Wednesday, 22nd November 2017

नेशन वॉन्ट्स टू नो अबाउट अर्णव गोस्वामी !

Sun, May 7, 2017 12:11 AM

 

 - महेंद्र नारायण सिंह यादव -

नया टीवी चैनल लेकर आए पत्रकार अर्णव गोस्वामी बेहद समझदार और व्यावहारिक परिवार से आते हैं। कांग्रेसी, कम्युनिस्ट और भाजपा, तीनों का खून बहता है रगों में। चीखते-चिल्लाते तो बहुत हैं, सबको पता ही है, लेकिन जब कोई बड़का भाजपा नेता सामने हो तो मिमिया भी लेते हैं।
समय की धार देखकर चलने वाला परिवार है जी। जब जनसंघ और भाजपा को कोई नहीं पूछता था, तब अर्णव के दादा रजनीकांत गोस्वामी कांग्रेस के नेता थे। कम्युनिस्टों का ज़रूर कुछ प्रभाव था, तो अर्णव के नाना गौरीशंकर भट्टाचार्य कम्युनिस्ट पार्टी में थे। बनाकर तो सबसे रखना पड़ता है न। बाद में कांग्रेस सिकुड़ने लगी, और तमाम कांग्रेसी नेता, समर्थक, कार्यकर्ता, लेखक, पत्रकार, गुंडे, बलात्कारी भाजपा में आने लगे।
अब आपको क्या लगता है, अर्णव के घरवाले ये सब देखते रहते? तो "लाल सलाम" बोलने वाले कम्युनिस्ट पिता गौरीशंकर भट्टाचार्य के बेटे सिद्धार्थ भट्टाचार्य "भगवा सलाम" बोलने लगे। 
अर्णव के पिता मनोरंजन गोस्वामी भी तो सेना से रिटायर होकर क्या घर बैठे रहते... राजनीति ही करते न..और राजनीति करते तो क्या मर रही कांग्रेस में जाते..नहीं, भाजपा में ही जाते न..तो भाजपा से 1998 में चुनाव लड़े। बुरा हो मतदाताओं का, जिन्होंने हरा दिया। 
खैर, मामा जी यानी सिद्धार्थ भट्टाचार्य सही लाइन पर रहे। लाल और भगवा में वैसे भी ज्यादा अंतर तो होता नहीं। तो छुटके भट्टाचार्य भाजपा की लाइन पर चल पड़े। अरे, अभी पिछले विधानसभा चुनाव के पहले तक तो असम भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ही थे, मुख्यमंत्री बनना था, वो तो सर्वानंद सोनोवाल टपक पड़े तो सब गड़बड़ हो गया, विधायक अब भी हैं। खैर, आगे कुछ न कुछ ठीक होगा। भांजा भी तो है संभालने को।

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