरू करें । ग्रामीण महिलाएं पुन: कपड़े का सहारा लेना आरंभ कर देंगी। यह हर माह का खर्च वहन करना उनके वश का नहीं। डिजिटल का डंका पीटने वाले लंगोटाधारी सर्वप्रथम जीवन देने वाली महिलाओं का ख्याल रखते, तब हम कह सकते थे कि पुरुष स्त्री के अनुरूप सोच रखता है किंतु देश का प्रधानमंत्री जिसने सेनेटरी पैड खरीद कर कभी नहीं दिया होगा, वह क्या समझेंगा महिलाओं का दर्द, उनकीआवश्यकताएँ!

यदि भारत का प्रधानमंत्री कोई महिला होती तो भी क्या यहीं निर्णय आता..? बिल्कुल भी नहीं ! अपितु सरकार का कर्तव्य होता कि सुरक्षित शारीरिक संबंध और महिला सुरक्षा के लिए कंडोम एवं सेनेटरी पैड फ्री वितरित किए जाते! क्योंकि यह सभी की मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़ी हुई हैं! संक्रमण का अड्डा बनाना है तो टैक्स वसूला जाए वरना टैक्स हटाया जाए! लंगोटाधारी स्वार्थी बन गए हैं।  इन्हे सिर्फ़ अपना हित दिख रहा है! ये चाहते हैं कि इनके हित को अब महिलाएँ पूरा करें, क्योंकि सदैव से ही महिलाओं का सिर्फ़ इस्तेमाल हुआ है! "स्त्री भोग की वस्तु है" , यही साबित करने की कोशिश है ये टैक्स!
(लेखिका रक्षा यथार्थ समतावादी विचारों की स्वतंत्र लेखिका हैं, और सम-सामयिक विषयों पर बेबाक टिप्पणियों के लिए जानी जाती हैं)

Comments 12

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Behtareen article.

Dr. Sunil Kumar Mishra

Behtrin

kavita chahar

Ati sunder....gahra prahar vikrit mansikta par.....

arun yadav

Nari dard ki yatharth vyakhya prastut kiya hai.Raksha keep it up. Great effort.

Pankaj Kabeer

बहुत ही गहरा प्रहार है , लोगो की गन्दी मानसिकता पर....

Rashmi yadav

SO SUPAR nice

Manoj ray

Superb article

Durgesh

so good and your writing skills are essential for future generations . keep it up.

Shailendra kumar Pandey

बेहतरीन विश्लेषण! सरकारी तंत्र और अलगाववादी मानसिकता वाले नीति नियंताओं की छुपी मानसिकता को बाहर लाने हेतु धन्यवाद।

anchlesh

Bahut accha likha aapne

Shailendra yadav

Poisoned true

Inderjeet sangwan

बहुत आवश्क विषय पर बहुत बढ़ीया लेख।सरकार को ए आइना दिखाना ही चाहिये।

Rajendra

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