Wednesday, 20th September 2017

पिछड़ा वर्ग आयोग को मिलेगा संवैधानिक दर्जा

Thu, Mar 23, 2017 6:35 PM

पिछड़े वर्गों की अनदेखी करने के आरोपों के बीच गुरुवार को केंद्र की मोदी सरकार ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने की काफी पुरानी माँग मंजूर कर ली। इसके लिए सरकार संविधान में संशोधन भी करेगी।

इसके बाद ओबीसी में नई जातियों को शामिल करने के लिए संसद की अनुमति की आवश्यकता होगी। अब तक ये फैसला सरकार के स्तर पर ही होता रहता था। माना जा रहा है कि सरकार ने ये फैसला जाट आरक्षण की माँग को देखते हुए किया है।

इसके पहले तमाम ओबीसी सांसद और नेता राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने की माँग करते रहे हैं, लेकिन मोदी सरकार इससे साफ इन्कार करती रही है। लोकसभा में सागर के सांसद लक्ष्मी नारायण यादव इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते रहे हैं। उन्होंने संसद में भी ये सवाल उठाया था, लेकिन तब सामाजिक न्याय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा था कि सरकार के पास इस संबंध में अनुरोध आए हैं, लेकिन ऐसे अनुरोधों पर विचार करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है। जनता दल यूनाइटेड के नेता शरद यादव भी इस माँग को लंबे समय से उठाते रहे हैं।

सांसद लक्ष्मी नारायण यादव ने लोकसभा में यह भी जानना चाहा था कि क्या ओबीसी के सामाजिक शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए कोई कमेटी गठित की जाएगी। इसके जवाब में भी सरकार ने नहीं ही कहा था। राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर का जवाब था कि ओबीसी के विकास के लिए किसी और कमेटी के गठन का सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं है।

अब बदली परिस्थितियों में सरकार के इस फैसले की बड़ी वजह ओबीसी सांसदों की बढ़ती नाराजगी के साथ-साथ जाट आरक्षण का बड़ा मुद्दा है। ओबीसी के सांसद ये कहने लगे थे कि अगर सरकार का रवैया इसी तरह से ओबीसी विरोधी रहा तो वो किस मुंह से अपनी जाति और समुदाय के लोगों से भाजपा को वोट देने का आग्रह कर सकेंगे।

दूसरा मुद्दा जाट आरक्षण का है। जाट नेताओं और हरियाणा सरकार के बीच बातचीत की पहली शर्त ही पिछड़ा वर्ग आयोग के नए सिरे से गठन की थी क्योंकि इसका कार्यकाल खत्म हो चुका है।

अब सरकार इस नए आयोग को बनाकर उसे संवैधानिक दर्जा देगी। पिछला कानून संसद से पारित करके बनाया गया था। इसके लिए सरकार एक कमेटी का गठन करेगी जो नए आयोग की दशा और दिशा को लेकर छह महीने के अंदर सरकार को एक रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट में जाटों के सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के बारे जिक्र होगा। सरकार के सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट के बाद ही जाटों को पुख्ता तौर पर आरक्षण दिया जाएगा।

सागर के सांसद लक्ष्मी नारायण यादव ने कैबिनेट के इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है और इस बात पर काफी खुशी जताई है कि मोदी सरकार ने पिछड़े वर्गों के हितों से जुड़ी इस बहुत ही अहम माँग को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि अब तक पिछड़ा वर्ग आयोग की वास्तव में कोई अहमियत थी ही नहीं, और न ही इसके कोई सुझाव किसी तरह से बाध्यकारी होते थे। श्री यादव ने कहा कि अब पिछड़ा वर्ग आयोग का नए सिरे से गठन होगा, पिछड़े वर्गों के हितों की अच्छी जानकारी रखने वाले लोग इसमें रखे जाएँगे जो सरकार के पास बेहतरीन और व्यावहारिक सुझाव देंगे जिससे पूरे ओबीसी वर्ग का भला होगा।

श्री यादव ने यह भी कहा कि इसके साथ-साथ ओबीसी में क्रीमीलेयर की सीमा भी बढ़ाकर 12 लाख की जानी चाहिए। वो इस बारे में लोकसभा में भी मांग उठा चुके हैं। पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद वे आयोग के जरिए भी इस माँग को उठाएँगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस बारे में भी व्यावहारिक और उदार रवैया अपनाएगी और इस बात को समझेगी कि सातवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद छोटे-छोटे कर्मचारियों का भी वेतन काफी बढ़ गया है, और ऐसे में क्रीमी लेयर की सीमा कम से कम 12 लाख रुपए सालाना होनी चाहिए। साथ ही इसकी नियमित तौर पर समीक्षा करने का भी प्रावधान होना चाहिए।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम 1993 में बना था, जो कि जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे भारत में लागू है। एक फरवरी 1993 से यह लागू हुआ था। इस आयोग का काम नागरिकों के किसी वर्ग की सूची में पिछड़े वर्ग के रूप में शामिल किए जाने के अनुरोधों की जांच करना है। साथ ही यह केंद्र सरकार को ओबीसी के कल्याण के लिए उचित सुझाव भी देता है।

वर्तमान में इस आयोग को कुछ शक्तियां मिली हुई हैं जिनमें वह देश के किसी भी हिस्से से किसी व्यक्ति को समन करने और हाजिर कराने का अधिकार रखता है। किसी भी दस्तावेज को प्रस्तुत करने को भी आयोग कह सकता है। आयोग का एक अध्यक्ष होता है, जो सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट का वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश होता है।

आयोग में अध्यक्ष के अलावा चार अन्य सदस्य होते हैं, जिनमें एक समाज विज्ञानी, पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों का विशेष ज्ञान रखने वाले दो व्यक्ति और एक भारत सरकार के सचिव स्तर का अधिकारी होता है।

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