Tuesday, 19th September 2017

लड़की दुनिया में क्यों आई?

Thu, Apr 6, 2017 2:27 PM

 
- नेहा  
अजीब सी उलझन
अजीब सी तकलीफ
लड़की दुनिया में क्यों आई ?
 
पूछती चली आई बचपन की बोली से
बढ़ती उम्र की झोली तक
उत्तर न मिला मुझे एक भी हमजोली से
दर्द से गुजरती हुई बचपन से सहती आई
फिर भी प्रकृति ने तकलीफ भी मुझ में ही आजमाई
आदत ही कुछ ऐसी बनाई
कि हर ओर झुकती चली आई
कॉपी कलम किताब ले
पढ़ने को करीब आई
फिर भी मैं दूर भगाई गई
अजीब सी उलझन
अजीब सी तकलीफ
लड़की दुनिया में क्यों आई ?
 
कहते है लोग आ गई
मैं बराबर हो गई समान
लेकिन किताबो से दूर
अब भी मैं हूँ एक अनजान पहेली
बचपन से एक ही पाठ एक ही सीख
दायरों का संसार
उसी में रहना घुट घुट जीना
फिर भी मैं ही सहू संस्कारों की दुहाई
रीति रिवाज रिस्तों में जंजीर की तरह काम आई
बाँधने को तो रिश्ते हैं
फिर भी डोली मेरी ही क्यों उठाई?
अजीब सी उलझन
अजीब सी तकलीफ
लड़की दुनिया में क्यों आई ?
 
इक्कीसवीं सदी गर है आजादी
फिर क्यों नही डोली पुरुषो की उठाई,
ऐसी आजादी आई
तब क्यों बिदाई मेरी हुई
अनजान घर अनजान लोग
फिर भी मैं अपनाई
नई डगर के कठिन रास्ते को
मैं आसान बनाई
फिर भी मैं ही पराई कहलाई
किस से प्रश्न करूं
या अंत करू कुछ समझ न पाई
आसानी सी समझ जिंदगी
इस दुनिया ने लड़की खूब रुलाई
अजीब सी उलझन
अजीब सी तकलीफ
लड़की दुनिया में क्यों आई ?
 
(कवयित्री नेहा ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पोषण विज्ञान में पीएचडी कर रही हैं।)
 

Comments 4

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nice poem m a tollratr with very deep thought. ...keep it up

vinita yadav

One of nice poem dedicated to women.

vinay Yadav

अति सुन्दर नेहा जी

बहुत खूब लिखा है। लड़की दुनिया में क्यों अई? माँ की ममता,पिता की लाड़ो क्यों जीवन से घबराईं?? जिसका आंचल धरती सा , उसकी बेटी धरा पर ही धराशायी कर दी गई भू कमजोर हुई,बेटियां भूमि मे समाती गयी धरती के कोख में बेटियां हर पल दफनायी गईं! #यथार्थ

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