Wednesday, 22nd November 2017

अब जूलियट से नहीं, एंतोनियो से प्रेम करना रोमियो !

Thu, Mar 23, 2017 9:21 PM

- महेंद्र नारायण सिंह यादव -

रोमियो-जूलियट तो उन्हें दुश्मन नजर आने ही थे। आने भी चाहिए। रोमियो जूलियट का प्रेम उनके लिए विचित्र भी है, और घृणा की वस्तु भी है।

रोमियो-जूलियट के प्रेम को देखकर ये सहज नहीं रह पाते। एकदम असहज हो जाते हैं। वे चौंक जाते हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है। भला कोई युवक किसी युवती से प्रेम कैसे कर सकता है!

रोमियो को तो रोकना ही होगा। मजनू को समय रहते नहीं रोक पाए तो वो अपना खेल कर गया। तब ध्यान नहीं दे पाए। अब तो सचेत हैं। इससे पहले रोमियो कुछ कर गुजरे उसे रोकना ही होगा।

रोमियो है भी तो अजीब। जूलियट से ही प्रेम कर बैठा। किसी एंतोनियो से कर लेता। उसके आस-पास पुरुषों की कमी तो नहीं होगी। पुरुषों के रहते किसी स्त्री से प्रेम करने की क्या आवश्यकता पड़ गई उसे! सबसे बड़ा सवाल तो ये कि किसी स्त्री से प्रेम उसे हुआ कैसे!

रोमियो-जूलियट के प्रेम को वो लोग कैसे समझेंगे जिन्होंने केवल पुरुष-पुरुष का ही प्रेम देखा है। देखा भी है, और भोगा भी है, और सुख भी लिया है। एक प्रेम-संबंध की दूसरे प्रेम-संबंध से कैसे तुलना कर सकते हैं! नहीं, अपने वाला प्रेम-संबंध ही बेहतर है, और वही सहज है। बाकी सारे तरह के प्रेम संबंध निषिद्ध होने चाहिए।

इन्हें गलत भी कैसे कहा जाए! विपरीत-लैंगिकों को भी समलैंगिकों का प्रेम कहाँ सुहाता है!

असली आपत्ति तो चयन की सुविधा पर है। भला कोई प्रेमी अपनी मर्जी से किसी प्रेमिका का चयन कर सकता है क्या! कोई प्रेमिका भी अपनी मर्जी से अपने प्रेमी का चयन नहीं कर सकती। प्रेमी-प्रेमिका दोनों भी चाहें तो आपस में प्रेम नहीं कर सकते। संस्कृति को खतरा पैदा हो जाएगा।

सहज तो यही है कि किसी अनुशासित संगठन में आप शामिल हों, अपने वरिष्ठों को पूरा सम्मान दें, और उनकी हर तरह की इच्छाओं को पूरा करें। यही तो प्रेम है।

आप सहज भाव से अपने इस दायित्व रूपी प्रेम को पूरा करें और इसका सुख लें। आप हमेशा तो कनिष्ठ रहेंगे नहीं। समय का प्रवाह कभी रुक सकता है क्या! रुक सकता होता तो एंटी समय दस्ते बनाकर उसे रोक भी दिया जाता।

तो, समय का प्रवाह नहीं रोका जा सकता, इसलिए जो आज कनिष्ठ हैं, उन्हें कल वरिष्ठ होने का भी मौका मिलेगा, और अनुशासन में बँधे संगठन में बलिष्ठ होने का भी मौका मिलेगा।

वरिष्ठ और बलिष्ठ होते ही इनके सामने नए सुकुमार भी आएँगे। उन सुकुमारों को भी तो प्रेम की चाह होगी। प्रेम की चाह तो सबको होती है, सो इन्हें भी होगी। वरिष्ठ लोग जो कनिष्ठ के रूप में प्रेम ग्रहण करते रहे हैं, वो तब प्रेम-प्रदाता की हैसियत में आ जाएँगे।

कथित सहज प्रेम में यह कहाँ संभव हो पाता है! प्रेम जब तक बना रहेगा तब तक प्रेमी हमेशा प्रेमी ही रहेगा। प्रेमिका को भी हमेशा प्रेमिका की ही भूमिका निभानी होती है। ये तो बड़ा बोरियत वाला मामला है।

ऐसी बोरियत के रास्ते पर कोई चल रहा है या चलने की कोशिश कर रहा है तो उसे रोकना सत्ता का काम है। सत्ता और किसलिए होती है भला!

