Friday, 15th December 2017

अरे देखो कौन आया !

कई साल पहले एक राक्षस आया जिसे राम ने मार गिराया सबने मिलकर जश्न मनाया हर दशहरे को उसे जलाया ।। जलकर राख वह हो गया अगले दिन सबके मन का राम सो गया । कई सिताओ ने चिल्लाया पर बचाने हनुमान ना आया। फिर एक रावण हमनें पाया किसने इसे जगाया ? कौन इसे है लाया? उत्तर स्पष्ट...

चोपड़ा साहब की बिटिया, कलुआ और राष्ट्रपति का बॉडीगार्ड!

- महेंद्र नारायण सिंह यादव - सेना के सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे को आप लोग हैं न, समझिए नहीं पाए। उसमें भारत की तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के "अपमान" का कोई इरादा हइए नहीं। पहली बात हलफनामा तब दिया था जब राष्ट्रपति मुखर्जी बाबू थे। तब ये पता ही नहीं था...

मेमॉरीज़ फॉरेवर : सारिका गिरिया

  - महेंद्र नारायण सिंह यादव -  सारिका गिरिया नाम है एक उभरती हुई लेखिका का, लेकिन उनकी एक पहचान दक्षिण भारत की मशहूर कन्ज्यूमर ड्यूरेबिल्स और इलेक्ट्रॉन्क्स चेन गिरिया’ज़ के साथ-साथ बंगलौर के गिरियाज़ चिल्ड्रन्स एक्सप्लोरियम से भी जुड़ी है। अपने पति मनीष गिरिया के साथ मिलकर उन...

माँ की याद में.. . . . . .. . . . .

  मेरी  जिन्दगी का सबसे बड़ा दिन "माँ" का जन्मदिन सुबह सुबह की चहल-पहल में जो मुस्कुराती थी, वो माँ थी। सबके जन्मदिन को त्यौहार सा मनाती थी, वो माँ थी। वो माथे का टीका थी और सुबह की पूजा भी, जो हमारे घर आने का इंतज़ार करती थी, वो माँ थी। कभी चोट लग जाए तो डांट माँ थी,...

कैसी महिला सहानुभूति ?

    - नेहा     मासूमियत सी उम्मीद लिए महिला महिला के पास आई अर्थ न आधार न पक्ष न सहमति न फेमिनिज्म का खुमार लाई  पुरुषो की सोचपर धिक्कार ये आरोप लगाई जब झूठ की पोटली थमा दुसरों की सहानिभूति पाई फिर कैसी ये महिला सहानुभूति हुई?...

खैर ख्वाब

                                                                             ...

"माँ"

                    माँ ममता की मूरत है माँ बेहद ही खूबसूरत है। माँ ईश्वर का अवतार है माँ गीता का सार है।। माँ के आँचल में ममता है माँ की आँखों में प्यार है। माँ गंगा सी निर्मल है चरणों में चारो धाम है।। माँ...

"मेरा हमराही, मेरा आत्म विश्वास। ...... ."

                                                                         ...

अम्बिकाप्रसाद दिव्य पुरस्कारों हेतु प्रस्ताव आमंत्रित ।

भोपाल ! "साहित्य सदन" भोपाल द्वारा राष्ट्रीय ख्याति के बीसवे अम्बिकाप्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों हेतु साहित्य की अनेक विधाओं में पुस्तकें आमंत्रित की गई हैं । जानकारी देते हुए संस्थान संचालक जगदीश किंजल्क ने बताया कि उपन्यास , कहानी , कविता , व्यंग , निबन्ध एवं बाल साहित्य विधा...

लड़की दुनिया में क्यों आई?

  - नेहा   अजीब सी उलझन अजीब सी तकलीफ लड़की दुनिया में क्यों आई ?   पूछती चली आई बचपन की बोली से बढ़ती उम्र की झोली तक उत्तर न मिला मुझे एक भी हमजोली से दर्द से गुजरती हुई बचपन से सहती आई फिर भी प्रकृति ने तकलीफ भी मुझ में ही आजमा...

सिर्फ एक दिन के लिए

- आशुतोष सिंह    सिर्फ एक दिन ! हाँ सिर्फ एक दिन के लिए ! बस एक दिन ! निकल आइए बाज़ार में यूँ ही बिना किसी के काम के ! बैठिये किसी भी दुकान में बिना कुछ ख़रीदे घंटों, झाँकिये शीशों से रेस्टोरेंट के अंदर बैठे लोगों को,  देखिये ऊँची ऊँची बिल्डिंगों को रंगीन ग...

