Thursday, 21st September 2017

माँ की याद में.. . . . . .. . . . .

Thu, Apr 20, 2017 10:51 AM

 

मेरी  जिन्दगी का सबसे बड़ा दिन "माँ" का जन्मदिन

सुबह सुबह की चहल-पहल में जो मुस्कुराती थी, वो माँ थी।
सबके जन्मदिन को त्यौहार सा मनाती थी, वो माँ थी।
वो माथे का टीका थी और सुबह की पूजा भी,
जो हमारे घर आने का इंतज़ार करती थी, वो माँ थी।

कभी चोट लग जाए तो डांट माँ थी, 
और मेरी हर चोट का इलाज भी माँ थी,
रात की नींद थी और सुबह का जागरण भी माँ थी
हमारे हंसते चेहरों का जो कारण भी माँ थी।

न जाने कब हमारी नींद खत्म हो गई 
और सुबह का जागरण खत्म हो गया
पता नहीं कब चेहरे की मुस्कान चली गयी
अब तो माथे के टीके की लाली भी।

अब चोट लगने पर दवा भी खुद लगा लेते हैं
अब खुद से ही खुद को समझा लेते हैं
अब तो आंसूं भी जगह देख के आतें हैं 
बस आपकी याद को नहीं रोक पाते हैं।

तुम धन्य हो माँ, तुम से ही मै हूँ,
मेरा अस्तित्व भी तुम से है और मेरी प्रेरणा भी तुम हो 
आज का दिन मेरे जीवन का सबसे बड़ा दिन है 
क्योंकि आज "माँ का जन्मदिन"  है।

 
तृप्ति धवन

(युवा और उदीयमान कवियित्री तृप्ति धवन पेशे से आहार विशेषज्ञ है! यह कविता उन्होंने खास तौर पर अपनी माँ के लिए लिखी है , उस माँ के लिए जो अब सिर्फ उनकी यादों में ही हैं  )

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Very touching line written by u dear... God bless you

NADIA KHAN

Lovely poem. Maa to maa hoti hai beta, uski jagah koi nahi le sakta. Ye katu satya hai. Unki yaad mann me sanjo kar rakho. Kisi aur se us pyar ki umeed mat karo. Wo niswarth prem aur koi nahi de sakta.

Charu Sarin

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