Wednesday, 22nd November 2017

मेमॉरीज़ फॉरेवर : सारिका गिरिया

Sat, Jun 10, 2017 12:04 PM

 

- महेंद्र नारायण सिंह यादव - 

सारिका गिरिया नाम है एक उभरती हुई लेखिका का, लेकिन उनकी एक पहचान दक्षिण भारत की मशहूर कन्ज्यूमर ड्यूरेबिल्स और इलेक्ट्रॉन्क्स चेन गिरिया’ज़ के साथ-साथ बंगलौर के गिरियाज़ चिल्ड्रन्स एक्सप्लोरियम से भी जुड़ी है। अपने पति मनीष गिरिया के साथ मिलकर उन्होंने अपने पारिवारिक व्यवसाय से अलग, समाज और बच्चों की बेहतरी के लिए इस एक्सप्लोरियम की शुरुआत की है।

कोलकाता में जन्मीं और विवाह के बाद काफी समय तक केवल गृहिणी बनकर रही सारिका अब अपनी प्रतिभा को लगातार फलने-फूलने का मौका दे रही हैं, और उनकी एक लोकप्रिय किताब ने उन्हें चर्चित लेखकों में शुमार कर दिया है। दिल्ली के मशहूर प्रभात प्रकाशन/ओशन बुक्स से प्रकाशित पुस्तक मेमोरीज़ आर फॉरेवर में सारिका ने माँ और बच्चे के बीच के संबंध को बहुत ही भावुक और मार्मिक अंदाज में पेश किया है। ऐसा लगता नहीं कि ये उनकी पहली पुस्तक है।

मेमोरीज़ आर फॉरेवर अंग्रेजी पाठकों के बीच तो काफी लोकप्रिय हो ही चुकी है, और जल्द ही हिंदी पाठकों को भी इसे पढ़ने का अवसर मिलने वाला है। इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद महेंद्र यादव ने किया है। उनका दावा है कि ये पुस्तक हिंदी में भी काफी चर्चित होने जा रही है।

दिल को छू लेने वाली इस कहानी में नायिका सिमरन को जब अपने गर्भवती होने का पता चलता है, तभी से वह अपने सारे अनुभव डायरी में लिखने लगती है। पूरी कहानी डायरी के रूप में ही है। इसी डायरी के रूप में अपने बेहद खुश और संतुष्टि भरे जीवन का वर्णन और बहुत रोचक और चित्ताकर्षक ढंग से अपने होने वाले बच्चे के लिए करती है। अपने मायके से लेकर, पति, सहेलियों और अतिसमृद्ध परिवार के बारे में बताती है। बच्चे को जन्म देकर अपने जीवन को पूर्ण करने के सुखद अहसास का सपना उसकी आँखों में तैरता है जिसे वह डायरी में लिखती रहती है। ऐसे में ही एकदम से अचानक ऐसा मोड़ आ जाता है कि पाठक भी नायिका सिमरन का संवेदना खुद ही महसूस करने लगते हैं।

डायरी लिखने का सफर फिर भी जारी रहता है, लेकिन तब तक बात मनोरंजन से आगे निकलकर भावनात्मक जुड़ाव तक आ जाती है। जीवन में सब कुछ पाती रही सिमरन अंत में बहुत कोशिश करती है, कि अपने बच्चे को एक बार देख ले, लेकिन ये नहीं हो पाता। बच्चे को देखने की एक माँ की तड़प जिस खूबसूरती से लेखिका सारिका गिरिया ने व्यक्त की है, उसके लिए उनकी जितनी सराहना की जाए, वह कम है।

मेमॉरीज़ आर फॉरेवर  के जरिए सारिका ने अपने संयुक्त परिवार के अनुभवों को भी बखूबी दर्शाया है। सिमरन की छोटी बहन के रिश्ते की बात चलने से लेकर विवाह होने तक के बहुत सारी घटनाएँ एकदम वास्तविक रूप में लेखिका ने दर्शाए हैं।

मेमॉरीज़ आर फॉरेवर  में अपने बच्चे से बिछुड़ने की कगार पर खड़ी माँ अपने अजन्मे बच्चे के लिए बहुत ही भावुक और मार्मिक अंदाज़ में यह कविता लिख जाती है:

कुछ ही पल में मुझे तुमसे कहना है अलविदा,

जाऊँगी तुमसे दूर, ऊंचे आसमान में रहूँगी सदा।

तुम्हें छोड़ते हुए मुझे है दुख-दर्द का भरपूर अहसास,

समझा पाऊँ अपने भाव, वे शब्द नहीं मेरे पास।

हम दोनों की इन यादों को हमेशा सँजोए रहना,

मैंने सदा तुम्हें चाहा, यह याद करते रहना।

जब मैं न रहूँगी, तुम मुझे वचन ये देना,

मेरी यादें-मेरी तस्वीर भुला न देना।

मौत से मिलने वाला दर्द कभी नहीं है भरता

पर जो प्यार है दिलों में, वह तो कभी न मरता।

 लेखिका और समाजसेविका सारिका गिरिया को पढ़ने और खाना बनाने का भी शौक है। बच्चों के साथ बिताना और उनके लिए खाना बनाना उनका पसंदीदा शौक रहे हैं, और इसलिए जब उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रखा तो अपने इन्हीं शौकों को तरजीह दी। गिरियाज़ चिल्ड्रन्स एक्सप्लोरियम उद्यमिता से ज्यादा उनके शौक और उनकी दिलचस्पियों की झलक देता है।

एक्सप्लोरियम के जरिए सारिका ने अपनी रचनात्मकता में एक और नया आयाम जोड़ा है। ये एक्स्प्लोरियम बच्चों के लिए खेल संग्रहालय है जो करीब 25 हजार वर्ग फुट में फैला है। ये कई भागों में विभाजित है जिनमें बच्चे खेल-खेल में सीखते हैं, और बड़े भी खेलना सीखते हैं।

 
 

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