नए पथ पर अज्ञात पथिक

- आशुतोष सिंह   चाहे कहीं भी चले जाएं आप ! एक ट्रेन सालों से आपका पीछा कर रही है !  सुनाई पड़ती है उसकी आवाज़ आधी रात को,  शहर की कमर को छूकर निकलती है हर रोज़ अँधेरे में अनजान यात्री के साथ किसी अज्ञात सफ़र को ! मैं नहीं देख पाया आज तक उसे ! किसी रूह की तरह वो...

अब जूलियट से नहीं, एंतोनियो से प्रेम करना रोमियो !

- महेंद्र नारायण सिंह यादव - रोमियो-जूलियट तो उन्हें दुश्मन नजर आने ही थे। आने भी चाहिए। रोमियो जूलियट का प्रेम उनके लिए विचित्र भी है, और घृणा की वस्तु भी है। रोमियो-जूलियट के प्रेम को देखकर ये सहज नहीं रह पाते। एकदम असहज हो जाते हैं। वे चौंक जाते हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है। भला कोई युवक किसी...

हमें आजादी चाहिए.....

    - नेहा -  हमें आरक्षण नहीं आजादी चाहिए.... हमें आजादी चाहिए ... हमें आजादी चाहिए संकुचित सोच से... हमें आजादी चाहिए मूर्खों के विचारों से... हमें आजादी चाहिए समय की पाबन्दी से... हमें आजादी चाहि...

अबला नहीं, नारी हूँ

- नेहा   क्योकि मैं....... अबला नहीं, नारी हूँ बस इक्कीसवीं सदी से हारी हूँ द्रोपदी नहीं, काली हूँ कोहरा नहीं, आंधी हूँ क्योकि मैं....... अबला नहीं, नारी हूँ बस इक्कीसवीं सदी से हारी हूँ कायर नहीं, निडर हूँ अँधेरा नहीं, रौशनी हूँ क्योकि मैं....... अबला नहीं, नारी ह...

उस सूखे हुए गुलाब के बहाने......

- शालू यादव  ये भेलेंटाइन वेलेंटाइन,पिरेम दिवस की नौटंकी हमको कब्बो समझ नही आई। जबसे होश संभाला तबसे फर्जीवाड़ा ही लगता रहा ये सब। गुलाब में तो कुछ खास याद नही कि कब मिले ,कैसे मिले, लेकिन एक गुलाब जो पता नही कबसे 'राही मासूम रजा' की किताब 'नीम का पेड़' में पड़े पड़े सूख गय...

डाँ विमल कुमार शर्मा को "रंजन कलश शिव सम्मान"।

भोपाल :  साहित्यिक संस्था रंजन कलश के वार्षिक अलंकरण समारोह में  शहर के चर्चित वरिष्ठ साहित्यकार डाँ विमल कुमार शर्मा को उनके व्यंग्य संग्रह ' पत्नी पुराण' के लिये रंजन कलश शिव सम्मान से विभूषित किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री शशांक पूर्व अपर महानिदेशक दूरदर्शन व मुख्य अतिथि श्...

साहित्य पत्रिका 'अक्षर शिल्पी' को रामेश्वर गुरु पुरस्कार !

भोपाल। विगत 14 वर्षों से प्रकाशित हो रही साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका 'अक्षरशिल्पी' को रामेश्वर गुरु पुरस्कार दिया जाएगा। यह पुरस्कार माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान की ओर से प्रदान किया जाएगा।  यह जानकारी देते हुए सप्रे संग्रहालय की निदेशक श्रीमती मंगला अ...

जनहितैषी राजा राव लाल सिंह जी

- राव बिजेंद्र सिंह - प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक रेवाडी राज्य के राजा राव गोपालदेव जी के सपुत्र राव लालसिंह जी का जन्म मंगसर शुदी चौदस संवत् १९१६ विक्रमी (9 दिसम्बर 1859) में उनकी ननिहाल उदयरामसर (बीकानेर, राज०) के अहीर ठिकाने में हुआ था।  इनकी माता का नाम रानी किशनकौर था उदयरामस...

राजनाथ की हुई भारी फजीहत

नोटबंदी से पैदा जनाक्रोश का पहला सामना केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को फतेहपुर में करना पड़ा जिन्हें भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने की तैयारी में है। हालात ये हो गई कि कड़ी सुरक्षा के बावजूद, लोगों ने मुर्दाबाद के नारे भी लगाए और काले झंडे भी दिखाए।  फतेहपुर में परिवर्तन यात्र...

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