Thursday, 21st September 2017

"माँ"

Sun, Apr 9, 2017 5:38 PM

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

माँ ममता की मूरत है
माँ बेहद ही खूबसूरत है।
माँ ईश्वर का अवतार है
माँ गीता का सार है।।

माँ के आँचल में ममता है
माँ की आँखों में प्यार है।
माँ गंगा सी निर्मल है
चरणों में चारो धाम है।।

माँ की बातें तो मीठी हैं।
पर डाटों में भी प्यार है।।
दण्ड अगर हमको दे भी
पर आँखों में अश्रु अपार है।।

मैं यहाँ रहूँ मैं कहीं रहूँ
वो ही मेरी खेवार है।
मेरा रूप उसी से गुण उसी से
वो ही मेरा श्रृंगार है।।

सीता भी वो अम्बा भी वो।
वो ही पालन हार है।।
इस ह्रदय में भी माँ ही है।
वो मेरा हिंदुस्तान है।।

माँ की यादें हैं आँखों में।
वो ही जीने का सहारा है।।
मेरी कविता की हर एक पंक्ति में।
"मां" सिर्फ़ जिक्र तुम्हारा है।।

                                  तृप्ति धवन

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