Sunday, 19th November 2017

अब बनारस के छात्र-छात्राओं ने बजाया बिगुल

Mon, Jun 12, 2017 11:20 PM

जेएनयू, लखनऊ यूनिवर्सिटी और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के साथ ही अब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र भी  केंद्र की मोदी सरकार की विश्वविद्यालयों को बरबाद करने क नीति के खिलाफ आंदोलन पर उतर आए हैं। यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन के बैनर तले बीएचयू के छात्र 14 जून को आक्रोश मार्च निकालने जा रहे हैं। 

यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन की नेता और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की छात्रा रहीं नेहा ने इस लड़ाई को आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं के हित में जरूरी बताया है। नेहा ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों के नियमों और फीस में भारी अंतर का विरोध करते हुए, एक समान नियम लागू करने क माँग की है।

बनारस में लंका से शुरू होकर यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन का आक्रोश मार्च प्रधानमंत्री और बनारस के सांसद नरेंद्र मोदी के कार्यालय पीएमओ तक जाएगा। आंदोलन को सफल बनाने के लिए यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन के सदस्यों ने दिल्ली, लखनऊ, आगरा, और हैदराबाद  के विश्वविद्यालयों में जाकर समर्थन मांगा है।

यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन के कार्यकर्तााओ न जेएनयू और दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्रों से मिलकर उन्हें बनारस आने के लिए आमंंत्रित किया है। 

दिल्ली में  यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन ने कई सांसदों और नेताओं तथा सामाजिक न्याय के पक्षधर विचारकों से भी मुलाकात की है। जनता दल यूनाइटेड नेता शरद यादव, सपा सांसद धर्मेंद्र यादव, सांसद तेज प्रताप यादव,  कांग्रेस नेता कैप्टन अजय यादव से मुलाकात में इन नेताओं ने यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन के मुददों का समर्थन किया। कई सांसदों ने संसद के आगामी सत्र में भी ये मुद्दा उठाने का आश्वासन दिया है।

यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन ने आंदोलन को सफल बनाने और आक्रोश मार्च को पुलिस के दमन से बचाने की भी खास रणऩीति तैयार की है। 

14 जून के बनारस के आक्रोश मार्च के मुद्दे इस प्रकार से हैं :

- सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटियां मानव संसाधन मंत्रालय से संचालित होती हैं, ऐसे में कोर्स की फीस समान होनी चाहिए। सेंट्रल यूनिवर्सिटियों में फीस का मामला इतना बड़ा है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राएं कई बार एडमिशन ले ही नहीं पाते हैं। यह फीस भी बहुत कम की जानी चाहिए। यदि गांव देहात के किसान के बच्चों को शिक्षित करना चाहते हैं, तो फीस को कम करना अति आवश्यक है। यूजीसी एक समान फीस का निर्धारण करे। सेंट्रल यूनिवर्सिटियों में दोहरी फीस की नीति बंद होनी चाहिए।

2- पूरे प्रदेश में जो भी सेंट्रल यूनिवर्सिटियां हैं, वहां पर कम्बाइंड एंट्रेंस टेस्ट के द्वारा एडमिशन लिए जाने चाहिए। इससे छात्रों के साथ न्याय हो सकेगा। छात्रों को अच्छी यूनिवर्सिटियों में भी पढ़ने का मौका मिलेगा। मेधावी छात्रों को यूनिवर्सिटियां दरकिनार नहीं कर सकेंगी।

3- सेंट्रल यूनिवर्सिटियों का सेंट्रलाइजेशन कर दिया जाए। सभी के रूल्स एवं रेगुलेशन समान किए जाएं। इससे सभी को फायदा होगा। यूनिवर्सिटियों के संचालन में भी मदद मिलेगी।

ब्यूरो रिपोर्ट, newslive24.in

 

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