Sunday, 19th November 2017

एकल महिलाओं के प्रति निष्ठुर समाज

Wed, Mar 29, 2017 11:41 PM

                                                                                       उमा जायसवाल -                                            -                                    

आवरण में रहने वाली स्त्रियों की संवेदना की सुनवाई तुलनात्मक रूप से जल्दी होती हैं समाज में।
बहुत पहले मैंने किसी बातचीत में किसी को ये कहते हुए सुना था कि कोई सीपीएम का नेता था जिसने ममता बैनर्जी को वेश्या बोला था। कब की बात है और किसने कहा था, यह मुझे अब ठीक से याद नहीं।
इसके बाद अभी कुछ दिनों पहले मायावती के लिए भी भाजपा के एक नेता दयाशंकर ने वेश्या से भी निकृष्ट बोला था। 
मैं तो कहती हूँ कि आप किसी भी फील्ड में काम करने वाली और पारिवारिक आवरण में रहने वाली महिला को सार्वजनिक रूप से सामने से रंडी कहकर दिखा दें। दयाशंकर जैसो के गुर्दे में दम हो तो, तो पारिवारिक आवरण में रहने वाली किसी महिला के लिए ऐसा कुछ बोलें।
मायावती ने उन सारे मूल्यों को बड़े जतन से पोषित किया जो पितृसत्ता में एक अच्छी महिला होने के लिए जरूरी शर्ते हैं। उनके नाम के आगे बहन लगा रहता हैं, कोई अफेयर सुनने को नहीं मिला, कोई लिव इन नही।        
सब कुछ किया सिर्फ इसलिए कि कोई उन्हें दुश्चरित्र ना कहे। और आज इतना जतन करने के बाद भी कोई उन्हें सामने से रंडी कहे,  तो उनका तिलमिलाना और अपना चरित्र प्रमाण पत्र देना लाजिमी है।
मैंने देखा है, जो लड़कियाँ अपने आदर्शो के कारण सिंगल होती हैं, उन्हें कोई कुछ कह दे तो वो बहुत तकलीफ की स्थिति में आ जाती हैं और वो भावुक होकर अपने बेदाग चरित्र की सफाई देने लगती हैं।
और ये यही स्थिति एकल पुरुषो के मामले में इसके उलट होती है।
व्यावहारिक रूप से सामान्यत: मैंने देखा है, अपने यहाँ जो पुरुष शादी नही करते हैं या अपनी पत्नियो को छोड़ देते हैं किसी अच्छे कारण से ही सही, उनकी बहुत इज्जत होती हैं। यानr पत्नी मतलब भोग-विलास की वस्तु । उसे त्यागना मतलब सांसारिकता और विलासित से ऊपर उठना। 
दूसरी बात सामान्यत: मैंने ये देखा है कि अगर आप पत्नी हैं तो पति आपका किसी भी चरित्र का हो,अगर आप अच्छी पत्नी हैं तो आपको उसका साथ देना ही है, तभी आपकी सामाजिक कद्र है। कई केस में मैंने देखा है। वो ये कहती ही नहीं कि उनका पति गलत है, या उसके लिए वो शर्मिंदा है। हर हाल में गृहस्थी बचानी ही है। रहना उनको अपने पति के साथ ही है।
(लेखिका उमा जायसवाल दिल्ली हाईकोर्ट में वकील हैं, और सामाजिक-राजनीतिक मामलों पर लिखती हैं। उनके ये विचार उनकी फेसबुक वॉल से लिए गए हैं)

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Sahi kanhaa saaale aise ghatiyaa netaa ko kaho uske ghar me randiyaa hogi tabhi Randi damjah raha hai

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