Tuesday, 19th September 2017

अबला नहीं, नारी हूँ

Wed, Mar 8, 2017 2:47 PM

- नेहा  

क्योकि मैं.......
अबला नहीं, नारी हूँ
बस इक्कीसवीं सदी से हारी हूँ

द्रोपदी नहीं, काली हूँ
कोहरा नहीं, आंधी हूँ
क्योकि मैं.......
अबला नहीं, नारी हूँ
बस इक्कीसवीं सदी से हारी हूँ

कायर नहीं, निडर हूँ
अँधेरा नहीं, रौशनी हूँ
क्योकि मैं.......
अबला नहीं, नारी हूँ
बस इक्कीसवीं सदी से हारी हूँ

कुरीति नहीं, रीति हूँ
सोच नहीं, समझ हूँ
क्योकि मैं.......
अबला नहीं, नारी हूँ
बस इक्कीसवीं सदी से हारी हूँ

अहम नहीं, श्रम हूँ
आवाज नहीं, आगाज हूँ
क्योकि मैं.......
अबला नहीं, नारी हूँ
बस इक्कीसवीं सदी से हारी हूँ

रूढ़िवादी सोच नहीं, अभिव्यक्ति हूँ
कल्पना नहीं, दृष्टि हूँ 
क्योकि मैं.......
अबला नहीं, नारी हूँ
बस इक्कीसवीं सदी से हारी हूँ

सहमी नहीं, सरल हूँ
दुर्लभ नही, द्रढ़ हूँ
क्योकि मैं.......
अबला नहीं, नारी हूँ
बस इक्कीसवीं सदी से हारी हूँ

कठोर नहीं, नरम हूँ
एकल नहीं, संयुक्त हूँ
क्योकि मैं.......
अबला नहीं, नारी हूँ
बस इक्कीसवीं सदी से हारी हूँ

उम्मीद ही नहीं, उड़ान हूँ
ज्ञान ही नहीं, सुविज्ञान हूँ
क्योकि मैं.......
अबला नहीं, नारी हूँ
बस इक्कीसवीं सदी से हारी हूँ

(कवयित्री नेहा  बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त हैं। वर्तमान में वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पोषण विज्ञान में पीएचडी कर रही हैं।) 

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ऐसी निडर महिला को मेरा कोटि कोटि सलाम आपकी कलम कभी रुकनी नही चाहिए प्रवीण पंकज यादव छात्र बनारस हिन्दू विश्विद्यालय वाराणसी

Praveen pankaj yadav

I followed you mam from a long time, I have always been an admirer of you. So true and touchy lines.

Pawan Yadav

Very...nice...neha..ji

Gaurav yadav

Nice effort Keep it up

Ashok

Very nce

rakesh yadav

वाह दी@

सन्तोष यादव सन्नी भईया

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