Sunday, 19th November 2017

जस्टिस सीएस कर्णन की हो मेडिकल जांच: सुप्रीम कोर्ट

Mon, May 1, 2017 4:14 PM

नई दिल्ली: कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सीएस कर्णन के मामले में नया मोड़ सामने आया है।  उच्चतम न्यायालय ने कोलकाता में एक सरकारी अस्पताल द्वारा गठित डॉक्टरों के बोर्ड को चार मई को न्यायमूर्ति सी एस कर्णन की मेडिकल जांच करने का आज आदेश दिया।  प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वह पुलिस का एक दल गठित करें जो न्यायमूर्ति कर्णन की मेडिकल जांच में मेडिकल बोर्ड की मदद कर सकें। पीठ ने अपने पहले के आदेश का जिक्र करते हुए देशभर की सभी अदालतों, ट्रिब्यूनलों और आयोगों को निर्देश दिया कि वह आठ फरवरी के बाद न्यायमूर्ति कर्णन द्वारा दिए गए आदेशों पर विचार ना करें। अपने पहले के आदेश में पीठ ने न्यायमूर्ति कर्णन को प्रशासनिक और न्यायिक कार्य करने से रोक दिया था।  

पीठ ने न्यायमूर्ति कर्णन को अवमानना नोटिस पर उनसे जवाब देने का निर्देश देने के साथ ही यह भी कहा कि अगर आठ मई तक कोई जवाब नहीं आता है तो वह मान लेगा कि ‘‘उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है।’’  न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एम बी लोकुर, न्यायमूर्ति पी सी घोष और न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ की सदस्यता वाली इस सांविधान पीठ ने मेडिकल बोर्ड को आठ मई या उससे पहले मेडिकल रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया तथा न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवायी के लिए एक दिन बाद की तारीख तय की।  

 

इससे पहले न्यायमूर्ति कर्णन 31 कार्च को शीर्ष अदालत के समक्ष पेश हुए थे और उन्होंने न्यायिक तथा प्रशासनिक शक्तियां बहाल करने की मांग की थी। लेकिन न्यायालय ने अपने पहले के आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया था जिसके बाद न्यायमूर्ति कर्णन ने कहा था कि वह दोबारा न्यायालय के समक्ष पेश नहीं होंगे।  उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय और शीर्ष न्यायालय के न्यायधीशों के खिलाफ लिखे गए न्यायमूर्ति कर्णन के कई पत्रों पर स्वत: संज्ञान लिया है। 


क्या है विवाद ?  
जस्टिस कर्णन इस साल जून में रिटायर होने वाले हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने आठ फरवरी को उनके सभी संवैधानिक और न्यायिक अधिकारों से वंचित कर दिया था। जस्टिस कर्णन ने अवमानना के मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं छह अन्य जजों पर 14 करोड़ रुपये हर्जाना देने का आदेश जारी कर दिया था। जस्टिस कर्णन ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की विदेश यात्रा पर भी रोक लगा दी थी। जस्टिस कर्णन कोलेजियम द्वारा किए गए ट्रांसफर के खिलाफ अपनी ही अदालत में आदेश देकर विवादों में घिर गये थे। जस्टिस कर्णन का आरोप है कि उन्हें दलित होने के कारण परेशान किया जा रहा है।

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