कल के दिन अपने घिसे-पिटे प्रेम और अपनी घिसी-पिटी वही प्रेमी या प्रेमिका की भूमिका में आप बोर होने लगें तो दोष तो सत्ता का ही माना जाएगा।

हो सकता है, अभी किसी को ये बात समझ न आ रही हो, लेकिन सत्ता को तो समझ में आ रहा है।

बोरियत की राह के बजाय, दिलचस्पी के हरियाली भरे रास्ते पर चलिए। कभी प्रेमी बन जाइए तो कभी प्रेमिका बन जाइए। दिन में प्रेमी रहिए, रात में प्रेमिका बन जाइए। चाहें तो एक ही साथ कभी प्रेमी और फिर तुरंत ही प्रेमिका बन जाइए।

ऐसा प्रेम तो कई तरह से प्रफुल्लित होता है। कई-कई शाखाओं से फूट पड़ता है। किसी एक के लिए प्रेमी बन जाइए, और दूसरे के लिए प्रेमिका। ऐसे अधिक सहज प्रेम में जलन भी नहीं होती। सब एक-दूसरे का सहयोग करते हैं।

इस राह में अधिक मजा है। खतरा तो बिलकुल भी नहीं है। सत्ता कतई नहीं रोक सकती, रोकना चाहेगी ही नहीं। वह तो आपको और प्रेरित करेगी।

रोमियो इस राह पर नहीं चला। इसी का तो वह नुकसान भुगत रहा है। पूरी दुनिया उसे कुछ भी समझे, लेकिन हमारे लिए तो वह एक बदनाम चरित्र ही हो गया न!

तो, रोमियो बदनाम हो गया, ठीक उसी तरह से जिस तरह से कुछ साल पहले मुन्नी बदनाम हुई थी। मुन्नी कुछ जल्दी पकड़ में आ गई, और रोमियो लंबे समय तक बचा रहा। पर, कब तक बचता!

बचा रहा तो इसका मतलब ये नहीं कि कुछ फायदे में रहा। वो इतनी सदियों तक बचा भी रहा तो उसके बदले अब ढेर सारे रोमियो पकड़े जाएँगे।

मोहब्बत इतना बड़ा गुनाह बना दिया जाएगा कि जहाँ किसी ने रोमियो बनने की कोशिश की कि तुरंत हवलदार हथकड़ी लेकर हाजिर!

अब कौन युवक अपने हाथ में हथकड़ी लगवाना चाहेगा! शाखा में जाकर एक साथ स्त्री पुरुष की भूमिका अपनाना ही सहज और सुरक्षित होगा।

ये सलाह तो बहुत पहले से लोगों को दी जा रही थी, पर सब लोग इसे समझ नहीं पा रहे थे। रोमियो के बहाने अब संदेश सभी तक पहुँच गया। रोमियो खुद बदनाम होकर भी हमारा भला कर गया।

अब इतने सबके बाद प्रेम के दुश्मन होने की तोहमत मत लगा दीजिए। प्रेम फलेगा-फूलेगा। डबल रोल में फलेगा-फूलेगा। इतना ज़रूर है कि रोमियो की जोड़ी जूलियट के साथ नहीं, एंतोनियो के साथ ही बनेगी। पुराना रोमियो जो गलती कर गया, नए वाले रोमियो को वह गलती नहीं करने दी जाएगी। इसलिए, हे रोमियो, अब जूलियट से नहीं एंतोनियो से प्रेम करना।

 

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