Sunday, 19th November 2017

निर्भया गैंगरेप केस: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, दोषियों की मौत की सजा बरकरार !

Fri, May 5, 2017 3:26 PM


नई दिल्ली: पूरे देश को झकझोर देने वाले निर्भया केस में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनते हुए इस मामले के दोषी अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और मुकेश की फांसी की सजा कायम रखी है। कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को कायम रखा है। तीनों जजों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया। इससे पहले, चारों ने इस सजा को अदालत में चुनौती दी थी। अदालत ने 27 मार्च को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था।

पूरे देश की इस फैसले पर नजर थी। सुप्रीम कोर्ट ने शायद यही मेसेज देने की कोशिश की है कि इस तरह के बर्बरतापूर्ण अपराध के लिए नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है। कोर्ट ने माना कि दोषियों को पता है कि उन्होंने कितनी वहशियाना हरकत की है। अदालत ने कहा कि इस वारदात की वजह से देश में 'शॉक की सूनामी' आ गई थी। कोर्ट ने जैसे ही फैसला सुनाया तो निर्भया के मां-बाप और अन्य लोगों ने कोर्ट में तालियां बजाईं। जस्टिस दीपक मिश्रा ने विस्तार से फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि इस केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। कोर्ट ने माना कि इस मामले में अमीकस क्यूरी की ओर से दी गई दलीलें अपराधियों को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं थीं।
फैसले के बाद निर्भया के पिता ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ की पूरी उम्मीद थी और सही मायने में अब सुप्रीम इंसाफ हुआ है। निर्भया के साथ-साथ समाज व देश को न्याय मिला है। वहीं, निर्भया की मां ने कहा, 'ये फैसला सिर्फ हमारा नहीं था। यह फैसला पूरे समाज का था। मैं सभी का धन्यवाद करती हूं। आज निर्भया को इंसाफ मिला।' नाबालिग दोषी के छूटने पर निर्भया की मां ने कहा कि उन्हें यह गम पूरी जिंदगी रहेगा। वहीं, बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है। हर शख्स को जीने का अधिकार है। वकील के मुताबिक, जिसने जिंदगी दी है, उसे ही वापस लेने का अधिकार है। उन्होंने कहा, 'समाज में मेसेज देने के लिए मौत की सजा नहीं दी जा सकती। हम फैसले की कॉपी पढ़ने के बाद रिव्यू पिटिशन दाखिल करेंगे।'

क्या हुआ था
16 दिसंबर 2012 की रात देश की राजधानी दिल्ली में 6 लोगों ने 23 साल की मेडिकल स्टूडेंट के साथ चलती बस में गैंगरेप किया। दोषियों में एक 17 साल का नाबालिग भी शामिल था। पीड़ित अपने दोस्त के साथ मूवी देखने के बाद घर वापस लौट रही थी। वे गंतव्य तक जाने के लिए बस में सवार हुए, जहां आरोपियों ने उसके दोस्त की पिटाई की और वहशियाना ढंग से पीड़ित के साथ गैंगरेप किया। 29 दिसंबर को पीड़ित की मौत हो गई। ट्रायल के दौरान एक आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगा ली थी जबकि छठा आरोपी नाबालिग था, जिसे 3 साल तक जूवेनाइल होम में रखने का आदेश दिया गया था।

अभी तक क्या हुआ
-साकेत स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इन चारों को गैंगरेप और हत्या के लिए दोषी करार दिया था। 13 सितंबर, 2013 को चारों को हत्या के लिए फांसी की सजा सुनाई गई थी और कोर्ट ने मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर माना था।

-इसके बाद इन्होंने हाई कोर्ट में अपील की थी और हाई कोर्ट से भी इनकी फांसी की सजा बरकरार रखी गई। इसके बाद इनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट में चारों मुजरिमों ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दे रखी है।
-सुप्रीम कोर्ट में 4 अप्रैल 2016 में बहस शुरू हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चारों दोषियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन और एडवोकेट संजय हेगड़े को दोषियों के बचाव के लिए एमिकस क्यूरी बनाया।

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